कोरोना वायरस की चुनौतियां प्रदेश के अनेक जिलों के प्रशासन के लिए पनपने लगी, पढ़े

कोरोना वायरस की चुनौतियां प्रदेश के अनेक जिलों के प्रशासन के लिए पनपने लगी, पढ़े

उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में प्रशासन के सामने कोरोना वायरस से निपटने की चुनौती हर आने वाले पल के साथ गहरा रही है. जिस तरह से देश के भिन्न-भिन्न हिस्सों से दिहाड़ी मेहनतकश अपने गांव को लौटने के लिए विवश हो निकल पड़े हैं,

उससे नयी किस्म की चुनौतियां प्रदेश के अनेक जिलों के प्रशासन के लिए पनपने लगी हैं.

सार
अगले 2-3 दिनों में 3-4 हजार लोग जिले के बाहर से अपने घर लौट सकते हैं, ऐसे एक जिले का उदाहरण
जांच किट का अभाव, टेस्टिंग लखनऊ के आसरे
आइसोलेशन व क्वारंटीन सेंटरों को कर रहे तैयार
गांव-कस्बें के घरों में 2500 क्वारंटीन, ग्रामीण भी सतर्क
जिले की सीमाओं पर थर्मल चेकअप
डॉक्टर, पैरा-मैडिकल स्टाफ के लिए पर्याप्त सुरक्षा का अभाव
निर्धनों, मजदूरों को सीधे भुगतान की मशक्कत जारी
सब जुटे हैं सूचियां बनाने में
कितना तैयार है जिला प्रशासन इसके लिए, यह समझने के लिए अमर उजाला ने नेपाल की सीमा से लगे प्रदेश के एतिहासिक महत्व के जिले के एक वरिष्ठ ऑफिसर से प्रशासनिक व्यवस्थाओं को जानने की प्रयास की. जितनी गंभीर चुनौती बन रही है, उसके मुकाबले तैयारी निर्बल है अभी.

जहां अगले 2-3 दिनों में 3-4 हजार लोग जिले के बाहर से अपने घर लौट सकते हैं, ऐसे एक जिले के उदाहरण से जानते हैं, किस तरह से हो पा रही हैं व्यवस्थाएं.  शुरुआती शिथिलता व असमंजस के बाद अब प्रशासनिक अमला, पुलिस व कुछ लोकल सामाजिक संस्थाएं मिलकर कार्य कर रहे हैं.

सारे जिले की रिपोर्ट शाम 5 बजे डीएम तक जा रही है. प्रशासन समझ रहा है कि बीमारी बाहर से आए लोगों से फैल रही है. इसलिए जो संक्रमित हैं या जिनमें संक्रमण की संभावना है, सबसे पहले उन्हें क्वारंटीन करने की व्यवस्था करने पर फोकस किया जा रहा है.

टेस्टिंग लखनऊ के आसरे
जाँच किट की कोई व्यवस्था नहीं है. जिले में नाक व मुंह से स्वैब लेकर उसे लखनऊ भेजने भर की व्यवस्था है. विशेष वाहन से सैंपल लखनऊ भेजा जाता है. रिपोर्ट 4 दिन में आए या सप्ताह में, पता नहीं. जिन्हें क्वारंटीन में जिला मुख्यालय में रखा गया है, उनकी लक्षणों के आधार पर देखभाल की गई व फिर अच्छा पाए जाने पर घर भेजा गया है.

आइसोलेशन व क्वारंटीन सेंटर कर रहे तैयार


गंभीर संक्रमित या संभावितों के लिए जिला अस्पताल में आइसोलेशन सेंटर बनाया है. जिला मुख्यालय के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) पर भी आइसोलेशन सेंटर तैयार कर रहे हैं. इसी के साथ जिला अस्पताल के पास एक क्वारंटीन सेंटर भी बनाया है.

इसके अतिरिक्त पॉलिटैक्निक व आईटीआई समेत जिला मुख्यालय के 13 अन्य सरकारी शैक्षिक संस्थानों पर क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं. इन स्थानों पर खाने की व्यवस्था के साथ ही चिकित्सक व आशा संगनी की ड्यूटी लगाई गई है. यहां क्वारंटीन में अब तक 77 लोगों को रखा गया था. कुछ दिन की जाँच के बाद इन्हें छुट्टी दे दी गई. रविवार को 10 व आए.

जिले के पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी आइसोलेशन सेंटर की (या क्वारंटीन) की व्यवस्था की जा रही है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वैसे कोई व्यवस्था नहीं है.

आंगनबाड़ी, एएनएम तथा पंचायत के कर्मचारियों द्वारा ढाई हजार ऐसे लोगों की सूची स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है जो बाहर से आए हैं. इनको जरूरी रूप से क्वारंटीन में रखा जा रहा है. या तो इनके घरों में या फिर प्रशासन द्वारा तैयार किए 12 केंद्रों पर. गांव-कस्बों में लोग घरों में क्वारंटीन किए गए हैं.

उनकी सूचना घरों के बाहर व सार्वजनिक स्थानों पर लगाई गई है. जिसकी की भी प्रवासन (माइग्रेशन) की हिस्ट्री है, उसे घर पर ही क्वारंटीन कर रहे हैं. चिकित्सा विभाग ने इनके घरों के बाहर सूचना चस्पा कर दी है कि इन्हें 14 दिन घर से बाहर न निकलने दें, न किसी से मिलने दें.

इसे लेकर गांव के लोगों का भी योगदान मिल रहा है. जैसे ही कोई बाहर से गांव में पहुंचता है, ग्रामीण खुद ही कह रहे हैं कि जाओ, चेकअप करा कर आओ.