कोरोना वायरस से बचाव करना है तो वैक्सीन की दो डोज लेना ही नहीं है पर्याप्त

कोरोना वायरस से बचाव करना है तो वैक्सीन की दो डोज लेना ही नहीं है पर्याप्त
प्राकृतिक इम्युनिटी औसतन 21.5 महीनों तक सुरक्षा प्रदान करती है
कोरोना वायरस से बचाव करना है तो वैक्सीन की दो डोज लेना ही पर्याप्त नहीं है

वॉशिंगटन कोरोना वैक्सीन से मिला प्रोटेक्शन अधिक समय तक शरीर को इस घातक वायरस के विरूद्ध सुरक्षा नहीं दे पाता समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एक नयी स्टडी में दावा किया गया है कि वैक्सीन इस वायरस के प्रति शरीर में अपने आप बनी इम्युनिटी से बेहतर सुरक्षा प्रदान करती है हालांकि ये वायरस समय के साथ स्वयं को बदल रहा है ऐसे में शरीर में इसके विरूद्ध बनी इम्युनिटी भी अधिक समय तक काम नहीं कर पाती मतलब ये कि यदि इस वायरस की चपेट में फिर आने से बचना है तो वैक्सीन की बूस्टर डोज लेनी ही पड़ेगी इस स्टडी में ये भी पता लगाया गया कि कौन सी वैक्सीन कितने समय तक शरीर को कोविड-19 वायरस से बचा पाती है

‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ (पीएनएएस) की ये स्टडी 15 जून को प्रकाशित हुई है इसमें बताया गया है कि कोविड-19 वायरस के इन्फेक्शन से बचाने के लिए एंटीबॉडी की तुलना में वैक्सीन से अच्छी प्रतिरक्षा मिलती है, इसलिए बूस्टर वैक्सीन लेना आवश्यक है इस शोध में इस बात की पड़ताल की गई कि SARS-CoV-2 के विरूद्ध टीकों से मिली इम्युनिटी कब तक काम करती है और शरीर के अंदर एंटीबॉडी से अपने आप बनी प्रतिरोधक क्षमता कब घटने लगती है कोविड-19 से निपटने की कारगर रणनीति बनाने के लिए इस बात की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है

जेफरी पी टाउनसेंड और उनके सहयोगियों ने तुलनात्मक विकासवादी विश्लेषण का उपयोग करके समय बीतने के साथ प्रतिरक्षा कम होने और संक्रमण की चपेट में आने की आसार का अनुमान लगाया इसके लिए उन्होंने कोविड-19 संक्रमण के डाटा, फिर से कोविड-19 की चपेट में आने के आंकड़ों, प्राकृतिक प्रतिरक्षा बनने के बाद एंटीबॉडी के घटते स्तर और वैक्सीन के प्रभावों का शोध किया विश्लेषण के दौरान 4 सामान्य कोविड-19 वैक्सीन के वायरस के स्पाइक प्रोटीन IgG के हमले से निपटने की एंटीबॉडी की क्षमता पर भी गौर किया गया

एएनआई के मुताबिक, शोध से पता चला कि एक बार कोविड-19 की चपेट में आने के बाद शरीर में बनी प्राकृतिक इम्युनिटी औसतन 21.5 महीनों तक सुरक्षा प्रदान करती है वहीं, फाइजर बायोएनटेक और मॉडर्ना की एमआरएनए वैक्सीन ने प्राकृतिक संक्रमण की तुलना में एंटीबॉडी का स्तर बढ़ाने में सहायता की, जिसने करीब 29.6 महीनों तक कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा प्रदान की

शोध के दौरान देखा गया कि ऑक्सफ़ोर्ड एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा बनाई गई वायरल वेक्टर वैक्सीन से प्राकृतिक प्रतिरक्षा जितनी ही एंटीबॉडी तैयार हुईं इन्होंने क्रमशः 22.4 महीने और 20.5 महीने तक संक्रमण से बचाव किया इस अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर वैज्ञानिकों का बोलना है कि कोविड-19 वायरस से बचाव करना है तो वैक्सीन की दो डोज लेना ही पर्याप्त नहीं है निर्धारित समय के बाद इसकी बूस्टर डोज लेना महत्वपूर्ण है

बता दें कि हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने 18 से 59 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए कोविड-19 का बूस्टर डोज निःशुल्क में लगवाने का अभियान प्रारम्भ किया है इसके अनुसार 75 दिनों तक बिना पैसे दिए सरकारी केंद्रों पर ये बूस्टर डोज लगवाई जा सकती है इससे पहले 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को ही फ्री में बूस्टर डोज लगाई जा रही थी