IND Vs AUS: आखिरी वन-डे जीतकर टीम इंडिया ने बचाई साख, सीरीज 2-1 से ऑस्ट्रेलिया के नाम

IND Vs AUS: आखिरी वन-डे जीतकर टीम इंडिया ने बचाई साख, सीरीज 2-1 से ऑस्ट्रेलिया के नाम

कैनबरा(CRICKET NEWS)। टीम इंडिया ने बुधवार को मनुका ओवल मैदान पर खेले गए तीसरे और आखिरी वनडे मैच में आस्ट्रेलिया को 13 रनों से हरा दिया। टीम इंडिया की विदेशी जमीन पर 7 हार के बाद यह पहली जीत है। इसी साल फरवरी में न्यूजीलैंड ने अपने घर में भारत को 3 वनडे और 2 टेस्ट की सीरीज में क्लीन स्वीप किया था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा सीरीज के शुरुआती दो वनडे में भी हार मिली थी। इसी के साथ ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 3 वनडे की सीरीज में 2-1 शिकस्त दी।

टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए आस्ट्रेलिया के सामने 303 रनों का लक्ष्य रखा। इसके जवाब में आस्ट्रेलियाई टीम 49.3 ओवरों में 289 रनों पर ऑल आउट हो गई। मेजबान टीम के लिए कप्तान एरॉन फिंच ने 82 गेंदों पर 75 रनों की पारी खेली। ग्लैन मैक्सेवल ने 38 गेंदों पर तीन चौके और चार छक्कों की मदद से 59 रन बनाए। भारत ने कप्तान विराट कोहली के 63, हार्दिक पांड्या के नाबाद 92 और रवींद्र जडेजा की नाबाद 66 रनों की पारियों के दम पर निर्धारित 50 ओवरों में पांच विकेट खोकर 302 रन बनाए।

भारतीय बल्लेबाजों ने अंतिम सात ओवरों में 93 रन जुटाए और भारत के लिए वनडे में आस्ट्रेलिया के खिलाफ छठे विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी को अंजाम दिया। कप्तान ने अपनी अर्धशतकीय पारी में 78 गेंदों का सामना किया और पांच चौके मारे। पांड्या और जडेजा ने छठे विकेट के लिए 150 रनों की साझेदारी कर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।


आखिरकार तपकर सोना बन ही गए रिषभ पंत, बहुत झेलनी पड़ी थी आलोचना

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सिडनी टेस्ट के पांचवें दिन से एक दिन पहले की बात है, रिषभ पंत की कोहनी में चोट थी और परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि उन्हें मैच के पांचवें दिन मैदान पर उतरना था। तब पंत थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के साथ घंटों तक अभ्यास कर रहे थे। थ्रोडाउन कर रहे नुवान पूरी गति से बाउंसर नहीं फेंक रहे थे। पंत ने कहा पूरी गति से डालो, मैदान पर ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ऐसी धीमी गेंद नहीं फेंकेंगे। नुवान को लग रहा था कि कहीं पंत को चोट नहीं लग जाए, लेकिन पंत लगातार कहते दिखे, और तेज डालो, और तेज डालो। पंत उस मैच में 97 रन बनाकर आउट हुए थे और उस टेस्ट को जिताने से कुछ दूर रह गए थे, लेकिन मंगलवार को वह पहली बार कोई टेस्ट मैच जिताकर नाबाद लौटे। इस आठ दिन के अंदर नादान रिषभ, नायाब पंत बन गया।

सिडनी में 97 रन पर आउट होने के बाद जब पंत ने अपने कोच तारक सिन्हा को फोन किया, तो वह काफी निराश थे। सिन्हा ने कहा कि कभी-कभी तुम्हें खराब गेंदों को छोड़ना भी होगा। पंत का जवाब था मैं खराब गेंदों को छोड़ नहीं सकता। दरअसल, अपने करियर के शुरुआती दिनों से पंत ऐसे ही हैं। उनके अंदर युवराज सिंह जैसे छक्के लगाने की क्षमता के साथ फौलादी इरादे भी हैं। अपने तेज तर्रार शॉट की वजह से ही वह राहुल द्रविड़ के पसंदीदा बने थे और इन्हीं शॉट चयन की वजह से पंत का करियर डूबता जा रहा था। वर्ष 2020 आते-आते वह अपने पसंदीदा प्रारूप (टी-20) से बाहर हो गए थे। वनडे टीम से भी निकाले गए और टेस्ट टीम में भी पहली पसंद नहीं रहे।


पंत की मदद इस मामले में कोई दूसरा नहीं कर सकता था। पंत की लड़ाई खुद से थी। यह लड़ाई इतनी आसान भी नहीं रही, क्योंकि वीरेंद्र सहवाग भी अपने शॉट चयन की वजह से विकेट खो बैठते थे और आलोचना झेलते थे, लेकिन पंत के साथ यह बार-बार होने लगा। कई बड़े मौकों पर होने लगा। पंत भी आम से खास बनने का सपना देखते आए, लेकिन उनके सपने भी बड़े थे। वह एमएस धौनी की तरह विजयी बाउंड्री लगाकर बड़ा मैच जिताना चाहते थे। ऑस्ट्रेलिया में अभ्यास मैच में बड़ी पारी खेलने के बावजूद पहले टेस्ट में पहली पसंद रिद्धिमान साहा बने।


दिल्ली की सर्दियों में गुरुद्वारे में रात बिताकर टेस्ट कैप हासिल करने वाले पंत अंदर से टूटने वालों में से कहां थे। सिडनी टेस्ट और गाबा टेस्ट में पंत के शॉट लगाने के तरीकों में पहले से कुछ भी अलग नहीं था, अलग था तो उनके अंदर का संकल्प।

2016 में उनके साथ अंडर-19 विश्व कप खेलने वाले तेज गेंदबाज शुभम मावी ने बताया कि वह क्लीन हिटर रहे हैं। कभी भी कितना भी दबाव हो वह अपना ही खेल खेलता था। घरेलू स्तर पर वह तीन बार फेल हुआ तो अगले मैच में उसकी बड़ी पारी सब भुला देती थी। राहुल द्रविड़ सर को भी उसकी यही खासियत पसंद थी लेकिन भारतीय टीम के साथ खेलते हुए उसकी समस्या यही थी कि उसके प्राकृतिक खेल की ही आलोचना होने लगी, जिसे वह बदल नहीं सकता, लेकिन मंगलवार को उसने अपनी इसी काबिलियत से अपने अंदर के पंत को हरा दिया।

रिषभ पंत के कोच तारक सिन्हा ने कहा है, "पंत ने अब अपने सभी आलोचकों को शांत कर दिया। टीम ने उसे मौका देकर दिखाया कि वह उस पर पूरा विश्वास करती है। मुझे पूरा विश्वास है कि उसकी विकेटकीपिंग भी बेहतर होगी। जब आप अपनी जगह को लेकर संतुष्ट हो जाओ और सभी कहें कि आप अच्छे हो तो बाकी चीजें खुद ठीक होने लगती हैं।"


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