देश में मिले इतने लाख से ज्यादा नए मामले, जाने क्या बोलते है आंकड़े

देश में मिले इतने  लाख से ज्यादा नए मामले, जाने क्या बोलते है आंकड़े

भारत में कोरोना मामलों की रफ्तार में कोई कमी आती दिखाई नहीं दे रही है। भारत में पिछले 24 घंटों में 2,64,202 नए मामले सामने आए हैं जो कल के मुकाबले 7 फीसदी ज्यादा है। ये मामले बुधवार को आए कुल संख्या से 17 हजार अधिक हैं। देश में अब सक्रिय मामलों की संख्या 12.72 लाख से अधिक हो गई है। एक दिन में कोरोना से 315 मौतें हुई हैं।

वहीं, ओमीक्रॉन से संक्रमित होने वालों की संख्या 5700 को पार गई है। देश में संक्रमण दर 14.78 फीसदी हो गया है। वहीं, गिरिराज सिंह समेत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोरोना की चपेट में या चुके हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना वायरस के 2,64,202 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 1,09,345 रिकवरी हुईं। सक्रिय मामलों की संख्या 12,72,073 है। वहीं, देशभर में ओमिक्रोन के कुल मामले 5,753 हो गए हैं। पॉजिटिविटी रेट 14.78% हो गई है। ओमीक्रॉन अब देश के 28 राज्यों तक पहुँच गया है।

एक नजर अन्य आंकड़ों पर

-24 घंटों में 1,09,345 मरीज हुए ठीक जिससे कुल ठीक हुए लोगों की संख्या 3,48,24,706 हो गई है।
-देश भर में कुल 17,87,457 कोरोना टेस्ट किए गए, अब कुल टेस्ट 69.90 करोड़ हो गए हैं।
-वीकली पॉजिटिविटी रेट 11.83 फीसदी
-दैनिक पॉजिटिविटी रेट 14.78 फीसदी
-24 घंटों में 73 लाख से अधिक वैक्सीन के डोज लगे
-कुल वैक्सीनेशन कवरेज 155.39 करोड़ हो गई है।

बता दें कि दिल्ली में एक दिन में 28,395 नए मामले सामने आए हैं और 31 मरीजों की मौत हो गई है। ये आँकड़े दिल्ली सरकार की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं। हालांकि, महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। यहाँ 46406 नए केस मामले सामने आए हैं और 36 की मौत हो गई है।


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।