इन 7 फलों को जरूर करें अपने आहार में शामिल

इन 7 फलों को जरूर करें अपने आहार में शामिल

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता हैं स्वस्थ और संतुलित आहार। शरीर को पोषक तत्वों की पूर्ती करने में फलों का बहुत महत्व होता हैं। गर्मियों के दिनों में फलों के सेवन के साथ ही जूस को भी शामिल किया जाता हैं। लेकिन सर्दियों के दिनों में आपको फलों के चुनाव के दौरान भी एहतियात बरतने और यह जानने कि जरूरत होती हैं कि कौनसा फल आपकी सेहत के लिए लाभदायी साबित होगा। आज इस कड़ी में हम आपको कुछ ऐसे ही फलों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका सेवन सर्दियों के दिनों में आपको अच्छी सेहत दिलाएगा।

सेब खाएं
सेब एक ऐसा फल है जो सर्दी और गर्मी हर मौसम में खाए जाने वाला है। इससे शरीर में हीमोग्लोबिन, आयरन और रक्त कमी नहीं होती। इस में पाए जाने वाले पेक्टिन फाइबर, विटामिन, मिनरल्स, फाइटोन्यूट्रिएंट्स, एंटी ऑक्सीडेंट शरीर में संक्रमण फैलाने से बचाव रखते हैं। रोजाना 1 सेब का सेवन करने से इस मौसम में भी बीमारियों से बचा जा सकता है।

अनार का जरूर करें सेवन
इसमें फाइटोकेमिकल्स, पॉली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, आयरन, विटामिन होते हैं, जिससे हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और फ्री रेडिकल्स जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है। अगर आप में खून की कमी है तो आप रोजाना अनार का खाना चाहिए।

कीवी खाएं
कीवी हमारे शरीर के लिए सबसे बढ़िया फल है। इसका सेवन डेंगू को दूर करने के लिए भी किया जाता है। इससे शरीर में सेल्स की कमी नहीं होती है। अगर आपको सर्दियों में जुकाम, खांसी की समस्या रहती है तो आप कीवी खाएं और फिर देखिए इस फल का कमाल।

अनानास
पाइनेपल हमारी बॉडी के साथ-साथ चेहरे के लिए बेहद फायदेमंद है। इसको खाने से चेहरे के दाग धब्बों, ब्लैकहेड्स और झाइयों को दूर करता है। इसमें मौजूद ऐंटिऑक्सिडेंट रोम छिद्रों को साफ करके चेहरे की रंगत को निखारता है।

केला
केला 12 महीने चलने वाला फल है। इससे शरीर को बहुत से फायदे होते हैं। सर्दियों में शरीर को फिट रखने के लिए केला खाएं जरूर खाएं। अगर आप केला नहीं खा सकते तो आप इसका शेक बना कर भी पी सकते हैं। इसमें मौजूद विटामिन बी 6 आपकी बॉडी को सर्दी नहीं लगने देता है।

शकरकंद खाएं
शकरगंद इस मौसम में शरीर के लिए बेस्ट है। अगर आपको लगता है कि आलू खाने से आपके शरीर में फैट आ रही है तो आप शकरगंद खा सकते हैं। इससे शरीर को बहुत सारे फायदे मिलते हैं। शरीर ठंड से बचा रहता है और गर्म रहता है। आप चाहे तो इसकी फ्रूट चाट बना कर भी खा सकते हैं।

संतरा
विटामिन्स से भरे इस फल का सेवन करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। इससे आप की सर्दी जुकाम जैसी हर बीमारी दूर होगी। आप चाहे तो इसका जूस बनाकर भी पी सकते हैं।


भारत में बिकने वाले बड़े ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट: सीएसई अध्ययन का दावा

भारत में बिकने वाले बड़े ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट: सीएसई अध्ययन का दावा

नई दिल्ली (HEALTH NEWS)। भारत में बिकने वाले कई प्रमुख ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट पाई गई है, पर्यावरण नियामक सीएसई ने बुधवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है।

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के खाद्य शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले प्रसंस्कृत और कच्चे शहद की शुद्धता की जांच करने के लिए 13 छोटे बड़े ब्रांड का चयन किया

इसने पाया कि 77 प्रतिशत नमूनों में चीनी शरबत की मिलावट थी। जांच किए गए 22 नमूनों में से केवल पांच सभी परीक्षण में सफल हुये।

अध्ययन में कहा गया है कि डाबर, पतंजलि, बैद्यनाथ, झंडू, हितकारी और एपिस हिमालय जैसे प्रमुख ब्रांड के शहद के नमूने एनएमआर (न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस) परीक्षण में विफल रहे।

इस का जवाब देते हुए, इमामी (झंडू) के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘एक जिम्मेदार संगठन के रूप में इमामी सुनिश्चित करता है कि उसका झंडू शुद्ध शहद भारत सरकार और उसके प्राधिकरण एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित सभी नियम-शर्तों और गुणवत्ता मानदंडों / मानकों के अनुरूप हो और उनका पालन करे।’’ डाबर ने भी दावे का खंडन करते हुए कहा कि हालिया रिपोर्ट ‘दुर्भावना और हमारे ब्रांड की छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रेरित’ लगती है। उसने कहा है कि डाबर, शहद के परीक्षण के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा अनिवार्य सभी 22 मानदंडों का अनुपालन करती है।

डाबर ने कहा, ‘‘इसके अलावा, एफएसएसएआई द्वारा अनिवार्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं की उपस्थिति के लिए डाबर शहद का भी परीक्षण किया जाता है। डाबर भारत में एकमात्र कंपनी है, जिसके पास अपनी प्रयोगशाला में एनएमआर परीक्षण उपकरण है, और उसी का उपयोग नियमित रूप से शहद का परीक्षण करने के लिए किया जाता है और भारतीय बाजार में बेचा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डाबर शहद 100 फीसदी शुद्ध हो।

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए, पतंजलि आयुर्वेद के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम केवल प्राकृतिक शहद का निर्माण करते हैं, जिसे खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा अनुमोदित किया जाता है। हमारा उत्पाद एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है।’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने की साजिश है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह जर्मन तकनीक और महंगी मशीनरी को बेचने की साजिश है। यह देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने और प्रसंस्कृत शहद को बढ़ावा देने के लिए भी एक साजिश है। यह वैश्विक शहद बाजार में भारत के योगदान को भी कम करेगा।’’ बैद्यनाथ और अन्य कंपनियों से तुरंत संपर्क नहीं किया जा सका।

राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारी सदस्य देवव्रत शर्मा ने कहा, ‘‘न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में इस बात का भी पता मिल सकता है कि कोई खास शहद किस फूल से, कब और किस देश में निकाला गया है। इस परीक्षण में चूक होने की गुंजाइश नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय खाद्य नियामक, एफएसएसएआई को अपने शहद के मानकों में एनएमआर परीक्षण को अनिवार्य कर देना चाहिये ताकि हमारे देशवासियों को भी शुद्ध शहद खाने को मिले।’’ गुजरात में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) में सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फ़ूड (सीएएलएफ) में पहली बार सीएसई द्वारा इन ब्रांड के शहद के नमूनों का परीक्षण किया गया।

परीक्षणकर्ता, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार, लगभग सभी शीर्ष ब्रांड, शुद्धता के परीक्षणों में सफल हुए, जबकि कुछ छोटे ब्रांडों में सी-4 चीनी का पता लगने से वे परीक्षणों को विफल रहे। सी-4 ऐसी बुनियादी मिलावट का प्रारूप है जिसमें गन्ना चीनी का उपयोग किया जाता है।

परीक्षणकर्ता ने कहा, ‘‘लेकिन जब न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) का उपयोग करके उन्हीं ब्रांडों के नमूनों का परीक्षण किया गया – तो लगभग सभी छोटे बड़े ब्रांड परीक्षण में विफल पाये गये। न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में किसी भी प्रकार की मिलावट का पता लगाया जा सकता है। मिलावट की पक्की जांच के लिए विश्व स्तर पर एनएमआर परीक्षण का उपयोग किया जा रहा है। इस एनएमआर परीक्षण में 13 ब्रांडों के परीक्षणों में से केवल तीन सफल हो पाये। यह परीक्षण, जर्मनी में एक विशेष प्रयोगशाला द्वारा किया गया था।’’ सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि “हम शहद का सेवन कर रहे हैं – महामारी से लड़ने के लिए। लेकिन चीनी के साथ मिलावटी शहद हमें स्वस्थ नहीं बनाएगा। यह वास्तव में, हमें और भी कमजोर बना देगा। दूसरी ओर, हमें इस बात की भी चिंता करनी चाहिए कि मधुमक्खियों के नष्ट होने से हमारी खाद्य प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी क्योंकि पर-परागण के लिए मधुमक्खियाँ महत्वपूर्ण हैं। यदि शहद में मिलावट है, तो न केवल हमारा स्वास्थ प्रभावित होगा बल्कि हमारी कृषि उत्पादकता पर भी असर आयेगा।’’


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