गर्भधारण के बाद इस समस्या के कारण होती है गर्भ में पल रहे बच्चे की वृद्धि और विकास मे परेशानी

गर्भधारण के बाद इस समस्या के कारण होती है गर्भ में पल रहे बच्चे की वृद्धि और विकास मे परेशानी

गर्भधारण के बाद अक्सर थायराइड की समस्या महिलाओ में देखी जा सकती है ऐसी स्थिति में गर्भ में पल रहे बच्चे की वृद्धि और विकास मे परेशानी होती है और इसका समय रहते पाता लगाना और उपचार करना अत्यंत आवशयक हो जाता है

असल में हाइपोथायरोडिज्म अधिकतर महिलाओं को होता है, जिसमें थायराइड ग्लैंड उचित मात्रा में हर्मोन नहीं बना पाता. ये एक आम बीमारी है और आजकल भारत में 10 में से 1 के लिए ये रिस्क बना हुआ है. जिसमें प्रेग्नेंट महिला 13 प्रतिशत से 44 प्रतिशत प्रभावित है. थायराइड में डिसऔर्डर माँ और बच्चा दोनों के लिए घातक होती है. समय पर एक साधारण स्क्रीनिंग टेस्ट से इसका इलाज संभव है.

अधिकतर महिलाओं की हाइपोथायराडिज्म होता है,जिसमें थायराड ग्लैंड उचित मात्रा में हर्मोन नहीं बनाता, ऐसे में सही समय में इसका इलाज करना जरुरी है ,क्योंकि इसका सौ प्रतिशत इलाज संभव है. इससे पीड़ित महिलाओं में अनियमित माहवारी और गर्भधारण करने में मुश्किल महसूस होती है. इसलिए गर्भधारण के तुरंत बाद टीएसएच की जांच करवा लेनी चाहिए,क्योंकि इसका प्रारंभिक लक्षण बहुत अधिक दिखाई नहीं पड़ता, इसलिए महिलाएं इसे नजरअंदाज करती है,पर कुछ लक्षण निम्न है,


 
इसके शुरूआती लक्षणों में कुछ इस प्रकार है की चेहरे पर सूजन, त्वचा में सिकुडन, ठंड सहन न कर पाना, अचानक तेजी से वजन का बढ़ना, कब्ज की परेशानी, मांस पेशियों में ऐठन आदि है. ऐसा महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से मिलकर थायराइड स्क्रीनिंग अवश्य करवाएं. थायराइड के सही इलाज न होने से बच्चे में निम्न समस्या दिखाई पड़ सकती है,

बच्चे की मस्तिष्क का सही तरह से विकसित न होना, प्रीमेच्योर डिलीवरी होना, मृत शिशु का जन्म होना, बच्चे का वजन कम होना,
दिल की धड़कन का तेज होना, उसका आई क्यू लेवल कम होना आदि है. जिसे बाद में ठीक कर पाना आसान नहीं होता. इस बारें में स्त्री रोग विशेषज्ञ डौ. नंदिता पाल्शेतकर कहती है कि 3 में से एक महिला को ये पता नहीं होता है कि उसे थायराइड है. इसलिए देर से पता चलने के बाद इसका इलाज करना मुश्किल हो जाता है. थायराइड से पीड़ित महिला को केवल पहले ही नहीं डिलीवरी के बाद भी उनमें इसकी समस्या बनी रहती है, जैसे की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना, चिडचिडापन का होना, वजन का अधिक बढ़ जाना,
अधिक थकान अनुभव करना, केशों का अधिक झड़ना आदि होता है. इसलिए जब भी ऐसी शिकायत हो डौक्टर की तुरंत सलाह लेने की जरुरत होती है.

थायराइड का इलाज और सतर्कता ही इसका एक मात्रा इलाज है और इसके लिए निरंतर जागरूक रहकर गर्भावस्था के दौरान जांच करवाते रहना चाहिए और इसके साथ ही डॉक्टर की सलाह भी इसका इलाज है।