महान रेसलर व कॉमनवेल्थ‍ गेम्स में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले दादू चौगुले की  हो गयी मौत 

महान रेसलर व कॉमनवेल्थ‍ गेम्स में देश के लिए सिल्वर मेडल जीतने वाले दादू चौगुले की  हो गयी मौत 

भारतीय रेसलिंग जगत को बड़ा नुकसान हुआ है. महान रेसलर व कॉमनवेल्थ‍ गेम्समें देश के लिए सि ल्वर मेडल जीतने वाले दादू चौगुले की मौत हो गई है. इस समाचार के साथ ही पहलवानों में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. महाराष्‍ट्र के कोल्हापुर में उन्हें हार्ट अटैक आया, जहां उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। उनके परिवार ने यह जानकारी दी। वह 73 वर्ष के थे। उनके परिवार में दो बेटे हैं। उनके परिजनों के मुताबिक चौगुले अस्थमा से पीड़ित थे, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

रविवार को दोपहर दो बजे दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। किसान परिवार में जन्में चौगुले बचपन में सात वर्ष की आयु में कुश्ती प्रारम्भ करने के बाद 10 वर्ष की आयु में मोतीबाग तालिम से जुड़े थे। मोतीबाग तालिम को पहलवानों के सबसे पुराने अखाड़ों में से जाना जाता है। गणपत राव अंधालकर व बालू बिरे जैसे दिग्गजों से प्रशिक्षण लेने वाले चौगुले ने 1970 के दशक में महाराष्ट्र केसरी, रूस्तम हिन्द केसरी व महान हिंदुस्तान केसरी जैसे प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किए.

चौगुले ने दो बार महाराष्ट्र केसरी का खिताब जीता था, जो बहुत ज्यादा समय तक एक रिकॉर्ड भी था। दादू को आज भी उन पहवानाें द्वारा याद किया जाता है, जिन्होंने पहलवान सादिक पंजाबी, सतपाल जैसे बड़े उस्तादों के साथ लड़ाई लड़ी। उन्होंने 1974 में न्यूजीलैंड में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीता था। खेलों में उपलब्धि के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ध्यानचंद पुरस्कार भी दिया गया था. उन्हें यह सम्मान 25 सितंबर 2018 को राष्ट्रपति कोविंद ने दिया.