उद्धव ठाकरे ने हथियार डाला छोड़ा मुख्यमंत्री आवास

उद्धव ठाकरे ने हथियार डाला छोड़ा मुख्यमंत्री आवास

महाराष्ट्र के हालिया घटनाक्रम देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उद्धव ठाकरे ने हथियार डाल दिए हैं क्योंकि उन्होंने सीएम आवास छोड़ दिया है और अपने परिवार के साथ ‘मातोश्री’ आ गए. महाविकास अघाड़ी गवर्नमेंट पर संकट के बादल छाए हुए हैं और वह घटने का नाम नहीं ले रहे हैं.

महाराष्ट्र में सियासी उठापटक जारी है. सीएम उद्धव ठाकरे अब तक की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा का सामना कर रहे हैं. गवर्नमेंट बचाने के साथ-साथ उद्धव ठाकरे ‘शिवसेना’ बचाने की कवायद में भी जुटे हुए हैं. क्योंकि एकनाथ शिंदे ने 37 विधायकों के समर्थन वाली चिट्ठी गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी को भेजी थी और अब वो गवर्नर से संपर्क साध रहे हैं. यदि एकनाथ शिंदे के पास शिवसेना के दो तिहाई से अधिक विधायक हैं तो दल बदल कानून भी लागू नहीं होगा. ऐसे में शिवसेना विधायक बागी रुख छोड़कर वापस ‘मातोश्री’ के कैंप में नहीं लौटे तो गवर्नमेंट तो गिरेगी ही… साथ ही साथ उद्धव ठाकरे की प्रतिष्ठा पर भी गहरा घात लगेगा. 

 

हालिया घटनाक्रम देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उद्धव ठाकरे ने हथियार डाल दिए हैं क्योंकि उन्होंने सीएम आवास छोड़ दिया है और अपने परिवार के साथ ‘मातोश्री’ आ गए. महाविकास अघाड़ी गवर्नमेंट पर संकट के बादल छाए हुए हैं और वह घटने का नाम नहीं ले रहे हैं. क्योंकि गुवाहाटी स्थित रेडिसन ब्लू में 4 और गाड़ियां पहुंची हैं. जिनमें 8 लोगों के होने की आसार है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 4 गाड़ियों में शिवसेना के 4 और विधायक पहुंचे है. जिनमें दीपर केसरकर शामिल हैं. उन्होंने हाल ही में बीजेपी के साथ गवर्नमेंट बनाने पर जोर दिया था.

छावनी में परिवर्तित हुआ रेडिसन ब्लू

गुवाहाटी का छावनी में परिवर्तित हो चुका है. इस होटल में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगी हुई है और गुवाहाटी पुलिस ने मोर्चा संभाला हुआ है. आपको बता दें कि महाविकास अघाड़ी गवर्नमेंट को इस बात की एकदम भी भनक नहीं थी कि एकनाथ शिंदे समेत कई विधायक उनका साथ छोड़कर दूसरे राज्यों में डेरा जमा लेंगे. जबकि 7 दिन पहले ही रेडिसन ब्लू होटल के कमरे किराए पर लिए जा चुके थे. सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई थी.

उद्धव के साथ केवल 13 विधायक

एकनाथ शिंदे कैंप का दावा है कि शिवसेना पूरी तरह से बिखर चुकी है और उद्धव ठाकरे के पास महज 13 विधायक ही बचे हुए हैं. जिसका मतलब साफ है कि 55 में से 42 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ हैं. इतना ही नहीं विधायकों के साथ-साथ अब सांसदों ने भी उद्धव ठाकरे को आंख दिखाना प्रारम्भ कर दिया है. 

 

दबाव में लोग छोड़कर चले गए

शिवसेना सांसद संजय राउत ने बोला कि मैं किसी भी कैंप पर बात नहीं करूंगा केवल और केवल अपनी पार्टी की बात करूंगा. हमारी पार्टी मजबूत है और जमीन पर है. हजारों, लाखों कार्यकर्ता आज भी पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं. कुछ विधायक हमें छोड़कर गए हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि पार्टी टूट गई है. इस दबाव में यह लोग हमें छोड़कर चले गए हैं, उसका खुलासा जल्द ही हो जाएगा. उद्धव ठाकरे ने कल आह्नान किया है कि यहां आकर बात करो.

इसी बीच संजय राउत ने दावा कि 20 विधायक हमारे संपर्क में हैं और फ्लोर टेस्ट में सच सामने आ जाएगा. आपको बता दें कि शिवसेना के साथ-साथ एनसीपी और कांग्रेस पार्टी में भी बैठकों का दौर जारी है.


अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले LG मनोज सिन्हा ने बुलाई बैठक

अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले LG मनोज सिन्हा ने बुलाई बैठक
  • मौजूदा हालात पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी बैठक
  • ‘बैठक के लिए एक एजेंडा निर्धारित किया जाना चाहिए था’
  • फारूक अब्दुल्ला, रविंदर रैना, जी ए मीर हुए बैठक में शामिल

 जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की ओर से आज बुधवार को राजभवन में आयोजित चाय पार्टी में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती शामिल नहीं हुईं. ऑफिसरों के मुताबिक, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार से प्रारम्भ हो रही अमरनाथ यात्रा सहित केंद्र शासित प्रदेश के वर्तमान परिस्थिति पर चर्चा करने के लिए विभिन्न सियासी दलों के प्रमुखों को एक बैठक के लिए आमंत्रित किया था. 

नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, भाजपा की जम्मू और कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रविंदर रैना और कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जी ए मीर इस बैठक में शामिल हुए. पीडीपी के एक प्रवक्ता ने बोला कि यह अजीब है कि उपराज्यपाल का कार्यालय बहुत संवेदनशील समय में नेताओं को ‘हाई टी’ बैठक के लिए आमंत्रित कर रहा था. 

‘प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सभी दलों की हुई बैठक के नतीजे क्या निकले”

पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी ने कहा, “अगर कुछ चर्चा करने के लिए था, तो बैठक के लिए एक एजेंडा निर्धारित किया जाना चाहिए था.” सुहैल बुखारी ने इस बैठक के समय पर प्रश्न खड़े करते हुए ट्वीट किया, ”शाम को गंभीर विषयों को लेकर होने वाली एक बैठक के लिए सुबह में निमंत्रण भेजा जाता है. क्या मजाक है! वैसे पीएम की अध्यक्षता में सभी दलों की हुई बैठक के नतीजे क्या निकले, जिसमें जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्री भी उपस्थित थे?” 

 ‘पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की कब्र पर जाने की अनुमति नहीं दी गई’

उन्होंने यह भी बोला कि यह विडंबना है कि प्रशासन ने महबूबा मुफ्ती को अनंतनाग जिले में उनके पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की कब्र पर जाने की अनुमति नहीं दी और वही प्रशासन उन्हें बैठक के लिए आमंत्रित कर रहा था. फारूक अब्दुल्ला ने यहां एक कार्यक्रम से इतर मीडिया से वार्ता में बोला कि उन्हें निमंत्रण मिला है, लेकिन उन्हें इसके एजेंडे के बारे में नहीं बताया गया है. 

उन्होंने कहा, ”मैं आज ही दिल्ली से वापस आया हूं. मुझे बैठक में आमंत्रण का कार्ड मिल गया है, लेकिन एजेंडा का जिक्र नहीं है. मैं वहां जाऊंगा और पता लगाऊंगा कि यह क्या है.कांग्रेस पार्टी ने भी बोला कि इस बैठक के लिए कोई एजेंडा तय नहीं किया गया था.