अफगानिस्‍तान संकट को लेकर अपनी ही पार्टी में घिरे राष्‍ट्रपति बाइडन, लोकप्र‍ियता ग्राफ में बड़ी गिरावट

अफगानिस्‍तान संकट को लेकर अपनी ही पार्टी में घिरे राष्‍ट्रपति बाइडन, लोकप्र‍ियता ग्राफ में बड़ी गिरावट

अफगानिस्‍तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद राष्‍ट्रपति जो बाइडन की लोकप्रियता में गिरावट आई है। हालांकि, पूर्व में अफगानिस्तान से सेना बुलाने का समर्थन न केवल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता कर रहे थे, बल्कि विपक्षी पार्टी रिपब्लिकन के ज्यादातर सदस्य कर रहे थे। लेकिन अब हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं। अब अफगानिस्‍तान के मामले में राष्‍ट्रपति बाइडन को सेना के दिग्गज अधिकारियों और अपनी ही पार्टी के सदस्‍यों का विरोध झेलना पड़ रहा है। बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार उनकी रेटिंग 50 फीसद से नीचे गिर गई है। इसके चलते अगले साल होने वाले महत्वपूर्ण मिड टर्म चुनाव में पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है।

अफगान समस्‍या को निपटाने में राष्‍ट्रपति बाइडन से हुई चूक

अमेरिका में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अफगानिस्‍तान की समस्‍या को निपटाने में राष्‍ट्रपति बाइडन से चूक हुई है। यह कहा जा रहा है कि इस समस्‍या का निस्‍तारण और बेहतर ढंग से किया जा सकता था। राष्‍ट्रपति बाइडन की डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सदस्‍य उनके फैसले के खिलाफ है। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रपति ने आश्वासन दिया था कि सैनिकों के जाने से पहले कोई भी अमेरिकी अफगानिस्‍तान में नहीं फंसेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी भी सौ से अधिक अमेरिकी नागरिक फंसे हैं। इसके अलावा कई अन्‍य देशों के नागरिक अफगानिस्‍तान में फंसे हुए हैं।

डेमोक्रेटिक पार्टी दो विरोधी खेमे में विभक्‍त

बाइडन को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी में दो विरोधी खेमे बन गए हैं। कई डेमोक्रेटिक नेता अफगानिस्‍तान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के पक्ष में हैं। वहीं, बर्नी सैंडर्स के नेतृत्व में वामपंथी डेमोक्रेटिक नेता इसके खिलाफ हैं। दोनों ही बाइडन को घेर रहे हैं। बर्नी सेंडर्स धड़े के नेता रो खन्ना ने सेना वापसी को शेखी बघारने जैसा कदम बताया है। सीनेट की विदेश संबंधी समिति के अध्यक्ष बाब मेनेंडेज ने कहा कि राष्‍ट्रपति के फैसले से मैं निराश हूं। उन्‍होंने कहा कि हमें खुफिया विफलताओं के भयावह परिणाम सामने दिख रहे हैं। सीनेट में सशस्त्र सेवाओं के अध्यक्ष जैक रीड ने कहा कि हम पता करेंगे कि आखिर गलती कहां हुई। सीनेट की विदेश नीति समिति के सदस्य बेन कार्डिन कहते हैं कि अमेरिका के लिए यह एक धब्बा है। इससे अमेरिकी हितों को नुकसान होगा।

42 फीसद अमेरिकी मानते हैं कि बाइडन पूरी तरह नाकाम रहे

सितंबर में हुए ज्यादातर सर्वे में राष्‍ट्रपति बाइडन की अप्रूवल रेटिंग 50 फीसद से नीचे गिर गई है। 42 फीसद लोग इस बात को मजबूती से कह रहे हैं कि अफगानिस्तान में बाइडन पूरी तरफ से नाकाम रहे हैं। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने बाइडन पर बढ़त बना ली है। उधर, अब लोग कोरोना पर भी बाइडन को घेर रहे हैं। अमेरिका में प्रतिदिन 1.5 लाख केस सामने आ रहे हैं और 1500 मौतें हो रही हैं। बाइडन के फैसले के बाद डेमोक्रेट्स इस बात से च‍िंतित हैं कि इस विनाशकारी वापसी ने मिड टर्म चुनाव में उनकी पकड़ कमजोर कर दी है। अधिकांश डेमोक्रेट पत्रकारों को ऑफ द रिकार्ड बता रहे हैं कि यह बाइडन प्रशासन का सबसे कठिन पल है। उनका मानना है कि रिपब्लिकन पार्टी के पास कोई मुद्दा नहीं था, लेकिन इस वापसी से उनके हाथ एक शक्तिशाली ‘गोला बारूद’ लग गया है।


बाइडन नीति की सेना में हो रही है निंदा

अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सैनिकों को बुलाने को लेकर सबसे बड़ा निशाना सेना के पूर्व अफसरों ने साधा है। वर्ष 2009 में अफगानिस्तान में एक खदान में डैन बर्शिंस्की के पैर उड़ गए थे। उन्होंने कहा कि मैं इस बात से निराश हूं कि बाइडन प्रशासन के पास अफगानिस्‍तान की समस्‍या से निपटने की कोई योजना नहीं थी। इसलिए हर स्तर पर आलोचना होनी चाहिए। अफगानिस्तान में 2012 में अमेरिकी मरीन रहे माइकल बायड का कहना है कि जमीन पर सामरिक हालात के लिए हमेशा कमांडर-इन-चीफ ही जिम्मेदार होता है। इस नाकामी की जिम्मेदारी बाइडन को लेनी चाहिए। वह बाइडेन के इस तर्क को भी खारिज करते हैं कि अफगानिस्तान से निकलते समय अराजकता की पहले ही आशंका थी। उन्‍होंने कहा कि यह बकवास है। 20 साल बाद हमें पीठ नहीं दिखानी चाहिए थी।


प्रधानमंत्री मोदी की ढाका यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने वाला आतंकी गिरफ्तार

प्रधानमंत्री मोदी की ढाका यात्रा के दौरान हिंसा भड़काने वाला आतंकी गिरफ्तार

ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस की खुफिया शाखा ने आतंकी संगठन हिफाजत-ए-इस्लाम (Hefazat-e-Islam) से जुड़े रिजवान रफीक (Rezwan Rafiquee)  को गिरफ्तार किया है। उस पर मार्च में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बांग्लादेश यात्रा के दौरान ढाका में हिंसा भड़काने का आरोप है।

खुफिया शाखा के अतिरिक्त आयुक्त एकेएम हाफिज अख्तर (A.K.M. Hafiz Akhter)  ने बताया कि रफीक को शुक्रवार की रात मुग्दा (Mugda) इलाके से गिरफ्तार किया गया है। ढाका में 26 मार्च को हुई हिंसा के सिलसिले में उसके खिलाफ पलटन थाने (Paltan Police Station) में मुकदमा दर्ज किया गया था। वह पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे का विरोध कर रहा था। अख्तर ने बताया कि रिजवान ने फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर  भड़काऊ पोस्ट साझा की थी और दूसरे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर भी उसने आतंकी संगठनों के शीर्ष सरगनाओं का समर्थन किया था।


इसी साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश का दो दिवसीय दौरा किया। कोरोना काल शुरू होने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा रही। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री बांग्लादेश की आजादी की 50वीं सालगिरह के जश्न में भी शामिल हुए। इस अवसर पर ढाका में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-बांग्लादेश संबंधों, दोनों देशों की साझी विरासतों और साझा लक्ष्यों पर विस्तार से बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की आजादी में भारत की भूमिका, भारतीय सैनिकों के बलिदान और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की भूमिका का भी उल्लेख किया।


इसके अलावा प्रधानमंत्री ने मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और नरसंहार का जिक्र कर कहा कि उन अत्याचारों और दमन की दुनिया में उतनी चर्चा नहीं होती, जितनी होनी चाहिए। दोनों देशों के मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही लोकतांत्रिक देश हैं और हमारी विरासत भी साझी है, हमारा विकास भी साझा है, हमारे लक्ष्य भी साझे हैं और हमारी चुनौतियां भी साझा हैं। व्यापार और उद्योग में हमारे सामने एक जैसी संभावनाएं हैं तो आतंकवाद जैसे समान खतरे भी हैं।