सिर्फ 60 मिनट में लोन की पेशकश कर 360 प्रतिशत तक ब्याज वसूल

सिर्फ 60 मिनट में लोन की पेशकश कर 360 प्रतिशत तक ब्याज वसूल

आप कितनी भी बेहतर वित्तीय योजना बना लें लेकिन लोन लेने की आवश्यकता कभी न कभी आपको पड़ ही जाती है. बैंक व गैर-वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) लोन के लिए बहुत ज्यादा पड़ताल व कवायद के बाद लोन देती हैं. इसे मौका के रूप में देखकर औनलाइन लोन देने वाली कंपनियां (फिनेटक) सिर्फ 60 मिनट में लोन की पेशकश कर 360 प्रतिशत तक ब्याज वसूल रही हैं. इससे लोन मिलना तो सरल हो गया है, लेकिन लोन की गिरफ्त में फंसने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. वित्तीय विशषज्ञों का बोलना है इससे कंपनियों को तो लाभ हो रहा है लेकिन आम लोग लोन के जाल में फंसते जा रहे हैं. सरल सा दिखने वाला यह लोन मुसीबत बनता जा रहा है. पेश है एक रिपोर्ट

कर्ज पर तय राशि वसूलती हैं कंपनियां
बैंक या एनबीएफसी आपको लोन देती हैं तो उनका ब्याज प्रतिशत के रूप में होता है. लेकिन फिनटेक हर लोन पर एक तय राशि ब्याज के रूप में लेती हैं जो ज्यादा महंगा होता है. उदाहरण के लिए एक कंपनी 15 हजार रुपये लोन 15 दिन के लिए देती है व 16वें दिन 16,125 रुपये ब्याज समेत वसूलती है. प्रतिशत के रूप में देखें तो यह 0.5 प्रतिशत प्रति दिन व 180 प्रतिशत सालाना हुआ जो बेहद ऊंचा है. इस तरह का कंपनियां जो ब्याज वसूलती हैं उसका दायरा 40 से 360 प्रतिशत तक है जिसमें वह कई तरह के शुल्क को भी शामिल करती हैं.

ईएमआई का विकल्प नहीं
हिंदुस्तान में क्रेडिटबाजारडॉटकॉम, फोनपरलोनडॉटइन व क्विकरक्रेडिटडॉटइन जैसी 15 से 20 कंपनियां बेहद छोटी अवधि के लिए इस तरह का लोन देती हैं जो 15 दिन से एक माह के लिए होता है. वेतन मिलते ही ब्याज समेत पूरी राशि वसूल लेती हैं. इसमें ईएमआई का विकल्प नहीं होता है. यह 500 रुपये से एक लाख रुपये तक लोन देती हैं. लोन के लिए सबसे पहली योग्यता है कि आयु कम से कम 21 साल होनी चाहिए. दस्तावेज के नाम पर पहचान पत्र, पैन कार्ड, आवास का पता व तीन माह के वेतन का विवरण मांगती हैं. सरल होने व किसी बड़ी कठिन में फंसे होने की वजह से कई बार लोग इनके आकर्षण में फंस जाते हैं जो बाद में बहुत ज्यादा महंगा साबित होता है. इस तरह की कंपनियों से लोन ले चुके कई ग्राहक बेहद परेशान हो चुके हैं. ऐसे लोगों का बोलना है कि लोन चुकाने में देरी पर फोन पर कई तरह की धमकियां मिलती हैं व घर पर बाउंसर भेजकर जबरन लोन वसूली तक की बात कही जाती है.

सस्ते या जल्दी के चक्कर में न फंसें
इन दिनों बैंक या फिनटेक कंपनियों की ओर से लगातार फोन, मैसेज या ई-मेल से सस्ते लोन की पेशकश की जा रही है. इसके साथ की पहले से लिए कर्ज़ को रीफाइनेंस यानी फिर से पुनर्गठन की सुविधा भी उपलब्ध कराने की बात कही जाती है. कंपनियां इसके तहत एक लोन के होते हुए दूसरा लोन लेकर पहले को पुनर्गठन की सुविधा देती हंै. बैंक व फिनटेक कंपनियों का इसके पीछे का उद्देश्य अपना कारोबार बढ़ाना है. वित्तीय सलाहकारों का बोलना है कि यह एक तरह का जाल है. इसमें युवा वर्ग तेजी से फंस रहे हैं. वह एक के बाद दूसरा लोन ले रहे हैं व लोन के जाल से निकल नहीं पा रहे हैं.

कर्ज की लत खतरे की घंटी
भारतीय मिलेनियल्स (सहस्राब्दी पीढ़ी के लोग) लोन लेने में भय नहीं रहे हैं. उनको यह विश्वास है कि अगर वह लोन नहीं देंगे तो उनके माता-पिता इसका भुगतान करेंगे. विशेषज्ञों के अनुसार यह खतरे की घंटी है. युवा आबादी बचत पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है व उसके खर्च बढ़ते जा रहे हैं. ऐसे में अगर जिम्मदारियों का बोझ बढ़ेगा तो वित्तीय स्थिति व बेकार होगी. वित्तीय सलाहकारों का बोलना है कि अगर आप ऊंचे ब्याज पर लिए लोन को चुकाने के लिए कोई दूसरा लोन कम ब्याज पर लेते हैं तो यह बुद्धिमानी भरा निर्णय होगा. लेकिन, अगर आप दूसरा लोन इसलिए ले रहे हैं कि आपके पास पहले लिए हुए लोन चुकाने का पैसा नहीं है तो इसका मतलब है कि आपकी वित्तीय स्थिति बेहद बेकार है व आप लोन के जाल में फंसते चले जा रहे हैं. यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि बैंकों व फिनटेक कंपनियों की ओर से सरल लोन मिल तो रहा है लेकिन उसे चुकाना भी है. आाप सिर्फ लोन लेकर लोन को चुका नहीं सकते. आपकी कमाई भी उसके अनुसार होनी चाहिए.

कर्ज के जाल में फंस रहे युवा
एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2018 में 23 प्रतिशत वेतनभोगी मिलेनियल्स ने पर्सनल ईएमआई को पुनगर्ठित करने के लिए छोटी अवधि का लोन फिनटेक कंपनियों व बैंकों से लिया. वहीं 14 प्रतिशत ने अपने लोन का भुगतान करने के लिए लोन लिया. युवाओं द्वारा लोन लेने की औसत अवधि 60 दिन रही. रिपोर्ट के मुताबिक 44 प्रतिशत व्यक्तिगत कर्ज़ 26 से 35 वर्ष के आयु के लोगों ने लिया. वहीं 13 प्रतिशत की आयु 25 वर्ष या उससे कम थी.

15 दिन से 30 दिन की बेहद कम अवधि के लिए लोन देती हैं कंपनियां
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