बडे़ काम की है एक छोटी सी लौंग, जाने 10 जादुई फायदे

बडे़ काम की है एक छोटी सी लौंग, जाने 10 जादुई फायदे

लौंग का उपयोग पूजा-पाठ से लेकर खाने में मसाले की तरह किया जाता है। छोटी सी लौंग को अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके कई फायदे भी हैं। साधारण से सर्दी-जुकाम से लेकर कैंसर जैसे गंभीर रोग के उपचार में लौंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसके गुण कुछ ऐसे हैं कि न सिर्फ आयुर्वेद बल्कि होम्योपैथ व एलोपैथ जैसी चिकित्सा विधाओं में भी इसका बहुत अधिक महत्व है। आइए जानते हैं लौंग के फायदों के बारे में....

मसाले के रूप में लौंग का इस्तेमाल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसमें प्रोटीम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें विटामिन A और C, मैग्नीज और फाइबर भी पाया जाता है।

सर्दी जुकाम होने पर एक-दो लौंग को मुंह में डालकर हल्का चबाते हुए उससे निकलने वाले रस को चूसे। इससे सर्दी के साथ गले की खराश और दर्द में भी आराम मिलता है। साथ ही सूखी खांसी में भी लौंग फायदेमंद होती है।

लौंग एक बेहतरीन नेचुरल पेनकिलर है। इसमें मौजूद यूजेनॉल ऑयल दांतों के दर्द से आराम दिलाने में बहुत फायदेमंद है। दांतो में कितना भी दर्द हो, लौंग के तेल इस्तेमाल करने से दर्द ठीक हो जाता है। इसके अलावा इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जिसके कारण इसका इस्तेमाल टूथपेस्ट, माउथवाश और क्रीम बनाने में भी किया जाता है।

गठिया रोग में जोड़ों में होने वाले दर्द व सूजन से आराम के लिए भी लौंग बहुत लाभदायक है। इसमें फ्लेवोनॉयड्स अधिक मात्रा में पाया जाता है। कई एक्सपर्ट्स गठिया के इलाज के लिए लौंग के तेल की मालिश करने को कहते हैं। 

लौंग के तेल का अरोमा इतना स्ट्रॉंग होता है कि इसे सूंघने से जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस, आदि श्वास संबंधी समस्याओं में फौरन आराम मिल जाता है।

लौंग व इसके तेल में कई एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जिससे फंगल इंफेक्शन, कटने, जलने, घाव या त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं के इलाज में इसका उपयोग किया जाता है। बता दें कि लौंग के तेल को कभी भी सीधे त्वचा पर नहीं लगाना चाहिए बल्कि किसी तेल में मिलाकर लगाना चाहिए।

भोजन में लौंग का इस्तेमाल करने से कई पाचन संबंधी समस्याओं में आराम मिलता है। इसमें मौजूद तत्व अपच, गैस्ट्रिक, डायरिया आदि समस्याओं से निजात दिलाने में फायदेमंद है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि लौंग के इस्तेमाल से फेफड़े के कैंसर और त्वचा के कैंसर को भी रोकने में काफी मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद युजेनॉल नामक तत्व इस दिशा में काफी फायदेमंद है।

इतना ही नहीं, लौंग का सेवन शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाता है। ब्लड शुद्ध करता है। इसका इस्तेमाल मलेरिया, हैजा जैसे रोगों के उपचार की दवाओं में भी किया जाता है। डायबिटीज में लौंग के सेवन से ग्लूकोज का स्तर कम होता है। 

वहीं लौंग का इस्तेमाल मच्छरों को भी दूर भगाने के लिए भी किया जाता है। लौंग के तेल की महक से मच्छर दूर भाग जाते हैं। मच्छरों को दूर भगाने के लिए लौंग के तेल में नारियल तेल मिलाकर उसे अपनी त्वचा पर लगाएं। ये उपाय एक मॉस्किटो रिपेलेंट क्रीम की तरह काम करता है।


महाराष्ट्र से राहत की खबर, ओमिक्रॉन से संक्रमित प्रदेश के पहले मरीज को अस्पताल से मिली छुट्टी

महाराष्ट्र से राहत की खबर, ओमिक्रॉन से संक्रमित प्रदेश के पहले मरीज को अस्पताल से मिली छुट्टी

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में रहने वाले कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन स्वरूप से संक्रमित प्रदेश के पहले मरीज को बुधवार को नकारात्मक जांच रिपोर्ट आने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पेशे से मरीन इंजीनियर और कल्याण डोंबिवली नगरपालिका क्षेत्र के रहने वाला यह 33 वर्षीय मरीज नवंबर के अंतिम सप्ताह में दुबई के रास्ते दक्षिण अफ्रीका से दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा था।

वह 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से उड़ान में सवार हुआ था। नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचने पर उसका आरटी-पीसीआर परीक्षण किया गया था। जब वह मुंबई पहुंचा, तब दिल्ली हवाईअड्डे के अधिकारियों की ओर से सूचित किया गया था कि उसकी कोविड-19 की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य अधिकारियों ने तब जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए उसके स्वाब के नमूने भेजे थे और परीक्षण रिपोर्ट में उसके ओमिक्रॉन संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी।

उक्त शख्स ने इस साल अप्रैल में एक निजी कंपनी के जहाज पर अपनी ड्यूटी ज्वाइन की थी, तभी से वह समुद्री सफर पर था। अधिकारियों ने कहा कि उसने ड्यूटी के दौरान कोविड-19 का टीका नहीं लगवाया था। हालांकि उसने टीका लगवाने के प्रयास किए थे, जो सफल नहीं हुए। कल्याण डोंबिवली नगर निगम (केडीएमसी) के आयुक्त डॉ. विजय सूर्यवंशी ने संवाददाताओं को बताया कि मरीज को कल्याण शहर के एक कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां से बुधवार शाम छह बजे उसे छुट्टी दे दी गई।

उन्होंने बताया कि मरीज को इसलिए छुट्टी दे दी गई क्योंकि उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। मानक प्रोटोकॉल के अनुसार, उसके दो आरटी-पीसीआर परीक्षण किए गए और दोनों नकारात्मक निकले। वह अभी पूरी तरह से ठीक है और कोई लक्षण नहीं हैं। उन्होंने कहा, इसके बावजूद भी उक्त शख्स को अभी सात दिन के होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है।

डॉ. सूर्यवंशी ने कहा कि संयोग से आज उक्त मरीज का जन्मदिन था। राज्य में ओमिक्रॉन स्वरूप के  अब तक 10 मामले दर्ज हुए हैं। केंद्र सरकार के अनुसार, ओमिक्रॉन को लेकर जोखिम वाले देशों में यूके, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर, हांगकांग और इस्राइल सहित यूरोपीय देश शामिल हैं।