रंगों की जगह मिट्टी से पेंटिंग करता है ये कलाकार, जानिए कैसे...

रंगों की जगह मिट्टी से पेंटिंग करता है ये कलाकार,  जानिए कैसे...

रंगों से संसार है व संसार में अगर रंग ही न हो तो सब मिट्टी सा लगने लगेगा, लेकिन इसी मिट्टी के रंग से जब पेंटिंग बनाई जाए तो कैसा लगेगा।

Related image

मिट्टी के खिलौने तो आपने बहुत ज्यादा देखे होंगे, लेकिन मिट्टी से पेंटिंग भी बनाई जा सकती है, ये शायद ही आपने सुना होगा। चमोली गढ़वाल में गौचर के पास तोलसैंण के 17 वर्ष के आय़ुष बिष्ट पिछले डेढ़ वर्षों से पहाड़ की भिन्न-भिन्न मिट्टी से चित्रकारी कर रहा है। आयुष बिष्ट किसी भी रंग का इस्तेमाल अपनी चित्रकारी के लिए नहीं करता है।

रंगों से नहीं ऐसे बनाते हैं पेंटिंग्स
17 वर्ष के युवक आयुष बिष्ट, जो किसी रंग से नहीं बल्कि भिन्न-भिन्न मिट्टी से कलाकारी करते हैं। वह मिट्टी, अगरबत्ती की राख व लकड़ी के कोयलों से पिछले 1.5 वर्षों से भिन्न-भिन्न पेंटिंग बना रहे हैं।

इसलिए प्रारम्भ की मिट्टी की पेंटिंग्स बनाना
आयुष बिष्ट का बोलना है जब हो कक्षा 5 में था, तब से उसकी रुचि पेंटिंग में है। आय़ुष ने बताया पहाड़ों में अच्छे कलर नहीं मिलते है व मिलते भी है तो बहुत ज्यादा महंगे मिलते है।आयुष का सपना है कि पर्वतीय इलाकों में ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी माटी का प्रयोग रंगों को बनाने में करें। आयुष बताते हैं पहाडों में जब बारिश होती है, तो मिट्टी के छीटों से मकान की दीवारों में कई आकृतियां बनती है व इसी आकृतियों को देखकर उसके मन में मिट्टी से पेंटिंग का ख्याल आया।

मिट्टी से पेंटिग नहीं है संसार में पॉपुलर
संसार में पेंटिंग्स एक ऐसा शौक है, जिसे करने में बहुत ज्यादा खर्च हो जाता है। प्रसिद्ध पेंटर अपनी पेंटिंग को बनाने में स्प्रे, पेंसिल कलर व आयल कलर का इस्तेमाल ज्यादा करते है।

पेंटिंग बनाकर अब दे रहे हैं ये संदेश
आयुष ने 12वीं की इम्तिहान अपने पैतृक गांव से की। पिता जल संस्थान में कार्यरत है व मां गृहणी है। 12वीं की इम्तिहान पास करने के बाद आय़ुष को कला के क्षेत्र में व भी सीखने की ललक उसे देहरादून ले आई। आयुष देहरादून में अपने मामा व मामी के साथ रहकर फाईन आर्ट्स में स्तानक की पढ़ाई कर रहा है। उसका सपना है कि वो पहाड़ की लोक संस्कृति को आगे बढ़ा सके।

पलायन के दर्द को बचपन से देख रहा आयुष के मन में अपने जड़ों से जुड़ने की अनोखी सोच है। आयुष के परिजन भी उसकी अनोखी सोच व प्रतिभा देखकर खुश है। आयुष के मामा ने प्रकाश फर्स्वाण ने बोला कि भांजे ने पहाड़ी की माटी से पहाड़ से पलायन कर चुके लोगों को जोड़ने की अनोखी मुहिम प्रारम्भ की है। वहीं, मामी नीतू फर्स्वाण कहती हैं वो भी शुरू-शुरू में चकित रह जाती थी, जब वह मिट्टी से पेंटिंग बनाता था।