शमीमा बेगम ने ब्रिटेन स्थित में अपने घर लौटने की जताई ख़्वाहिश

शमीमा बेगम ने ब्रिटेन स्थित में अपने घर लौटने की जताई ख़्वाहिश

बंग्लादेश मूल की ब्रिटिश किशोरी शमीमा बेगम के 2015 में इस्लामिक स्टेट (आईएस) की जिहादी दुल्हन बनने के लिए भाग जाने को उसके परिवार के एडवोकेट ने ब्रिटिश अधिकारियों की विफलता करार दिया. एडवोकेट ने बोला कि यह ब्रिटिश अधिकारियों की विफलता ही है, जिसके कारण शमीमा चरमपंथियों के असर से बचने में नाकम रही व वहां जाकर दुल्हन और कट्टरपंथी बनी.

19 वर्ष की बेगम 3 छात्राओं में से एक थीं, जो इस आतंकवादी समूह में शामिल होने के लिए लंदन में अपने घर से निकल गईं व इस वर्ष के प्रारम्भ में एक सीरियाई शरणार्थी शिविर में फिर से वापस आ गईं. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, बेगम के परिवार के एडवोकेट ने आरोप लगाया कि पीएम बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के चलते गृह सचिव साजिद जाविद ने किशोरी शमीमा की नागरिकता रद्द की.

सीरिया में एक शरणार्थी शिविर में मिली शमीमा बेगम ने इससे पहले वहां एक आईएस लड़ाके से विवाह की. गर्भवती होने के बाद उसने 2 बच्चों को जन्म दिया था व तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली थी, इसी दौरान उसने ब्रिटेन स्थित अपने घर लौटने की ख़्वाहिश जताई. जबकि शमीमा के सीरिया के शरणार्थी शिविर में होने की जानकारी के बाद प्रशासन ने फरवरी में उसकी नागरिकता रद्द कर दी.

शमीमा बेगम के 2 बच्चों की पहले ही मौत हो चुकी थी. उसके तीसरे बच्चे का जन्म 16 फरवरी को हुआ व 8 मार्च को न्यूमोनिया के चलते बच्चे की मौत हो गई. तब से शमीमा ब्रिटिश नागरिकता को रद्द करने के निर्णय के विरूद्ध कानूनी जंग लड़ रही है.