ऑफिस में इन 10 बातो का रखे ध्यान, टेंशन से मिलेगा निजात

ऑफिस में इन 10 बातो का रखे ध्यान, टेंशन से मिलेगा निजात

ऑफिस आजकल हर किसी की जिंदगी का भाग बन चुका है. यहां अपने दिल व दिमाग का दबदबा बनाने के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखें. बता रही हैं मोनिका अग्रवाल

एक आईटी कंपनी में कार्यरत अंजलि सक्सेना बताती हैं, ‘हमारी कंपनी में महिला कर्मियों के साथ बहुत भेदभाव होता है. प्रारम्भ में मुझे लगा कि मैं नई हूं, इसलिए ऐसा मेरे साथ हो रहा है, लेकिन बाद में ठीक बात समझ आई.  किसी इवेंट या बैठक में बॉस  हमेशा मेरे पुरुष सहकर्मियों  को ही आगे रखते हैं. उन्हें लगता है कि एक महिला तरीका से उन बातों को समझा नहीं सकती.’

वैसे कामकाजी स्त्रियों में से कम ही होंगी, जिन्हें ऐसा महसूस न करना पड़ा हो. महिला होने के नाते हम अपने कामकाजी ज़िंदगी में पूर्वाग्रहों का शिकार हो जाते हैं. मसलन, स्त्रियों को तो केवल फैशन व खानपान से मतलब होता है, साइंस व टेक्नोलॉजी की बात नहीं की जा सकती. अगर वर्कप्लेस में आप भी ऐसे पूर्वाग्रहों का शिकार हो रही हैं, तो अपना असर जमाने के लिए कुछ बातों पर गौर जरूर कीजिए.

1. बैठक का भाग बनें-
नए कार्यालय में अपने व्यवहार में धैर्य व संतुलन बरतें. आपको जो भी कार्य मिले, उसे तत्परता व उत्साह से तय समय पर पूरा करने की प्रयास करें. यदि कुछ समझ नहीं आ रहा तो चुप बैठने की बजाय संबंधित आदमी से मदद लें. ये न सोचें कि इससे गलत असर पड़ेगा. 

किसी बैठक में भाग लेने जा रही हैं, तो सहकर्मियों से उसके बारे में छोटी वार्ता करें. साथ ही बैठक में सक्रिय सहभागिता करें. बोलें जरूर, लेकिन ऐसा जो बैठक के मामले में कुछ उपयोगी बात जोड़े. अपने कार्य को संक्षिप्त व प्रभावी तरीका से रखें. न  किसी दूसरे की बात काटें व न यह दर्शाएं कि आप ही ठीक हैं. वक्त व मौके की नजाकत का ध्यान रखें.

2. हम शब्द का इस्तेमाल कम करें-
शोध बताते हैं कि महिलाएं ‘हम’ शब्द का उपयोग अधिक करती हैं, जबकि पुरुष ‘मुझे’ शब्द का अधिक इस्तेमाल करते हैं. जहां तक संभव हो ‘हम’ का इस्तेमाल कम करें, इससे आत्मविश्वास की कमी दिखाई देगी. आज के समय में अपने लिए किए गए काम का श्रेय लेना, न केवल आपके करियर के लिए जरूरी है, बल्कि आपकी कंपनी के लिए भी महत्वपूर्ण है. ‘मेरा मानना है’ या ‘मेरी राय में’ जैसे वाक्यों से आपका आत्मविश्वास झलकेगा. सामने वाले आदमी पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा.

3. सिर्फ श्रेय लेने की न सोचें-
एक्सपर्ट के अनुसार, श्रेय के लिए परेशान रहने की जगह, पहचान बनाने की प्रयास करें. आपके पास पहला इम्प्रेशन देने के लिए कुछ सेकेंड ही होते हैं. याद रखिए हमारी आंखों का कार्य भी वही होता है, जो कैमरे का. बस कुछ सेकेंड में ही इम्प्रेशन तय हो जाता है. उसी से आपकी छवि बनती है. अगर आप चाहती हैं कि आफिस में आपका पॉजिटिव इम्प्रेशन पड़े, तो अपनी छवि साफ रखें. सिर्फ श्रेय के लिए लालायित रहने वाली महिलाकर्मी की बजाय कुछ ऐसी सहयोगी बनें, जिसके नजरिए की सभी तारीफ करते हों.

4. बॉडी लैंग्वेज- 
यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वार्ता करते समय आपकी बॉडी लैंग्वेज से आत्मविश्वास झलके. मुस्कुराइए व आत्मविश्वास के साथ सीधे आंखों में आंखें डालकर बात कीजिए. आपको ‘6डी’ को अपने में लाना है. यानी डिजायर (इच्छा), डायरेक्शन (दिशा), डिसिप्लिन (अनुशासन), डिटर्मिनेशन (दृढ़ता), ड्रीम (सपना), डेस्टिनेशन (मंजिल). 
 
5. तोल-मोल के बोल- 
कार्यालय में बनावटी लहजे या बनावटी बातों में किसी की दिलचस्पी नहीं होती. यह आपकी गरिमा को कम करने वाला होता है. ठीक व आसानी से बोलने पर आपकी बात का सुना भी जाएगा व इससे आपकी अलग इमेज भी उभर कर आएगी. आप जो भी बात करें, उनमें  द्विअर्थी शब्दों का इस्तेमाल न हो, इसका ध्यान रखिए. केवल महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ही बात करें. यह आपके टैलेंट में चार चांद लगाएगा.

6. स्वस्थ प्रतियोगिता रखें, ईर्ष्या नहीं-
जैसे पांचों उंगलियां बराबर नहीं होतीं, अच्छा उसी तरह किसी की क्षमता में समानता नहीं होती. इसलिए खुद की तुलना दूसरे सहकर्मी से करने पर नुकसान हमारा ही है. हमारी ही कार्यक्षमता पर निगेटिव असर पड़ेगा. बेहतर है कि आप कार्यालय में जो भी कार्य कर रही हों, मन लगाकर कर करें. भले ही सामने वाला आपकी बुराई कर रहा हो, पर विचलित होने की स्थान सामान्य रहें. यह आपका सकारात्मक कदम होगा.

7. दिखावा न करें-
हर आदमी अपनी वो खूबियां दिखाने में अपना वक्त गंवाता है, जो उसमें नहीं हैं. कार्यालय में अगर आप ऐसा करते हैं, तो अधिकारियों के लिए आप सिरदर्द भी बन सकते हैं.  जो आप नहीं कर सकतीं, उसे हाथ में लेकर वह कार्य बेकार मत कीजिए. अगर अपनी क्षमताओं को लेकर यथार्थ सोच के साथ उत्साही कर्मचारी बनेंगी, तो सभी का भरोसा जीत पाएंगी. 

8. पहचानें सफलता की एबीसी-
एबीसी यानी कि एबिलिटी (क्षमती), ब्रेक (विश्राम) व करेज (हौसला). ये तीन बातें सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं. अगर आप कार्यालय में पास होना चाहती हैं तो सबसे पहले खुद को पहचानिए कि आपकी सीमाएं क्या हैं. बिना अपनी सामर्थ्य व व्यक्तिगत स्थितियों को पहचाने अपने लक्ष्य मत तय कीजिए. आप अपना लक्ष्य खुद अपनी क्षमताओं को परखकर चुनेंगी, तो चुनौतियों को तोड़ आगे बढ़ पाएंगी. आपके साहसिक कदम से आपको कार्यक्षेत्र में सफलता जरूर मिलेगी व आप एक प्रगतिशील कर्मचारी के तौर पर पहचानी जाएंगी. 

9. तनाव का प्रबंधन सीखें-
पेशेवर ज़िंदगी में एक महिला का ज़िंदगी नाव की तरह होता है, जिसमें कई छेद होते हैं व प्रत्येक छेद उसके ज़िंदगी के एक जरूरी क्षेत्र का अगुवाई करता है, जैसे स्वास्थ्य, काम, शौक, जीवनसाथी, बच्चे व दोस्त.  इस नाव में सवार होकर यात्रा प्रारम्भ की तो हर स्थान से नाव में आ रहे पानी को रोक नहीं सकते. पेशेवर जिंदगी में स्त्रियों के सामने व्यक्तिगत ज़िंदगी की बहुत सारी चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं व वे तनाव से भर जाती हैं. 

कार्यस्थल से जुड़े तनाव का आपकी समग्र प्रोडक्टिविटी व स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है. वहीं आपकी टीम भी इस तनाव का शिकार हो सकती है. लिहाजा, जरा रुकें व कार्य के तनाव को कम करने का कोशिश करें. ध्यान व खुद पर धैर्य बनाने के कुछ योगाभ्यास से आप प्रोफेशनल जीवन में होने वाले तनावों को उसी वक्त में नियंत्रण में रखना सीख सकती हैं.

10. रिश्तों का हुनर तराशें- 
यदि आपके पास अच्छे इंटर-पर्सनल स्किल्स हैं, तो आप अपने सहकर्मियों के बीच सरलता से पहचानी जाएंगी. साथ ही ये कौशल सामने वाले के दिमाग पर आपका सकारात्मक प्रभाव छोड़ आपको कार्यालय में ऊर्जावान बनाएगा.

प्रतिस्पर्धा के इस युग में सभी सफलता चाहते हैं. इसके लिए वर्क-प्लेस पर पूर्ण सरेंडर से कार्य करें । सकारात्मक सोच, कार्य में आपकी भागीदारी, साझेदारी और योगदान से ही  आप अपने कार्यस्थल पर अपना दबदबा बना सकती हैं.