सर्दी के मौसम में इन 4 हरी सब्जियों का करें सेवन,

सर्दी के मौसम में इन 4 हरी सब्जियों का करें सेवन,

 गर्मियों की बजाय ठंड में सब्जियों में वैराइटी बाजार में ज्यादा आती है। खासतौर पर हरी पत्तेदार सब्जियां। ये सब्जियां सेहत के लिए तो फायदेमंद होती हैं साथ ही ये शरीर में आयरन की कमी को भी दूर करती है। जो शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण घटक भी है। अगर आप आयरन की कमी से परेशान हैं और बेस्ट सॉल्यूशन ढूंढ रहे हैं तो ठंड के मौसम में आने वाली ये सब्जियां आपकी इस समस्या को दूर कर सकती हैं। 

पालक

पालक कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें आयरन के अलावा विटामिन और खनिजों का भंडार है। जो रोग प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के अलावा शरीर में हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाती है। 

पत्तागोभी 

वैसे तो आजकल बाजार में ज्यादातर सब्जियां 12 महीने मिलने लगी हैं लेकिन कुछ सब्जियां ऐसी हैं जिनका स्वाद ठंड के मौसम में ही आता है। इन्हीं सब्जियों में से एक सब्जी पत्तागोभी है। पत्तागोभी आयरन से भरपूर होती है। इसके साथ ही ये वजन घटाने और स्किन को और भी बेहतर बनाने में भी कारगर है। 

ब्रॉकली

ब्रॉकली को सुपरफूड कहा जाता है। इसमें विटामिन बी के अलावा विटामिन सी, आयरन, फोलेट, जिंक और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होता है। इसे आप उबालकर या हल्का सा फ्राई करके भी खा सकते हैं। ये स्वाद में तो बढ़िया लगती है साथ ही फायदेमंद भी होती है। 

मेथी का साग

मेथी का साग बाजार में आना शुरू हो गया है। मेथी बरसात के मौसम से आना शुरू हो जाती है और पूरी सर्दी खूब बिकती है। ये ना केवल स्वाद में जबरदस्त होती है बल्कि इसमें कई ऐसे गुण होते हैं जो आपको कई बीमारियों से बचाने का काम भी करता है। इसके साथ ही इसे खाने से आपके शरीर में आयरन की कमी दूर हो जाएगी। 


भारत में बिकने वाले बड़े ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट: सीएसई अध्ययन का दावा

भारत में बिकने वाले बड़े ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट: सीएसई अध्ययन का दावा

नई दिल्ली (HEALTH NEWS)। भारत में बिकने वाले कई प्रमुख ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट पाई गई है, पर्यावरण नियामक सीएसई ने बुधवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है।

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के खाद्य शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले प्रसंस्कृत और कच्चे शहद की शुद्धता की जांच करने के लिए 13 छोटे बड़े ब्रांड का चयन किया

इसने पाया कि 77 प्रतिशत नमूनों में चीनी शरबत की मिलावट थी। जांच किए गए 22 नमूनों में से केवल पांच सभी परीक्षण में सफल हुये।

अध्ययन में कहा गया है कि डाबर, पतंजलि, बैद्यनाथ, झंडू, हितकारी और एपिस हिमालय जैसे प्रमुख ब्रांड के शहद के नमूने एनएमआर (न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस) परीक्षण में विफल रहे।

इस का जवाब देते हुए, इमामी (झंडू) के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘एक जिम्मेदार संगठन के रूप में इमामी सुनिश्चित करता है कि उसका झंडू शुद्ध शहद भारत सरकार और उसके प्राधिकरण एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित सभी नियम-शर्तों और गुणवत्ता मानदंडों / मानकों के अनुरूप हो और उनका पालन करे।’’ डाबर ने भी दावे का खंडन करते हुए कहा कि हालिया रिपोर्ट ‘दुर्भावना और हमारे ब्रांड की छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रेरित’ लगती है। उसने कहा है कि डाबर, शहद के परीक्षण के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा अनिवार्य सभी 22 मानदंडों का अनुपालन करती है।

डाबर ने कहा, ‘‘इसके अलावा, एफएसएसएआई द्वारा अनिवार्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं की उपस्थिति के लिए डाबर शहद का भी परीक्षण किया जाता है। डाबर भारत में एकमात्र कंपनी है, जिसके पास अपनी प्रयोगशाला में एनएमआर परीक्षण उपकरण है, और उसी का उपयोग नियमित रूप से शहद का परीक्षण करने के लिए किया जाता है और भारतीय बाजार में बेचा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डाबर शहद 100 फीसदी शुद्ध हो।

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए, पतंजलि आयुर्वेद के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम केवल प्राकृतिक शहद का निर्माण करते हैं, जिसे खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा अनुमोदित किया जाता है। हमारा उत्पाद एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है।’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने की साजिश है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह जर्मन तकनीक और महंगी मशीनरी को बेचने की साजिश है। यह देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने और प्रसंस्कृत शहद को बढ़ावा देने के लिए भी एक साजिश है। यह वैश्विक शहद बाजार में भारत के योगदान को भी कम करेगा।’’ बैद्यनाथ और अन्य कंपनियों से तुरंत संपर्क नहीं किया जा सका।

राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारी सदस्य देवव्रत शर्मा ने कहा, ‘‘न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में इस बात का भी पता मिल सकता है कि कोई खास शहद किस फूल से, कब और किस देश में निकाला गया है। इस परीक्षण में चूक होने की गुंजाइश नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय खाद्य नियामक, एफएसएसएआई को अपने शहद के मानकों में एनएमआर परीक्षण को अनिवार्य कर देना चाहिये ताकि हमारे देशवासियों को भी शुद्ध शहद खाने को मिले।’’ गुजरात में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) में सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फ़ूड (सीएएलएफ) में पहली बार सीएसई द्वारा इन ब्रांड के शहद के नमूनों का परीक्षण किया गया।

परीक्षणकर्ता, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार, लगभग सभी शीर्ष ब्रांड, शुद्धता के परीक्षणों में सफल हुए, जबकि कुछ छोटे ब्रांडों में सी-4 चीनी का पता लगने से वे परीक्षणों को विफल रहे। सी-4 ऐसी बुनियादी मिलावट का प्रारूप है जिसमें गन्ना चीनी का उपयोग किया जाता है।

परीक्षणकर्ता ने कहा, ‘‘लेकिन जब न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) का उपयोग करके उन्हीं ब्रांडों के नमूनों का परीक्षण किया गया – तो लगभग सभी छोटे बड़े ब्रांड परीक्षण में विफल पाये गये। न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में किसी भी प्रकार की मिलावट का पता लगाया जा सकता है। मिलावट की पक्की जांच के लिए विश्व स्तर पर एनएमआर परीक्षण का उपयोग किया जा रहा है। इस एनएमआर परीक्षण में 13 ब्रांडों के परीक्षणों में से केवल तीन सफल हो पाये। यह परीक्षण, जर्मनी में एक विशेष प्रयोगशाला द्वारा किया गया था।’’ सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि “हम शहद का सेवन कर रहे हैं – महामारी से लड़ने के लिए। लेकिन चीनी के साथ मिलावटी शहद हमें स्वस्थ नहीं बनाएगा। यह वास्तव में, हमें और भी कमजोर बना देगा। दूसरी ओर, हमें इस बात की भी चिंता करनी चाहिए कि मधुमक्खियों के नष्ट होने से हमारी खाद्य प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी क्योंकि पर-परागण के लिए मधुमक्खियाँ महत्वपूर्ण हैं। यदि शहद में मिलावट है, तो न केवल हमारा स्वास्थ प्रभावित होगा बल्कि हमारी कृषि उत्पादकता पर भी असर आयेगा।’’


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