अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद ऐसा रहा जम्‍मू-कश्‍मीर का हाल, जाने

अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद ऐसा रहा जम्‍मू-कश्‍मीर का हाल, जाने

हिंदुस्तान में अमेरिकी समेत 16 राष्ट्रों के राजदूत गुरुवार को केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में दशा का जायजा लेने जा रहे हैं, लेकिन यूरोपीय यूनियन के राजनयिक इस समूह का हिस्‍सा नहीं होंगे. 

पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में यूरोपीय संसद के 27 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने कश्मीर का दौरा किया था. इस पर कांग्रेस पार्टी व अन्‍य विपक्षी पार्टियों ने असहमति जताई थी. वैसे बता दें कि जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 हटाए जाने के बाद से अब तक कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, वहां शांति कायम है.

इस बार यूरोपीय यूनियन के राजनयिकों के इस दौरे में शामिल न होने का कारण क्‍या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. हालांकि, न्‍यूज एजेंसी के अनुसार हिंदुस्तान सरकार के सूत्रों के मुताबिक, यूरोपीय यूनियन के राजनयिक अलग समूह में जम्‍मू-कश्‍मीर का दौरा करना चाहते हैं, लेकिन अभी इसकी तैयारी करना संभव नहीं है. ऐसा बताया जा रहा है कि यूरोपीय यूनियन के राजनयिकों को कुछ समय बाद कश्‍मीर के दौरे पर ले जाया जाएगा.

सूत्रों के अनुसार, हिंदुस्तान सरकार जम्‍मू-कश्‍मीर में राजनयिकों के दौरे के मामले पर यूरोपीय यूनियन से सम्पर्क बनाए हुए है. हालांकि, यूरोपीय यूनियन की ओर से इस जम्‍मू-कश्‍मीर दौरे का भाग बनने के लिए सहमति नहीं मिल सकी है. केन्द्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक, दरअसल, यूरोपीय यूनियन के राजनयिक अलग समूह में जाना चाहते हैं, लेकिन अभी इतने कम समय में ऐसी तैयारियों कर पाना संभव नहीं है.

गौरतलब है कि जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्‍तान की ओर से हिंदुस्तान पर कई आधारहीन आरोप लगाए गए. हालांकि, इन आरोपों में कोई दम नहीं था. अमेरिका व चाइना समेत कई राष्ट्रों ने इसे हिंदुस्तान का आंतरिक मुद्दा बताया. बता दें कि अक्टूबर महीने में यूरोपीय संसद के 27 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी कश्मीर का दौरा किया था, इसके बाद अब यह किसी विदेशी समूह का दूसरा दौरा है.