Bhojpuri में पढ़ें- लखनऊ से पहिले इलाहाबाद में चलल विधानसभा

Bhojpuri में पढ़ें- लखनऊ से पहिले इलाहाबाद में चलल विधानसभा

पांचि गो प्रदेशन में जब चुनावी लड़ाई के बिगुल फूंका गईल बा, तब हमनी के इतिहास में झांकि के कुछ खोजल जाउ त बड़ा आनन्द आई. एहि प्रदेशन में भोजपुरिया माटी वाला बड़का राज्य उत्तर प्रदेश भी बा. जब बतावल जाइ कि बहुत पहिले एकर नाम उत्तर प्रदेश ना रहे, त इ बात कुछ अलगा बटले बा. इहो जानल केतना मजेदार बा कि लखनऊ में जवन इ एतना बड़का विधानसभा बनल बा, पहिले एकर

बइठकी लखनऊ के बहरा तब के इलाहाबाद अऊर आज के प्रयागराज में भी भईल रहे. अउर त अउर, विधनसभा के बहरा जवन गोविंद बल्लभ पंत जी के एतना बड़का मूर्ति लागल बा, उनका पहिले भी एगो मुख्यमंत्री रहले.


क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

क्या बिना मर्जी लगाया जा सकता है कोरोना का टीका? सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

नई दिल्ली: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी कोविड-19 टीकाकरण दिशानिर्देशों में किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका जबरन टीकाकरण कराने की बात नहीं की गई है। दिव्यांगजनों को टीकाकरण प्रमाणपत्र दिखाने से छूट देने के मामले पर केंद्र ने न्यायालय से कहा कि उसने ऐसी कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी नहीं की है, जो किसी मकसद के लिए टीकाकरण प्रमाणपत्र साथ रखने को अनिवार्य बनाती हो।

केंद्र ने गैर सरकारी संगठन एवारा फाउंडेशन की एक याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में यह बात कही। याचिका में घर-घर जाकर प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों का टीकाकरण किए जाने का अनुरोध किया गया है। हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किए बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते। केंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता।