पंजशीर के लोगों की हत्या संबंधी रिपोर्ट की जांच करेगा तालिबान, तालिबानी दहशतगर्दों पर यातना देने के हैं आरोप

पंजशीर के लोगों की हत्या संबंधी रिपोर्ट की जांच करेगा तालिबान, तालिबानी दहशतगर्दों पर यातना देने के हैं आरोप

अफगानिस्तान में तालिबान की कार्यवाहक सरकार के गृह मंत्रालय ने पंजशीर प्रांत में नागरिकों की हत्या व यातना देने संबंधी रिपोर्ट की जांच कराने की बात कही है। तालिबान के लड़ाकों पर ही हत्या व यातना देने के आरोप हैं, ऐसे में सरकार की जांच संबंधी घोषणा के बाद भी लोगों को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं दिखती। टोलो न्यूज ने मंत्रालय के प्रवक्ता क्वारी सईद खोस्ती द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान के हवाले से रिपोर्ट प्रकाशित की है।

किसी को अत्याचार की इजाजत नहीं

तालिबान के बयान के अनुसार नई सरकार किसी को अत्याचार की इजाजत नहीं देगी। अगर किसी क्षेत्र में छोटी घटनाएं होती हैं, तो उनकी जांच कराई जाएगी। तालिबानी सरकार ने यह घोषणा उन रिपोर्ट के संदर्भ में की है, जिनमें पंजशीर के लोगों के हवाले से कहा गया है कि तालिबानी लड़ाकों ने उन्हें यातना देते हुए उनसे हथियारों की मांग की।

बरादर ने फिर से दूतावास खोलने की गुजारिश की

अफगानिस्तान की कार्यवाहक सरकार के प्रथम उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने विभिन्न देशों से अफगानिस्तान में अपना दूतावास फिर से खोलने का आग्रह किया है। टोलो न्यूज ने शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा है कि बरादर ने यह बयान रूस, चीन व पाकिस्तान के राजदूतों तथा अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी समेत अन्य तालिबानी अधिकारियों की मुलाकात के बाद दिया।

ईंट भट्ठे पर काम करने को मजबूर हैं पत्रकार

एएनआइ के अनुसार तालिबान के कब्जे के बाद से अफगानिस्तान में बेरोजगारी बढ़ गई है। आलम यह है कि बादघिस प्रांत में पत्रकारिता कर रहे फेर्ज कोह को 10 सदस्यों वाले अपने परिवार को पालने के लिए ईंट भट्ठे पर मजदूरी करनी पड़ रही है। खामा प्रेस न्यूज एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोह पिछले साल 10 साल से पत्रकारिता कर रहे थे, लेकिन तालिबानी सरकार आने के बाद उनका संस्थान बंद हो गया और वे बेरोजगार हो गए।

पुनर्वास से पहले अमेरिकी सैन्य छावनी खाली करने लगे अफगानी

रायटर के अनुसार अफगानी शरणार्थियों की मेजबानी करने वाले अमेरिका स्थित सैन्य बेस में कुछ अप्रत्याशित हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि अमेरिकी पुनर्वास सेवा हासिल करने से पहले सैकड़ों अफगानी शरणार्थी शिविर खाली करने लगे हैं। हालांकि, अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के एक प्रवक्ता का कहना है कि वही लोग शिविर छोड़ रहे हैं, जिनका कोई जानकार यहां रहता है और जिसकी मदद से वे अपनी आजीविका तलाश सकते हैं। 


टोंगा में भूकंप के बाद सुनामी से तबाही, इतने लोगो की हुई मौत

टोंगा में भूकंप के बाद सुनामी से तबाही, इतने लोगो की हुई मौत

वेलिंगटनप्रशांत महासागर के देश टोंगा में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद आई सुनामी ने जमकर तबाही मचाई है। सुनामी की लहरें इतनी ताकतवर थीं कि उसने पूरे देश के कम्युनिकेशन सिस्टम को तहस-नहस कर दिया। टेलिफोन लाइन और इंटरनेट कनेक्शन अब भी काम नहीं कर रहे हैं। इससे टोंगा का पूरी दुनिया से संपर्क कट गया है। विदेशों में रहने वाले टोंगा के लोग अपने रिश्तेदारों की सलामती को

लेकर काफी परेशान हैं। अभी तक हताहतों की संख्या का पता नहीं चल सका है।शनिवार को टोंगा के पास समुद्र के अंदर एक ज्वालामुखी फट गया था। इससे 1.2 मीटर ऊंची सुनामी की लहरों की चेतावनी दी गई थी। टोंगा के साथ-साथ दक्षिण प्रशांत के कई द्वीपों के लिए भी चेतावनी दी गई थी। जिसके बाद सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे कुछ फुटेज में टोंगा के तटीय इलाकों में भारी तबाही दिखाई दे रही है। समुद्र के किनारे बने घर टूटे हुए नजर आ रहे हैं।

शनिवार शाम से कई संपर्क नहींशनिवार को शाम करीब 6.40 बजे इंटरनेट और फोन लाइन ठप हो गई। जिसके बाद टोंगा के द्वीपों पर रहने वाले 105,000 निवासियों से बाकी दुनिया को कोई संपर्क नहीं है। टोंगा में अभी तक घायलों या मौतों की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं है। सिर्फ राजधानी नुकुआलोफा से ही संपर्क हो पा रहा है। ज्वालामुखी विस्फोट से सटे इलाकों और शेष देश से नुकसान से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

न्यूजीलैंड की पीएम ने जताया दुखन्यूजीलैंड के प्रधान मंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने टोंगा के निवासियों के लिए दुख जताया है। उन्होंने कहा कि नुकुआलोफा (Nukualofa) ज्वालामुखी धूल के घने ढेर में ढका हुआ है। इसके अलावा सभी स्थितियां शांत और स्थिर हैं। टोंगा न्यूजीलैंड के 2,383 किलोमीटर (1,481 मील) उत्तर पूर्व में स्थित है। इस देश के कई द्वीपों पर कुल 105,000 की आबादी रहती है। ज्वालामुखी की राख से टोंगा में छाया अंधेरासैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि शनिवार को ज्वालामुखी विस्फोट के कारण निकले धूल और धुएं के गुबार समुद्र तल से लगभग 12 मील ऊपर तक दिखाई दिए। टोंगा के ऊपर का आकाश राख से काला हो गया था। टोंगा की बड़ी आबादी न्यूजीलैंड में रहती है। उनके बीच अपने परिवार और रिश्तेदारों को लेकर डर है। सभी अपने परिवारों से संपर्क स्थापित करने के लिए बेताब नजर आए। कुछ चर्चों ने ऑकलैंड और अन्य शहरों में सामुदायिक प्रार्थना का आयोजन किया।