आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये घरेलू आसान तरीके

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये घरेलू आसान तरीके

आंखों की जरिए ही हम अपने आसपास की सभी चीजों को बड़ी आसानी से और साफ तौर पर देख सकते हैं। आंखों के स्वस्थ रहने पर ही हम अपने दिनचर्या के सभी कार्यों को बड़ी आसानी से पूरा कर लेते हैं। वहीं आंखों में जब थोड़ी सी भी खराबी आ जाती है तो हमें चश्मे का सहारा लेना पड़ता है जिसके बाद हमारी आंखों को अक्सर डॉक्टरी देखभाल की जरूरत पड़ती है। हालांकि कुछ खास आदतों के जरिए और कुछ घरेलू नुस्खे अपनाकर हम अपनी आंखों को स्वस्थ बनाए रख सकते हैं। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए नीचे कुछ खास फल और घरेलू तरीके बनाए जा रहे हैं जिसे आप नियमित रूप से इस्तेमाल करके आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं।

​गुलाब जल
गुलाब जल आंखों के लिए काफी कारगर माना जाता है। वैसे तो यह मूड को फ्रेश करने और त्वचा को निखार देने का भी काम करता है लेकिन कुछ वैज्ञानिक अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई है तो गुलाब जल का सेवन आंखों की रोशनी को बढ़ाने में मदद कर सकता है। आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए डॉक्टर की सलाह लेकर आप गुलाब जल की दो तीन बूंद को हफ्ते में दो से तीन बार आंखों में डाल सकते हैं। यहां आंखों के नीचे मौजूद डार्क सर्कल को साफ करने के लिए भी काफी मददगार साबित होगा।

​सरसों का तेल
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ के द्वारा कई लोगों पर ट्रायल करके यह देखा गया कि सरसों का तेल इस्तेमाल करने से आंखों की रोशनी को बढ़ाने में काफी मदद मिलती है। ट्रायल करने के दौरान लोगों के पैरों में करीब 10 मिनट तक रोजाना सरसों के तेल की मालिश की गई और उनके देखने की क्षमता में सकारात्मक रूप से सुधार भी देखने को मिला। इसलिए वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए पैरों के तलवे में सरसों के तेल से रोजाना 10 मिनट तक मालिश करें आपको सकारात्मक रूप से इसका फायदा देखने को मिलेगा।

​एक्सर्साइज करें
आंखों की देखने की क्षमता को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना भी बहुत जरूरी माना जाता है। इस पर डॉक्टरी अध्ययन भी किए गए हैं जिसमें इस बात की पुष्टि होती है कि नियमित रूप से व्यायाम करने वाले और हेल्दी वेट रखने वाले लोगों में आंखों की रोशनी काफी अच्छी होती है। वजन बढ़ने के कारण टाइप टू डायबिटीज से पीड़ित लोगों में भी आंखों की रोशनी कमजोर हो जाती है यही वजह है कि संतुलित वजन आंखों की रोशनी के लिए काफी हद तक जिम्मेदार होता है। इसलिए नियमित रूप से व्यायाम करें और अपनी आंखों को स्वस्थ रखें।

​बादाम
बादाम का सेवन करने से भी आंखों की रोशनी को बढ़ाने में काफी मदद मिलती है। यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार बादाम में विटामिन-ए की भरपूर मात्रा पाई जाती है। आप चाहें तो इसे दूध के साथ ही खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके जरिए आपको दूध और बादाम दोनों में मौजूद विटामिन-ए की मात्रा मिलेगी जो आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करती है। ज्यादातर लोगों के द्वारा आंखों को स्वस्थ रखने के लिए बादाम मिल्क का सेवन रात को सोने से पहले जरूर किया जाता है।

​आंवला का सेवन
आंवला एक ऐसा फल है जिसे आप अलग-अलग रूपों में खा सकते हैं। इसकी चटनी से लेकर इसके अचार और मुरब्बे के साथ- जूस के रूप में भी सेवन किया जाता है। दरअसल इसमें विटामिन-सी की मात्रा पाई जाती है जो एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। एंटी ऑक्सीडेंट रेटिना को स्वस्थ रखने का काम करती है। वहीं, रेटिना का स्वस्थ बने रहना हमारी आंखों की रोशनी को मेंटेन रखने में मददगार साबित होता है।

​इन फूड्स का भी करें सेवन
ऐसे कई खाद्य पदार्थ मौजूद हैं जिसका सेवन करने के कारण हमारे आंखों की रोशनी स्वस्थ बनी रहती है। इनमें प्रमुख रूप से गाजर, ब्रोकली, अखरोट, पालक और केल गिना जाता है। इसलिए इन फूड्स को अपनी डायट में शामिल करके आप अपनी आंखों की रोशनी को बढ़ा सकते हैं।


भारत में बिकने वाले बड़े ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट: सीएसई अध्ययन का दावा

भारत में बिकने वाले बड़े ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट: सीएसई अध्ययन का दावा

नई दिल्ली (HEALTH NEWS)। भारत में बिकने वाले कई प्रमुख ब्रांड के शहद में चीनी शरबत की मिलावट पाई गई है, पर्यावरण नियामक सीएसई ने बुधवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है।

सेंटर फ़ॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के खाद्य शोधकर्ताओं ने भारत में बिकने वाले प्रसंस्कृत और कच्चे शहद की शुद्धता की जांच करने के लिए 13 छोटे बड़े ब्रांड का चयन किया

इसने पाया कि 77 प्रतिशत नमूनों में चीनी शरबत की मिलावट थी। जांच किए गए 22 नमूनों में से केवल पांच सभी परीक्षण में सफल हुये।

अध्ययन में कहा गया है कि डाबर, पतंजलि, बैद्यनाथ, झंडू, हितकारी और एपिस हिमालय जैसे प्रमुख ब्रांड के शहद के नमूने एनएमआर (न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस) परीक्षण में विफल रहे।

इस का जवाब देते हुए, इमामी (झंडू) के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘एक जिम्मेदार संगठन के रूप में इमामी सुनिश्चित करता है कि उसका झंडू शुद्ध शहद भारत सरकार और उसके प्राधिकरण एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित सभी नियम-शर्तों और गुणवत्ता मानदंडों / मानकों के अनुरूप हो और उनका पालन करे।’’ डाबर ने भी दावे का खंडन करते हुए कहा कि हालिया रिपोर्ट ‘दुर्भावना और हमारे ब्रांड की छवि खराब करने के उद्देश्य से प्रेरित’ लगती है। उसने कहा है कि डाबर, शहद के परीक्षण के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा अनिवार्य सभी 22 मानदंडों का अनुपालन करती है।

डाबर ने कहा, ‘‘इसके अलावा, एफएसएसएआई द्वारा अनिवार्य रूप से एंटीबायोटिक दवाओं की उपस्थिति के लिए डाबर शहद का भी परीक्षण किया जाता है। डाबर भारत में एकमात्र कंपनी है, जिसके पास अपनी प्रयोगशाला में एनएमआर परीक्षण उपकरण है, और उसी का उपयोग नियमित रूप से शहद का परीक्षण करने के लिए किया जाता है और भारतीय बाजार में बेचा जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डाबर शहद 100 फीसदी शुद्ध हो।

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए, पतंजलि आयुर्वेद के प्रवक्ता एस के तिजारावाला ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हम केवल प्राकृतिक शहद का निर्माण करते हैं, जिसे खाद्य नियामक एफएसएसएआई द्वारा अनुमोदित किया जाता है। हमारा उत्पाद एफएसएसएआई द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता है।’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह रिपोर्ट देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने की साजिश है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह जर्मन तकनीक और महंगी मशीनरी को बेचने की साजिश है। यह देश के प्राकृतिक शहद उत्पादकों को बदनाम करने और प्रसंस्कृत शहद को बढ़ावा देने के लिए भी एक साजिश है। यह वैश्विक शहद बाजार में भारत के योगदान को भी कम करेगा।’’ बैद्यनाथ और अन्य कंपनियों से तुरंत संपर्क नहीं किया जा सका।

राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड के कार्यकारी सदस्य देवव्रत शर्मा ने कहा, ‘‘न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में इस बात का भी पता मिल सकता है कि कोई खास शहद किस फूल से, कब और किस देश में निकाला गया है। इस परीक्षण में चूक होने की गुंजाइश नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय खाद्य नियामक, एफएसएसएआई को अपने शहद के मानकों में एनएमआर परीक्षण को अनिवार्य कर देना चाहिये ताकि हमारे देशवासियों को भी शुद्ध शहद खाने को मिले।’’ गुजरात में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) में सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फ़ूड (सीएएलएफ) में पहली बार सीएसई द्वारा इन ब्रांड के शहद के नमूनों का परीक्षण किया गया।

परीक्षणकर्ता, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के अनुसार, लगभग सभी शीर्ष ब्रांड, शुद्धता के परीक्षणों में सफल हुए, जबकि कुछ छोटे ब्रांडों में सी-4 चीनी का पता लगने से वे परीक्षणों को विफल रहे। सी-4 ऐसी बुनियादी मिलावट का प्रारूप है जिसमें गन्ना चीनी का उपयोग किया जाता है।

परीक्षणकर्ता ने कहा, ‘‘लेकिन जब न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) का उपयोग करके उन्हीं ब्रांडों के नमूनों का परीक्षण किया गया – तो लगभग सभी छोटे बड़े ब्रांड परीक्षण में विफल पाये गये। न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण में किसी भी प्रकार की मिलावट का पता लगाया जा सकता है। मिलावट की पक्की जांच के लिए विश्व स्तर पर एनएमआर परीक्षण का उपयोग किया जा रहा है। इस एनएमआर परीक्षण में 13 ब्रांडों के परीक्षणों में से केवल तीन सफल हो पाये। यह परीक्षण, जर्मनी में एक विशेष प्रयोगशाला द्वारा किया गया था।’’ सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि “हम शहद का सेवन कर रहे हैं – महामारी से लड़ने के लिए। लेकिन चीनी के साथ मिलावटी शहद हमें स्वस्थ नहीं बनाएगा। यह वास्तव में, हमें और भी कमजोर बना देगा। दूसरी ओर, हमें इस बात की भी चिंता करनी चाहिए कि मधुमक्खियों के नष्ट होने से हमारी खाद्य प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी क्योंकि पर-परागण के लिए मधुमक्खियाँ महत्वपूर्ण हैं। यदि शहद में मिलावट है, तो न केवल हमारा स्वास्थ प्रभावित होगा बल्कि हमारी कृषि उत्पादकता पर भी असर आयेगा।’’


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