ब्लड प्रेशर की बीमारी को दूर करने के लिए करे ये...

ब्लड प्रेशर की बीमारी को दूर करने के लिए करे ये...

हमारे मन में कई तरह की आशंकाएं कई कारणों से जन्म लेती हैं व हम चिंता से घिर जाते हैं. एंग्जाइटी यानी चिंता ज़िंदगी का भाग ही है. 

इसे कभी भी महसूस किया जा सकता है. ट्रैफिक में फंस जाते हैं, कार्य के दौरान परेशान होते हैं या परिवार व पैसों की कमी की वजह से चिंता करते हैं. इसकी व भी कई वजहें हो सकती हैं. कोई शक नहीं कि असहज महसूस करने से ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) अस्थायी रूप से बढ़ जाता है, लेकिन लगातार ऐसी स्थिति बहुत हानिकारक हो सकती है.


www.myupchar.com से जुड़े एम्स के डाक्टर नबी वली के अनुसार, ‘लगातार हाई ब्लड प्रेशर शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है व इसके कारण हार्ट अटैक भी आ सकता है. विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, मानसिक तनाव का ब्लड प्रेशर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है.’
मैसेचुसेट्स के कार्डिएक साइकाइट्री रिसर्च कार्यक्रम के शोधकर्ताओं के मुताबिक, आदमी का दिमाग व विचार निश्चित रूप से दिल से जुड़े होते हैं. जब कोई बात किसी आदमी को परेशान करती है, तो सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (एसएनएस) तनाव के प्रति प्रतिक्रियाएं देता है जिसे फाइट-ऑर-फ्लाइट रिस्पॉन्स कहते हैं. इस रिएक्शन से हार्ट की  धड़कनो की दर व ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.


अगर संतुलन में हो तो यह लाभकारी भी होने कि सम्भावना है. थोड़ी-बहुत चिंता एक प्रेरक का कार्य कर सकती है. यह व्यायाम की नयी दिनचर्या बनाने या स्वस्थ भोजन के विकल्प को चुनने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम से संतुलित किया जाना चाहिए. यह सिस्टम बेचैनी कम करने में मदद करता है. पैरासिम्पैथेटिक तथा सिम्पैथेटिक सिस्टम्स में संतुलन दिल के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है.
चिंता में घिरे कुछ लोगों के साथ यह संतुलन नहीं होता है व समय के साथ यह दिल के लिए जोखिम भरा होने कि सम्भावना है. जब लोग ज्यादा चिंता करते हैं तो वे प्रतिरक्षा प्रणाली यानी रोगों से लड़ने की क्षमता, रक्त वाहिकाओं व प्लेटलेट्स में परिवर्तन का अनुभव कर सकते हैं जो कि हार्ट रोग का कारण बन सकता है. बता दें कि हायपरटेंशन एक ऐसी स्थिति है जिसमें ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ता है.