बच्चे के लिए क्यों जरूरी है ब्रेस्टफीडिंग और कैसे यह मां के लिए भी है फायदेमंद

बच्चे के लिए क्यों जरूरी है ब्रेस्टफीडिंग और कैसे यह मां के लिए भी है फायदेमंद

यूनिसेफ और डब्लूएचओ जैसी ऑर्गनाइजेशंस ने भी पहले आधे घंटे में ब्रेस्टफीडिंग को अहम माना है। कोलोस्ट्रम पहला गाढ़ा पीला दूध है, जो विटामिन, एंटीबॉडीज और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होता है, को जन्म के बाद तुरंत ब्रेस्टफीडिंग के जरिए दिया जाना अहम गाइडलाइन में शामिल है। इसके पीछे छिपे कई फायदे बच्चे के डेवलपमेंट की नींव साबित होते हैं।

होते हैं कई अहम फायदे

इन्फेक्शन के दौर में इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। दरअसल, बाहरी माहौल में आते ही इन्फेक्शन से बचाव बहुत जरूरी है, क्योंकि नवजात शिशु में इम्यून सिस्टम पूरी तरह डेवलप नहीं होता, यहां एंटीबॉडीज उसकी रक्षा करती हैं। मां के शरीर से बाहर आते ही उसके टेम्प्रेचर में बदलाव होता है। शरीर के टेम्प्रेचर को स्टेबल रखकर गर्माहट देना भी इसका एक अहम फायदा है, जो ब्रेस्टफीडिंग से मिलता है। यह दूध आसानी से पच जाता है, जिससे बच्चे का डाइजेस्टिव सिस्टम मजबूत होता है। ब्रेस्टफीडिंग से हड्डियां मजबूत होती हैं, बच्चे की फिजिकल और मेंटल ग्रोथ अच्छी रहती है। यह बच्चों को एलर्जी से भी बचाता है।


पहले से कर लें तैयारी

यह मेटाबॉलिज्म रेगुलेशन ठीक रखता है, जो सेहत के लिहाज से एक अहम पहलू है। यह कई तरह के रोगों जैसे न्यूमोनिया, डायरिया, डायबिटीज वगैरह से बचाव करता है। ब्रेस्टफीडिंग से मां और बच्चे के बीच एक इमोशनल बॉन्ड बनता है, जो बहुत अहम चीज है। प्रॉपर लेक्टेशन के लिए प्रोलैक्टिन नाम का हार्मोन जिम्मेदार होता है। हर चीज़ की तैयारी पहले से ही करना ठीक रहता है। प्रेग्नेंसी की शुरुआत होते ही कई बदलावों के तहत मां और बच्चे, दोनों की जरूरतों में इजाफा हो जाता है, खासकर डाइट में। प्रेग्नेंसी के दौरान मां को न्यूट्रिशन वाली बैलेंस्ड डाइट और दूध का सेवन करने को कहा जाता है। आजकल डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि जन्म के 6 महीनों तक सिर्फ दूध के अलावा कोई लिक्विड डाइट ना दें। जन्म के 45 मिनट बाद बच्चे को तेज भूख लगती है, इसलिए उसे तुरंत ब्रेस्टफीडिंग कराना जरूरी है।

 
पता होना चाहिए सही तरीका

पहली बार मां बनने जा रही मां को ब्रेस्टफीडिंग का सही तरीका, पोजीशन, वक्त और प्रोसेस ठीक से समझा देना बहुत जरूरी है, क्योंकि गलत तरीके से ना तो बच्चा प्रॉपर डाइट ले पाएगा और ना मां को सैटिस्फैक्शन मिलेगा। पोजीशन की बहुत अहमियत है जिससे बच्चे को सांस लेने में रुकावट ना हो। कुछ वक्त बाद बच्चा सकिंग रिफ्लेक्स के जरिए खुद ब्रेस्टफीडिंग करने लगता है। साफ-सफाई न होने पर होने वाले इन्फेक्शन से बचाव के लिए ब्रेस्टफीडिंग के दौरान सफाई पर खास ध्यान देना जरूरी है। हाल ही में मां बनी महिला को मेंटल सपोर्ट देना जरूरी है, क्योंकि ऐसा होने पर उसे ब्रेस्टफीडिंग कराने में आसानी रहती है।


अनियमित पीरियड्स से मुक्ति दिलाने में कारगर है ये घरेलू उपाय

अनियमित पीरियड्स से मुक्ति दिलाने में कारगर है ये घरेलू उपाय

महिलाओं को पुरुषों से ज्यादा मजबूत माना जाता है। महिलाएं हर तरह से पुरुषो से अलग होती हैं और उनमें
काफी मजबूती होती है। लेकिन कुछ परेशानियां ऐसी होती हैं जिन्हें सिर्फ महिलाएं ही समझ सकती हैं।  तनाव,टेंशन,स्ट्रेस यह ऐसा दीमक है जो धीरे-धीरे शरीर को खा जाता है। महिलाएं चाहकर भी खुद को इससे दूर नहीं कर पाती हैं, जिसके कारण उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्ट्रेस का सबसे ज्यादा असर महिलाओं के पीरियड्स पर पड़ता है। वर्तमान में 90 प्रतिशत महिलाएँ अनियमित पीरियड्स से परेशान हैं। इससे निजात पाने के लिए आपको कुछ घरेलू उपाय अपनाने होंगे जो हम बताने जा रहे हैं....

सौंठ या सूखा अदरक : ये चीज़ें भी पीरियड्स को नियमित करने में सहायक मानी जाती है। यह पीरियड्स के फ्लो को सही करने और दर्द को कम करने में लाभदायक होता है। इसे आप जूस के रूप में या फिर कच्चा भी खा सकते हैं। यह दोनों तरीके से आपके पीरियड्स को समय पर लाने में मददगार साबित होगा। अदरक को आप नियमित रूप से चाय में डालकर पीने की आदत डालें तो यह पीरियड्स के लिए सर्वश्रेष्ठ होगा।

चकूंदर : अनियमित पीरियड्स को सुधारने या उससे छुटकारा पाने में चकूंदर आपकी सहायता कर सकता है। चकूंदर में कई जरूरी पोषक तत्व और आयरन, फॉलिक एसिड आदि पाए जाते हैं जो अनियमित मासिक धर्म को नियमित करने में कारगर साबित होते हैं। यह हार्मोन्स के संतुलन को सही करने में मदद करते हैं।  

कच्चा पपीता : पीरियड्स की अनियमितता को दूर करने का रामबाण इलाज है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व आयरन, कौरोटीन, कौल्शियम, विटामिन ए और सी गर्भाश्य की सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को फाइबर पहुँचाने का काम करते हैं। कच्चे पपीते को आप पीरियड्स आने से कुछ दिन पहले खाना शुरू कर दे्ं।