इजराइल के समर्थन में हिंदुस्तान ने किया ये काम, रखा ये प्रस्ताव

 इजराइल के समर्थन में हिंदुस्तान ने किया ये काम, रखा ये प्रस्ताव

इजराइल ( Israel ) व फिलीस्तीन ( Palestine ) के साथ संबंधों को लेकर हिंदुस्तान हमेशा से एक मध्यमार्ग का रूख अपनाता रहा है.

लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से हिंदुस्तान के रुख में कुछ मत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिला है. हिंदुस्तान ने दोनों राष्ट्रों के साथ अपने रिश्तों को भिन्न-भिन्न ढंग से निभाने के लिए नयीरणनीति अपनाई है. इसी कड़ी में हिंदुस्तान ने अब एक बड़ा निर्णय लिया है. दरअसल, हिंदुस्तान ने अपने पुराने रुख में परिवर्तन करते हुए संयुक्त देश ( united nation ) में इजराइल का समर्थन किया है. हिंदुस्तान ने संयुक्त देश की आर्थिक व सामाजिक परिषद ( ECOSOC ) में इजराइल के प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है. इससे पहले तक हिंदुस्तान दूरी बनाता रहा है.

क्या है इजराइल का प्रस्ताव?

इजराइल ने संयुक्त देश में फिलीस्तीन के निर्णय को लेकर प्रस्ताव रखा था. अपने प्रस्ताव में इजराइल ने फिलीस्तीन के एक गैर-सरकारी संगठन 'शहीद’ को सलाहकार का पंजीकृता दिए जाने को लेकर असहमति पंजीकृत कराई है. इजराइल ने यह आरोप लगाया है कि इस संगठन ने हमास के साथ अपने रिश्तों को लेकर कोई खुलासा नहीं किया है. बीते 6 जून को इजराइल ने संयुक्त देश की आर्थिक व सामाजिक परिषद में प्रस्ताव का मसौदा 'L.15’ पेश किया था. इस प्रस्ताव के पक्ष में 28 वोट पड़े जबकि विरोध में 14 राष्ट्रों ने मतदान किया.साथ ही पांच राष्ट्रों ने इस प्रक्रिया में भाग नहीं लिया. इस तरह से आखिरकार संगठन को संयुक्त देश में पर्यवेक्षक का पंजीकृत ा देने का प्रस्ताव खारिज हो गया. बता दें कि प्रस्ताव के पक्ष में ब्राजील , कनाडा, कोलंबिया, फ्रांस , जर्मनी , भारत, आयरलैंड, जापान , कोरिया, यूक्रेन , ब्रिटेन व अमरीका ने वोट किया, जबकि विरोध में मिस्र, पाक , तुर्की , वेनेजुएला , यमन, ईरान व चाइना समेत 14 राष्ट्रों ने वोट किया. इसके साथ ही अब परिषद ने संगठन के आवेदन को लौटाने का निर्णय किया है, क्योंकि इस वर्ष की शुरूआत में जब विचार किया जा रहा था तो संगठन की ओर से कुछ जरूरी जानकारियां नहीं दी जा सकी थी.

इजराइल ने हिंदुस्तान का जताया आभार

संयुक्त देश में प्रस्ताव के समर्थन में वोट करने को लेकर इजराइल ने हिंदुस्तान का आभार जाहीर किया है. दिल्ली स्थिति इजराइली दूतावास ने बोला हिंदुस्तान के इस निर्णय के लिए धन्यवाद जाहीर किया. इजराइली राजनयीक माया कडोश ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने को लेकर हिंदुस्तान का आभार जताते हुए एक ट्वीट किया. उसमें उन्होंने लिखा 'इजराइल के साथ खड़े रहने व आतंकवादी संगठन 'शहीद' को पर्यवेक्षक का पंजीकृत ा देने की अपील को खारिज करने के लिए हिंदुस्तान का बहुत-बहुत शुक्रिया. जिन आतंकवादीसंगठनों का मकसद हमारा नुकसान पहुंचाना है, हम साथ मिलकर उन आतंकवादी संगठन के विरूद्ध कार्य करते रहेंगे.’

भारत-इजराइल के बीच नजदीकियां

बता दें कि 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद से कई राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ( Narendra Modi ) के पर्सनल संबंध बहुत ही मधुर बने हैं. इसका सीधा लाभ हिंदुस्तान को मिल रहा है. इजराइल के पीएम बेंजामिन नेत्नयाहू ( Prime Minister Benjamin Netanyahu ) के साथ प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के घनिष्ठ संबंध हैं. दोनों एक-दूसरे को प्रिय मित्र मानते हैं. अभी हाल ही में लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत पर बेंजामिन नेत्नयाहू ने मोदी को पर्सनल तौर पर फोन कर शुभकामना दी थी. इससे पहले जब नेत्नयाहू हिंदुस्तान आए थे तो प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनका भव्य स्वागत किया था. इसके अलावे पहली बार ऐसा हुआ था कि हिंदुस्तान के किसी पीएम ने सिर्फ इजराइल की यात्रा की थी, जब पहली बार नरेंद्र मोदी इजराइल गए थे. ऐसा माना जाता रहा है कि फिलीस्तीन को नाराज नहीं करने के लिए हमेशा से हिंदुस्तान के पीएम दोनों राष्ट्रों की यात्रा करते थे.