पार्टी की स्थिति सुधारने को सोनिया गांधी ने बनाए तीन पैनल

पार्टी की स्थिति सुधारने को सोनिया गांधी ने बनाए तीन पैनल

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को पार्टी के उच्च नेताओं को शामिल कर तीन पैनलों का गठन किया है. बताया गया है कि यह कदम आर्थिक, विदेश  राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मामलों पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट रखने के लिए उठाया गया है. इन पैनलों में एक-दो लोगों को छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर पुराने नेता ही शामिल हैं. इनमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से लेकर राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद  कई अन्य पूर्व केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं.

बताया गया है कि इन तीन पैनलों में गुलाम नबी आजाद के साथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा, एम वीरप्पा मोइली  शशि थरूर जैसे नेता भी शामिल हैं, जिन्होंने पार्टी में हर स्तर पर परिवर्तन की मांग के साथ अगस्त में सोनिया गांधी को लेटर लिखा था. अब इन पैनल्स में पुराने नेताओं को शामिल करना इसी बात का संकेत है कि गंभीर नीतिगत मुद्दों पर निर्णय के लिए सोनिया गांधी अब भी उन पर भरोसा करती हैं.

बता दें कि कांग्रेस पार्टी में इन पैनल्स का गठन ऐसे समय में किया गया है, जब RCEP समझौते से हिंदुस्तान के अलग रहने के मामले पर पार्टी से भिन्न-भिन्न आवाजें उठी थीं. यहां तक कि अनुच्छेद 370 को दोबारा लागू कराने पर भी कांग्रेस पार्टी नेताओं के भिन्न-भिन्न सुर रहे हैं. अब पार्टी के कार्य करने के उपायों पर प्रश्न उठाने वाले नेताओं को पैनल में शामिल कर के सोनिया गांधी ने संकेत कर दिया है कि उनके मन में किसी भी मेम्बर के लिए गुस्सा नहीं है. उनकी यह प्रयास पार्टी में बिहार चुनाव  उपचुनाव के नतीजों के बाद उभरे विवादों को भी शांत करने के तौर पर भी देखी जा रही है.

पैनल गठन के कदम से खुश नहीं लेटर लिखने वाले कुछ नेता: हालांकि, दूसरी तरफ जिन नेताओं ने पार्टी में नीतिगत परिवर्तन करने के लिए सोनिया गांधी को लेटर लिखा था, उनमें से कई पैनल गठन के कदम से कुछ खास खुश नहीं बताए जा रहे हैं. पैनल में शामिल किए गए एक नेता ने बताया कि यह कदम उत्साहित करने से ज्यादा मन बहलाने वाला है, क्योंकि जो मामले उठाए गए थे, उन्हें अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया  पार्टी लगातार ढलान की ओर है.

एक अन्य नेता ने कहा, “संस्थागत मामलों को उठाने के बजाय हमें नीतिगत मुद्दों को देखने के लिए बोला जाता है, पार्टी के पास पहले ही कई फोरम हैं, जो इन मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष को जानकारी देते हैं  पैनल में पूर्व पीएम को शामिल करना पूर्व में उनके द्वारा लिए गए पद को छोटा दिखाने जैसा है.

कौन नेता किस कमेटी में शामिल?: कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष ने मनमोहन सिंह को तीनों पैनलों में शामिल किया है, उनके अतिरिक्त पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को आर्थिक मामलों की कमेटी का भाग बनाया गया है. लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के पूर्व नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह  पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश भी इसी समूह का भाग होंगे.

इसके अतिरिक्त आनंद शर्मा, शशि थरूर, सलमान खुर्शीद  ओडिशा से पार्टी के युवा सांसद सप्तगिरी उलाका को विदेश मामलों के पैनल का भाग बनाया गया है. शर्मा को पार्टी के विदेश मामलों के विभाग का प्रमुख बनाया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से जुड़े पैनल में गुलाम नबी आजाद , वीरप्पा मोइली, लोकसभा सांसद विन्सेंट पाला  लोकसभा सांसद वी वैथिलिंगम को शामिल किया गया है. इन पैनलों से पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी  कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को बाहर कर दिया गया है.


ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस पार्टी ने किसानों का समर्थन करते हुए सरकार को दी यह बड़ी धमकी!

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस पार्टी ने किसानों का समर्थन करते हुए सरकार को दी यह बड़ी धमकी!

 नए कृषि कानूनों (New Farm Law) का पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ किसान लगातार विरोध (Farmers' Protest) कर रहे हैं दिल्ली और हरियाणा के सिंधु और टिकारी सीमा पर बड़ी संख्या में किसान डटे हुए हैं 

अब इन किसानों को ट्रांसपोर्टरों (Transporters) का भी साथ मिल गया है ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस पार्टी (AIMTC) ने ऐलान किया है कि देश का ट्रांसपोर्टर एकजुट होकर इन किसानों का समर्थन करता है  साथ ही एआईएमटीसी ने धमकी दी है कि यदि सरकार ने किसानों की मांगें को नहीं मानीं तो उत्तरी हिंदुस्तान से माल ढुलाई ठप कर दी जाएगी यदि फिर भी सरकार नहीं मानी तो पूरे हिंदुस्तान में ट्रांसपोर्ट सेवा धीरे-धीरे ठप कर दी जाएगी यानी पूरे देश में ट्रकों का चक्‍‍‍‍काजाम कर दिया जाएगा

किसान आंदोलन से जनजीवन हो रहा है प्रभावित
पंजाब और दिल्ली-हरियाणा सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन से सब्जियों, फलों तथा खाद्यान्नों के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सामानों का ट्रांसपोर्टेशन बाधित हुआ है पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर का देश के अन्य हिस्सों से ट्रांसपोर्टेशन पर बुरा प्रभाव पड़ा है इन क्षेत्रों से करीब 65 प्रतिशत खाद्यान्नों की ढुलाई होती है, जिस पर आंदोलन का सीधा प्रभाव पड़ा है सेब, आलू, प्याज समेत हरी सब्जियों की माल-ढुलाई ठप होने से उत्तर हिंदुस्तान समेत देशभर में महंगाई बढ़ रही है इसके अतिरिक्त दूध और दवाइयों का ट्रांसपोर्टेशन भी प्रभावित हुआ है ट्रांसपोर्टरों ने धमकी दी है कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार यदि किसानों की मांगें  नहीं मानती है तो महंगाई बढ़ सकती है

लगातार बढ़ रहे हैं फलों और सब्जियों के दाम 
किसान आंदोलन का ही प्रभाव है कि उत्तर हिंदुस्तान समेत पूरे देश में फलों और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आलू का खुदरा मूल्य 50 रुपये प्रति किलो, प्याज 40-50 रुपये प्रति किलो, टमाटर 40-50 रुपये प्रति किलो और सेब 80-100 रुपये प्रति किलो के रेट पर पहुंच गया है यदि किसानों का आंदोलन जारी रहा तो संभावना है कि आने वाले दिनों में सब्जियों और फलों के साथ-साथ अनाजों के दाम बेतहाशा बढ़ेंगे


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