किस देश ने पहले किया था परमाणु हथियार का इस्तेमाल, कैसे मची होड़

किस देश ने पहले किया था परमाणु हथियार का इस्तेमाल, कैसे मची होड़

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे शक्तिशाली महाशक्तियों में एक रूस, जिसके पास इतने घातक और विनाशकारी हथियार हैं कि उससे उलझने की कोशिश किसी भी देश के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।

लेकिन रूस के सामने दुनिया की जो महाशक्ति खड़ी है वो रूस से भी ज़्यादा ताकतवर है। वो देश कोई और नहीं बल्कि अमेरिका है।

अगर आज परमाणु युद्ध छिड़ गया तो दुनिया की तबाही निश्चित हो जाएगी। शीत युद्ध के बाद से दुनियाभर में हथियारों का भंडार कम तो हुआ है लेकिन परमाणु शक्ति संपन्न देशों की संख्या बढ़ गई है।

नौ परमाणु शक्ति संपन्न देश
परमाणु हथियार हासिल करने वाले नए देश अपना खजाना बढ़ाने में जुटे हुए हैं जबकि अमेरिका और रूस जैसे पुराने परमाणु संपन्न देशों के पास पहले से ही बहुत बड़ जखीरा पड़ा है।

सभी नौ परमाणु शक्ति संपन्न देशों के पास कुल 13,400 परमाणु हथियार हैं जिनमें 3,720 हथियार सेनाओं के पास हैं जबकि बाकी के परमाणु हथियार रिजर्व में रखे हुए हैं।

इन देशों के पास है परमाणु हथियार
इस वक्त दुनिया में नौ देशों के पास परमाणु हथियार हैं जिनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इस्राएल और उत्तर कोरिया शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था स्टॉकहोम अंतरराष्ट्रीय शांति शोध संस्थान (सिपरी) का अनुमान है कि 2019 की शुरुआत में दुनिया में परमाणु हथियारों की संख्या 13,865 थी।


सिपरी की ताजा रिपोर्ट कहती है कि भले ही दुनिया के परमाणु शक्ति संपन्न देश अपने हथियारों को आधुनिक बनाने में जुटे हैं लेकिन उनकी संख्या घट रही है।

एक साल पहले के मुकाबले परमाणु हथियारों की संख्या 600 कम हुई है। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और रूस के बीच हुई स्टार्ट संधि है जिसके तहत दोनों देशों ने अपने परमाणु हथियार घटाए हैं।

रूस के पास अभी 6,500 परमाणु हथियार हैं जबकि अमेरिका के पास 6,185. इनमें से एक चौथाई हथियारों को तैनात किया गया है।

किस देश के पास कितने परमाणु हथियार
दक्षिण एशिया में चिर प्रतिद्वंद्वी भारत और पाकिस्तान भी अपने परमाणु हथियारों के जखीरे को बढ़ा रहे हैं।
अनुमान है कि भारत के पास 130 से 140 और पाकिस्तान के पास 150 से 160 परमाणु हथियार हैं। वे नए सिस्टम भी विकसित कर रहे हैं या फिर ऐसी योजना बना रहे हैं।

डिफेन्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक “भारत और पाकिस्तान अपनी सैन्य परमाणु सामग्री उत्पादन क्षमताओं को इस स्तर पर बढ़ाने में लगे हैं जिससे अगले एक दशक में उनके परमाणु हथियारों के भंडार का आकार बढ़ेगा।

उत्तर कोरिया के पास 20 से 30 परमाणु हथियार
सिपरी की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया के पास 20 से 30 परमाणु हथियार हैं और वह उन्हें अपने देश की सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से बहुत अहम मानता है।

वैसे जब से उत्तर कोरिया ने अमेरिका के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता शुरू की है, उसने किसी परमाणु हथियार या फिर लंबी दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण नहीं किया है। अन्य देशों में फ्रांस के पास 300, चीन के पास 290, ब्रिटेन के पास 200 और इस्राएल के पास 80 से 90 परमाणु हथियार हैं।

पहली और आखिरी बार अमेरिका ने किया था परमाणु बम का इस्तेमाल
अमेरिका ने पहली और आखिरी बार जापान के दो शहरों- हिरोशिमा और नागासाकी पर 6 और 9 अगस्त 1945 को परमाणु बम से हमला किया था।

1945 से लेकर अब तक दुनियाभर में 1,25,000 से ज्यादा परमाणु हथियार बने। 6 अगस्त, 1945 को हिरोशिमा पर ‘लिटल बॉय’ नामक जबकि 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी पर ‘फैट मैन’ नामक परमाणु बम गिराया गया।

1963 में आंशिक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध समझौता हुआ और वायुमंडलीय परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध लग गया। सभी तरह के परमाणु हथियारों के परीक्षण पर पाबंदी लगाने के मकसद से 1996 में व्यापक परमाणु परीक्षण परीक्षण प्रतिबंध समझौता (CTBT) हुआ।

परमाणु हथियार बनाने के लिए ऐसी मची होड़
विश्व युद्ध खत्म होते ही अमेरिका और तत्कालीन सोवियत यूनियन (अब रूस) के बीच हथियारों की होड़ शुरू हो गई थी। USSR ने अपना पहला परमाणु परीक्षण अमेरिका से चार साल बाद 1949 में कर लिया।

उसके बाद वह ज्यादा से ज्यादा हथियार बनाने लगा। 1986 में सोवियत संघ के पास 40,159 परमाणु हथियार हो गए। हालांकि, शीत युद्ध के खात्मे के बाद परमाणु हथियार कम करने की प्रक्रिया शुरू हुई और इस साल की शुरुआत तक रूस ने अपना खजाना घटाकर 6,375 पर ले आया।

इसने 1,570 परमाणु हथियारों की सैन्य तैनाती कर रखी है जबकि 2,745 हथियारों को रिजर्व रखा है। बाकी परमाणु हथियारों को डिसमैंटल किया जाना है।

शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत यूनियन से हुई थी तनातनी
शीत युद्ध जब चरम पर पहुंचा तो अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच तनातनी की स्थिति ऐसी हो गई कि दोनों ने एक-दूसरे की सीमा के नजदीक परमाणु हथियार तैनात कर दिए।

1962 क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान अमेरिकी मिसाइलें इटली और तुर्की में जबकि सोवियत मिसाइलें क्यूबा में तैनात थीं। रूस ने क्यूबा पर अमेरिकी कब्जे के प्रयासों को धता बताने के लिए ऐसा किया था।

इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी ने क्यूबा के ईर्द-गिर्द नौसैनिक घेराबंदी कर दी। आखिर में केनेडी और सोवियत लीडर निकिता ख्रुश्चेव के बीच समझौता हुआ और सोवियत संघ ने क्यूबा से अपने हथियार हटा लिए। अमेरिका ने सार्वजनिक घोषणा कर कहा कि वो क्यूबा पर हमला नहीं करेगा।

यूनाइटेड किंगडम बना दुनिया का तीसरा देश
यूनाइटेड किंगडम  परमाणु हथियार हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बना। 1952 से 1973 के बीच इसने 500 परमाणु हथियार बनाए और 1981 तक यही आंकड़ा मेंटेन रखा।

उसके बाद यूके ने अपने परमाणु हथियारों का कम करना शुरू किया। इस साल के शुरुआत तक उसके पास 215 न्यूक्लियर वेपंस थे।

यूके ने 2050 आते-आते परमाणु हथियारों को घटाकर 180 तक लाने का लक्ष्य रखा है। फ्रांस ने 1960 में किया पहला परमाणु परीक्षण

फ्रांस परमाणु शक्ति संपन्न समूह का चौथा देश बना
फ्रांस परमाणु शक्ति संपन्न समूह का चौथा देश बना। उसने 1960 में पहला परमाणु परीक्षण किया और एक वक्त उसके पास 540 परमाणु हथियार हो गए।

हालांकि, पिछले 12 वर्षों में उसने करीब 300 परमाणु हथियार मेंटेन रखे। 2020 की शुरुआत में उसके पास 290 हथियार थे इनमें 280 की सैन्य तैनाती हो रखी है जबकि 10 को रिजर्व रखा गया है। पिछले 60 वर्षों में फ्रांस ने करीब 1,300 परमाणु हथियार बनाए।

फ्रांस ने करीब 1,300 परमाणु हथियार बनाए
फ्रांस परमाणु शक्ति संपन्न समूह का चौथा देश बना। उसने 1960 में पहला परमाणु परीक्षण किया और एक वक्त उसके पास 540 परमाणु हथियार हो गए।

हालांकि, पिछले 12 वर्षों में उसने करीब 300 परमाणु हथियार मेंटेन रखे। 2020 की शुरुआत में उसके पास 290 हथियार थे इनमें 280 की सैन्य तैनाती हो रखी है जबकि 10 को रिजर्व रखा गया है। पिछले 60 वर्षों में फ्रांस ने करीब 1,300 परमाणु हथियार बनाए।

भारत ने अपना पहला न्यूक्लियर टेस्ट 1974 में किया था लेकिन 1998 में पोखरण टेस्ट के बाद खजाना भरने की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत ने अब तक सिर्फ तीन परमाणु परीक्षण ही किए और किसी पर पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति अपना रखी है।

हालांकि, भारत ने सीटीबीटी या परमाणु अप्रसार संधि  पर दस्तखत नहीं किया है। भारत के पास 150 परमाणु हथियार होने का अनुमान है। भारत की तीनों सेनाओं ने अपने बेड़े में परमाणु हथियारों को शामिल कर रखा है।

पाकिस्तान ने मई 1998 में किया परमाणु परीक्षण
पाकिस्तान ने भारत का पीछा करते हुए मई 1998 में परमाणु परीक्षण को अंजाम दिाय। उसेक पास अभी 160 परमाणु हथियार हैं।  अनुमान है कि वह अगले 10 वर्षों तक परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाता रहेगा। वो प्लूटोनियम और यूरोनियम आधारित परमाणु हथियार तैयार करने में जुटा है।


हिल चुकी है जापान की अर्थव्यवस्था, महामारी से पैदा हुए ऐसे हालात

हिल चुकी है जापान की अर्थव्यवस्था, महामारी से पैदा हुए ऐसे हालात

दुनिया का तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के जर्जर हालात कोरोना वायरस महामारी (coronavirus pandemic) के जरिए सामने आ रही है। टोक्यो में इसी महामारी के कारण भूखों रह रहे लोगों के लिए खाने का इंतजाम करने वाले युइचिरो (Yuichiro) देश में महामारी के कारण गरीबी के हालात के बारे में बताते हुए भावुक हो गए। जापान की गरीबी सामने आई है।

ठंड के समय टोक्यो की सड़क पर प्लास्टिक की थैलियां चुनने वाले एक 46 वर्षीय शख्स ने बताया कि अब तक वे कंस्ट्रक्शन का काम कर रहे थे लेकिन अब कोई काम नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया, 'लोग रेलवे स्टेशनों पर सोने को मजबूर हैं, कुछ भूख से तड़प तड़प कर जान दे रहे हैं।'

वॉलंटियर टीम से भोजन, कपड़े, स्लीपिंग बैग और चिकित्सा सहायता प्राप्त करने के लिए टोक्यो के भीड़-भाड़ वाले इकेबुकुरो जिले में लगभग 250 लोगों की लंबी कतार लगी। इसमें उनलोगों को भी सलाह दी गई जो रोजगार की तलाश कर रहे हैं। 

विशेषज्ञों ने आगाह किया कि आर्थिक तौर पर कमजोर होना आत्महत्या के दर में बढ़ोतरी की संकेत देता है। विशेषकर महिलाएं इस पीड़ा को झेल रहीं हैं क्योंकि अधिकांश महिलाएं रेस्त्राआं व होटलों में काम करती थी जो महामारी के कारण बंद हो चुका है। ये महिलाएं मदद लेने के लिए आगे आने में शर्म और झिझक महसूस करती हैं। न ही ये पुरुषों के साथ कतार में लगकर खाना लेने आती हैं।

संसद के नए सत्र के अपने भाषण में जापान के प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा ने कहा कि वायरस को नियंत्रित करने के लिए सरकार जुर्माने और मुआवजे के प्रावधान के साथ कानून संशोधित करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का फरवरी के आखिर में टीकाकरण शुरू करने का लक्ष्य है। जापान में अब तक कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 2 लाख 89 हजार से अधिक हो चुकी है और करीब 4,060 लोगों की देश में कोरोना से मौत हो चुकी है।


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