राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बना कर भाजपा ने खेला राजनीतिक दांव

राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बना कर भाजपा ने खेला राजनीतिक दांव
राष्ट्रपति चुनाव में द्रौपदी मुर्मू को उम्मीदवार बना कर बीजेपी ने जो बड़ा सियासी दांव खेला था,उसका असर अब साफ-साफ नजर आ रहा है. नीतीश कुमार समेत एनडीए के सभी सहयोगी दल बीजेपी उम्मीदवार के साथ पूरी ताकत के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.

वहीं एनडीए के खेमे से बाहर के दो जरूरी सियासी दल ( जो अपने-अपने राज्य में गवर्नमेंट चला रहे हैं) – बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने एनडीए उम्मीदवार के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर कर उनकी जीत की राह को शुक्रवार को ही आसान कर दिया है. लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि बीजेपी के इस दांव ने अब विपक्षी खेमें में भी सेंध लगा दी है. शनिवार को बसपा की मुखिया मायावती ने भी अपनी पार्टी के मूवमेंट का हवाला देते हुए और आदिवासी समाज की कर्मठ स्त्री को राष्ट्र की राष्ट्रपति बनाने की बात कहते हुए द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने की घोषणा कर दी.

भाजपा के इस दांव ने कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन में भी हड़कंप मचा दी है. झारखंड में कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर गवर्नमेंट चला रही झारखंड मुक्ति मोर्चा भी एनडीए उम्मीदवार को समर्थन देने के नाम पर दबाव में है. झारखंड मुक्ति मोर्चा यह निर्णय ही नहीं कर पा रहा है कि पहले की गई घोषणा के अनुसार विरोधी दलों के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन किया जाए या पार्टी की विचारधारा और पहचान के मद्देनजर एक आदिवासी स्त्री (द्रौपदी मुर्मू) का समर्थन किया जाए.

यूपीए गठबंधन में शामिल झामुमो पर दबाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शनिवार को इस संबंध में निर्णय करने के लिए पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन की अध्यक्षता और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी में हुई पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की बैठक में इसे लेकर कोई आखिरी निर्णय नहीं किया जा सका.

बताया जा रहा है कि इस बैठक में राष्ट्रपति चुनाव में फैसला लेने के लिए शिबू सोरेन को अधिकृत कर दिया गया है और इसके साथ ही यह भी बोला गया है कि दिल्ली जाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे और इसके बाद ही पार्टी यह निर्णय करेगी कि राष्ट्रपति चुनाव में किसे समर्थन दिया जाए.

एक आदिवासी महिला, पहली बार राष्ट्र की राष्ट्रपति बनने जा रही है बीजेपी के इस दांव ने कई विरोधी दलों को दबाव में ला दिया है. देशभर के अन्य राज्यों से जुड़े विरोधी दलों के आदिवासी विधायक और सांसद भी बीजेपी के इस दांव से मनोवैज्ञानिक तौर पर दबाव में आ गए हैं. ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने तो प्रदेश के सभी विधायकों (कांग्रेस समेत) से खुलकर ओडिशा की बेटी को राष्ट्रपति बनाने के लिए वोट देने की अपील भी कर दी है. राष्ट्र के पूर्व पीएम और जेडीएस नेता एच डी देवेगौड़ा द्वारा एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की प्रशंसा करने भी बीजेपी का पक्ष और अधिक मजबूत हो गया है.

शुक्रवार को नामांकन के दौरान बीजेपी द्वारा किए गए शक्ति प्रदर्शन से यह तो साबित हो गया है कि द्रौपदी मुर्मू सरलता से राष्ट्रपति चुनाव जीतने जा रही है यूपी की सीएम रह चुकी मायावती के समर्थन ने एनडीए उम्मीदवार के तौर पर द्रौपदी मुर्मू के जीत के अंतर को और अधिक बढ़ा दिया है. राष्ट्र के सियासी माहौल, आनें वाले चुनावों और विपक्षी सियासी दलों की सधी प्रतिक्रिया से यह साफ-साफ नजर आ रहा है कि आने वाले दिनों में कई विपक्षी दल अपनी-अपनी सियासी मजबूरियों के कारण एनडीए उममीदवार को समर्थन देने का घोषणा कर सकते हैं. ऐसे में जाहिर तौर पर यह बोला जा सकता है कि एक आदिवासी स्त्री को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बना कर बीजेपी ने जो बड़ा सियासी दांव खेला था, वो पूरी तरह से सफल होता नजर आ रहा है.