रिजर्व बैंक महंगाई नियंत्रित करने में सरकार को बताएगा नाकामी की वजह

रिजर्व बैंक महंगाई नियंत्रित करने में सरकार को बताएगा नाकामी की वजह

मुंबई, 30 अक्तूबर (एजेंसी)

6 वर्ष पहले मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का गठन होने के बाद पहली बार आरबीआई (आरबीआई) लगातार 9 महीनों तक मुद्रास्फीति को निर्धारित दायरे में नहीं रख पाने पर एक रिपोर्ट तैयार कर गवर्नमेंट को सौंपेगा. साल 2016 में मौद्रिक नीति निर्धारण के एक व्यवस्थित ढांचे के रूप में एमपीसी का गठन किया गया था. उसके बाद से एमपीसी ही नीतिगत ब्याज दरों के बारे में फैसला लेने वाली सर्वोच्च इकाई बनी हुई है. एमपीसी ढांचे के अनुसार गवर्नमेंट ने भारतीय रिजर्व बैंक को यह जिम्मेदारी सौंपी थी कि मुद्रास्फीति चार फीसदी (दो फीसदी घट-बढ़ के साथ) से नीचे बनी रहे. हालांकि, इस वर्ष जनवरी से ही मुद्रास्फीति लगातार 6 फीसदी से ऊपर बनी हुई है. सितंबर में भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 7.4 फीसदी पर दर्ज की गई. इसका मतलब है कि लगातार नौ महीनों से मुद्रास्फीति छह फीसदी के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है. मुद्रास्फीति का यह स्तर दर्शाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक अपना निर्दिष्ट दायित्व निभाने में असफल रहा है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की धारा 45जेडएन में प्रावधान है कि लगातार तीन तिमाहियों यानी लगातार नौ महीनों तक मुद्रास्फीति के निर्धारित स्तर से ऊपर रहने पर केंद्रीय बैंक को अपनी नाकामी के बारे में गवर्नमेंट को एक समीक्षात्मक रिपोर्ट सौंपनी होगी. इस रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक को यह बताना होता है कि मुद्रास्फीति को काबू में रख पाने में उसकी नाकामी की क्या वजह रही? इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक को यह भी बताना होता है कि वह स्थिति को काबू में लाने के लिए किस तरह के कदम उठा रहा है. इन वैधानिक प्रावधानों और मुद्रास्फीति के मौजूदा स्तर को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने तीन नवंबर को एमपीसी की विशेष बैठक बुलाई है जिसमें गवर्नमेंट को सौंपी जाने वाली रिपोर्ट को तैयार किया जाएगा. एमपीसी के छह-सदस्यीय पैनल की प्रतिनिधित्व गवर्नर शक्तिकांत दास करेंगे. भारतीय रिजर्व बैंक ने गत बृहस्पतिवार को जारी बयान में बोला था कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की धारा 45जेडएन के प्रावधानों के अनुरूप तीन नवंबर को एमपीसी की एक अतिरिक्त बैठक बुलाई जा रही है. यह धारा मुद्रास्फीति को तय दायरे में रख पाने में विफलता से जुड़े प्रावधान निर्धारित करती है. गवर्नमेंट ने 31 मार्च,2021 को जारी एक अधिसूचना में बोला था कि मार्च, 2026 तक भारतीय रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति को चार फीसदी (दो फीसदी अधिक या दो फीसदी कम) के भीतर रखना होगी. इस तरह गवर्नमेंट ने पांच सालों के लिए मुद्रास्फीति को अधिकतम छह फीसदी तक रखने का दायित्व भारतीय रिजर्व बैंक को सौंपा था. लेकिन साल 2022 इस लक्ष्य की दिशा में असफल साबित हुआ है. जनवरी से लेकर सितंबर तक लगातार मुद्रास्फीति छह फीसदी से अधिक रही है. इसपर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एमपीसी की सिफारिश पर नीतिगत रेपो रेट को पिछले पांच महीनों में 1.90 फीसदी तक बढ़ा दिया है. अब रेपो रेट 5.90 फीसदी हो चुकी है जो इसका तीन वर्ष का सर्वोच्च स्तर है.