आंदोलन कर रहे किसानों ने नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केन्द्र सरकार को दी यह बड़ी सलाह

आंदोलन कर रहे किसानों ने नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केन्द्र सरकार को दी यह बड़ी सलाह

आंदोलन कर रहे किसानों ने बुधवार को बोला कि नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केन्द्र सरकार को संसद का विशेष सत्र आहूत करना चाहिए और यदि मांगें नहीं मानी गईं तो राष्ट्रीय राजधानी की ओर सड़कों को अवरुद्ध किया जाएगा 

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि केन्द्र विरोध प्रदर्शन को पंजाब केंद्रित किसान आंदोलन के तौर पर दिखाना चाहता है और किसान संगठनों में फूट डालने का कार्य कर रहा है  

जारी रहेगा आंदोलन
उन्होंने बोला कि नए कृषि कानूनों के विरूद्ध भविष्य के कदमों पर निर्णय के लिए देश के दूसरे भागों के किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी किसान संयुक्त मोर्चा में शामिल होंगे पाल ने बोला कि किसान संगठनों के प्रतिनिधि गुरुवार को होने वाली मीटिंग में केंद्रीय मंत्रियों को अपनी असहमति से अवगत कराएंगे उन्होंने कहा, ‘‘तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केन्द्र को संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए हम तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे ’’

32 किसान संगठनों ने सिंघु बॉर्डर पर की बैठक
किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बोला कि यदि केन्द्र तीनों नए कानूनों को वापस नहीं लेगा तो किसान अपनी मांगों को लेकर आनें वाले दिनों में और कदम उठाएंगे संवाददाता सम्मेलन के पहले करीब 32 किसान संगठनों के नेताओं ने सिंघु बॉर्डर पर मीटिंग की जिसमें भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत भी शामिल हुए केन्द्र और आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के बीच मंगलवार को हुई बातचीत बेनतीजा रही और आगे अब तीन दिसंबर को फिर से बातचीत होगी

किसानों ने कुबूल नहीं किया सरकार का प्रस्ताव
किसानों के संगठनों ने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गौर करने के लिए एक समिति बनाने के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और बोला कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे पाल ने बताया, ‘‘हमारी मीटिंग के बाद राकेश टिकैत जी को सरकार ने मंगलवार को मीटिंग के लिए बुलाया था वह हमारे साथ हैंयह पंजाब केंद्रित आदोलन नहीं है बल्कि समूचे देश के किसान इससे जुड़े हैं नए कृषि कानूनों के विरूद्ध हमें केरल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों के किसानों का भी समर्थन मिला है ’’

बुधवार को बढ़ी किसानों की संख्या 
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती थी कि संयुक्त किसान मोर्चा के मेम्बर योगेंद्र यादव केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की मंगलवार को हुई बातचीत में शामिल हों उन्होंने कहा, ‘‘योगेंद्र यादव ने हमसे बोला कि बातचीत की प्रक्रिया बंद नहीं होनी चाहिए इसके बाद ही हम केंद्रीय मंत्रियों के साथ मीटिंग में शामिल हुए मंगलवार को हुई मीटिंग में हम देश भर के किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर गए हमने किसान संगठनों में फूट डालने की षड्यंत्र असफल कर दी ’’पंजाब और हरियाणा के किसान पिछले एक हफ्ते से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं बुधवार को प्रदर्शनकारियों की संख्या में और वृद्धि हुआ


पीएम मोदी की दाढ़ी-बाल का पश्चिम बंगाल से कनेक्शन, इसलिए रखा ऐसा लुक

पीएम मोदी की दाढ़ी-बाल का पश्चिम बंगाल से कनेक्शन, इसलिए रखा ऐसा लुक

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों भाजपा और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तीखी होती जा रही जंग के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया लुक भी खासी चर्चा का विषय बना हुआ है। पश्चिम बंगाल का सियासी रण जीतने के लिए भाजपा ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है और ऐसे में प्रधानमंत्री का जैसा लुक भी लोगों का खासा ध्यान खींच रहा है। बंगाली अस्मिता के प्रतीकों में गुरुदेव टैगोर का स्थान सर्वोपरि माना जाता रहा है और ऐसे में प्रधानमंत्री के नए लुक का पश्चिम बंगाल कनेक्शन खूब खोजा जा रहा है। पीएम मोदी के लंबे बाल और दाढ़ी की साम्यता गुरुदेव टैगोर से जोड़कर पश्चिम बंगाल के चुनाव में उसके पड़ने वाले असर का आकलन भी किया जा रहा है।

काफी असरकारक है पहनावा और लुक
पहनावे और लुक का महत्व केवल अभिनेताओं के लिए ही मायने नहीं रखता बल्कि नेताओं का लुक और पहनावा भी आम जनता पर काफी असर डालने वाला साबित होता रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी अपने लुक और पहनावे के कारण हमेशा लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते थे।

चर्चा का विषय बन गया था मोदी का सूट
उनकी तरह ही पीएम मोदी भी अपने पहनावे और लुक को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत के दौरे पर आए थे तो उस दौरान मोदी का सूट लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया था। इस सूट की कीमत को लेकर भी मीडिया और सोशल मीडिया में काफी दिनों तक चर्चा रही थी।

पीएम के नए लुक की खासी चर्चा
देश में कोरोना का कहर शुरू होने के बाद मोदी का नया लुक भी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। बिहार चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भाजपा ने इन दिनों अपनी पूरी ताकत पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए लगा रखी है।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इसे अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई बना लिया है और ऐसे में पीएम मोदी के गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जैसे लुक के भी निहितार्थ ढूंढे जा रहे हैं।

बंगाली समाज अपनी अस्मिता के प्रतीकों को लेकर हमेशा सतर्क रहता रहा है और बंगाली अस्मिता के प्रतीकों में गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर का नाम हर बंगाली परिवार की जुबान पर रहता है।

बंगाली समाज में टैगोर की किताबों और रवींद्र संगीत के प्रति गजब की दीवानगी रही है और ऐसे में मोदी का नया लुक पश्चिम बंगाल के चुनाव को किस हद तक प्रभावित करेगा, इस पर भी सियासी चर्चाएं हो रही हैं।

ममता को पीएम के नए लुक पर आपत्ति
पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पीएम मोदी का अंदाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। उनकी लंबी दाढ़ी, लंबे बाल और उनका लंबा कुर्ता टैगोर के लुक से काफी मिलता-जुलता है।

पीएम मोदी के नए लुक की सियासी हलकों में भी खूब चर्चा हो रही है। हालांकि टीएमसी की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीएम के इस नए लुक पर काफी आपत्ति है। वे सार्वजनिक तौर पर इस बाबत अपनी आपत्ति दर्ज करा चुकी हैं। विपक्षी दलों और ममता का कहना है कि प्रधानमंत्री खुद को टैगोर जैसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।

कोरोना संकट के बाद बदला पीएम का लुक
देश में कोरोना संकट शुरू होने के बाद पीएम मोदी का लुक जब बदला हुआ नजर आया तो पहले यह चर्चा फैली कि शायद लॉकडाउन में लोगों को घरों में रहने के लिए प्रेरित करने की दृष्टि से वे खुद भी गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं।


लॉकडाउन का समय खत्म होने के बाद भी जब प्रधानमंत्री का लुक नहीं बदला तो लोगों के बीच उनका नया लुक चर्चा का विषय बन गया और उसे गुरुदेव टैगोर से प्रभावित बताया जाने लगा।

भाजपा दे रही टीएमसी को जवाब
टीएमसी की ओर से भाजपा पर सबसे बड़ा हमला उसे बाहरी बता कर किया जाता रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के अन्य नेता भाजपा को बाहरी बताते हुए हमेशा यह दावा करते रहे हैं कि बंगाल के लोग बाहरी लोगों को कभी सत्ता सौंपने के लिए तैयार नहीं होंगे।

दूसरी ओर भाजपा हमेशा टीएमसी के इन आरोपों को खारिज करती रही है। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान राज्य से ही किसी नेता को मुख्यमंत्री बनाने का एलान किया था।

पार्टी के सांसद स्वप्न दासगुप्ता का भी कहना है कि बंगाली अस्मिता के प्रतीकों पर सभी बंगालियों और भारतीयों का हक है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बारे में किसी भी पार्टी को कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए क्योंकि गुरुदेव टैगोर किसी भी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं है।

पीएम मोदी भी अपने खिलाफ बाहरी शब्द का इस्तेमाल किए जाने का इशारों में जवाब देते रहे हैं। विश्वभारती विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह को उन्होंने बांग्ला भाषा में संबोधित किया था और इस दौरान टैगोर के गुजरात कनेक्शन की भी जानकारी दी थी।

उनका कहना था कि गुरुदेव के बड़े भाई सत्येंद्र नाथ टैगोर भारतीय सिविल सेवा में चुने गए थे और उनकी पोस्टिंग अहमदाबाद में हुई थी। गुरुदेव टैगोर भी अपने बड़े भाई के पास अक्सर गुजरात आया करते थे और उन्होंने अमदाबाद में लंबा समय बिताया था।

पीएम मोदी ने अभी तक पश्चिम बंगाल का चुनावी दौरा नहीं शुरू किया है मगर वे जल्द ही पश्चिम बंगाल के दौरे पर पहुंचने वाले हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान पीएम मोदी खास तौर पर बंगाली अस्मिता के दो बड़े प्रतीको नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर पर ही ज्यादा बातें करेंगे।

नए लुक से बंगाल की सियासत पर असर
भाजपा समय-समय पर पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से एक मौका देने की अपील करती रही है और पार्टी का दावा है कि वह पश्चिम बंगाल को सोनार बांग्ला बनाने में जरूर कामयाब होगी। पीएम मोदी को प्रतीकों के जरिए मतदाताओं का दिल जीतने की कला का माहिर खिलाड़ी माना जाता है और निश्चित रूप से पीएम का नया लुक पश्चिम बंगाल की सियासत को किसी न किसी रूप में जरूर प्रभावित करेगा।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि पीएम मोदी का नया लुक टैगोर से काफी मिलता-जुलता है। पश्चिम बंगाल ही नहीं देश के अन्य हिस्सों में भी इस बात की खासी चर्चा है और ऐसे में पीएम के नए लुक का बंगाल चुनाव से कनेक्शन खोजना कोई अचरज की बात नहीं है।


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