अभिनेता दिलीप की हुई गिरफ्तारी, छापेमारी में मिला ये

अभिनेता दिलीप की हुई गिरफ्तारी, छापेमारी में मिला ये

Actress assault case: जानेमाने साउथ एक्टर दिलीप पर यौन उत्पीड़न के संगीन आरोप लगे हुए हैं। कल केरल पुलिस द्वारा उनके आवास और ऑफिसों पर छापेमारी की गई थी। फिलहाल के लिए एक्टर दिलीप को केरल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आपको बता दें कि केरल हाईकोर्ट ने एक्टर की मंगलवार यानी 18 जनवरी तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इन सब के बीच एक्टर दिलीप पर अभिनेत्री यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को कथित रूप से धमकाने का भी आरोप है।

13 जनवरी को हुई थी छापेमारी:
केरल पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 13 जनवरी को एक्टर दिलीप और उनके भाई के घर, प्रोडक्शन हाउस और ग्रैंड प्रोडक्शन कंपनी के ऑफिस पर छापेमारी की थी।

जांच अधिकारियों को धमकाने का भी आरोप:
एक एक्ट्रेस के यौन उत्पीड़न मामले में जांच अधिकारियों को कथित रूप से धमकाने के मामले में उनके खिलाफ एक नए मामले में पुलिस ने यह कार्रवाई की है। जिसके बाद दिलीप पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। लेकिन अब हाईकोर्ट से दिलीप को थोड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने एक्टर की मंगलवार तक गिरफ्तारी रोक दी है।

अभिनेत्री ने सीएम से लगाई मदद की गुहार:
पीड़ित अभिनेत्री ने केरल के सीएम पिनाराई विजयन को पत्र लिखा, जिसमें एक्ट्रेस ने न्याय की मांग की है। इस पत्र में एक्ट्रेस ने अपने दुख को व्यक्त करते हुए सीएम से मदद की गुहार लगाई है और लिखा कि इन आरोपों की जांच की जरूरत है। मैं न्याय चाहती हूं।


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

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नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।