तमिलनाडु ने धमाकेदार जीत से रचा इतिहास, हैदराबाद को पीट पहुंची फाइनल में

तमिलनाडु ने धमाकेदार जीत से रचा इतिहास, हैदराबाद को पीट पहुंची फाइनल में

भारत की घरेलू टी20 टूर्नामेंट सैयद मुश्ताक अली ट्राफी के फाइनल में पहुंचने वाली पहली टीम का फैसला हो गया है। तमिलनाडु ने धमाकेदार प्रदर्शन के दम पर हैदराबाद को मात देकर लगातार तीसरी बार फाइनल में जगह पक्की की। इस टूर्नामेंट में ऐसा करने वाली तमिलनाडु पहली टीम बन गई है। घातक गेंदबाजी के दम पर टीम ने पहले हैदराबाद को 90 रन पर समेटा और फिर 14.2 ओवर में 2 विकेट गंवाकर लक्ष्य हासिल कर शान से फाइनल का टिकट पक्का किया।


शनिवार को खेले गए टूर्नामेंट के पहले सेमीफाइनल में तमिलनाडु के कप्तान विजय शंकर ने टास जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। पी श्रवण कुमार की धारदार गेंदबाजी के आगे हैदराबाद की बल्लेबाजी बेबस नजर आई। इस बड़े मैच में कुमार ने अकेले आधी हैदराबाद की आधी टीम को मैदान से वापस लौटने पर मजबूर कर दिया। 3.3 ओवर में श्रवन ने 21 रन दिए और 5 विकेट चटकाए। मुरुगन अश्विन एम मोहम्मद ने 2-2 विकेट हासिल किए। साई किशोर को एक विकेट मिला।


91 रन के छोटे से लक्ष्य का पीछा करने उतरी तमिलनाडु की टीम को पहला झटका 15 रन के स्कोर पर लगा। एन जगदीशन महज 1 रन बनाकर ही वापस लौट गए। इसके बाद इसी ओवर में हरि निशांत भी आउट हो गए। 16 रन पर दो विकेट गंवाने के बाद कप्तान विजय (43) ने साई सुदर्शन (34) के साथ मिलकर मैच को खत्म कर टीम को फाइनल में पहुंचाया।

लगातार तीसरी बार फाइनल में

सैयद मुश्ताक अली ट्राफी फाइनल में लगातार तीसरी बार पहुंचकर तमिल नाडु की टीम ने इतिहास रचा है। इससे पहले किसी भी टीम ने ऐसा कमाल नहीं किया था। तमिल नाडु की टीम ने पिछले दो लगातार सीजन में फाइनल में जगह बनाई थी। 2019-20 में टीम को कर्नाटक ने हराया था जबकि पिछले सीजन में बड़ौदा को हरा तमिल नाडु की टीम चैंपियन बनी थी।


एंटीलिया केस: क्रिकेट बुकी नरेश गौर की जमानत पर रोक का आदेश खारिज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी राहत

एंटीलिया केस: क्रिकेट बुकी नरेश गौर की जमानत पर रोक का आदेश खारिज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी राहत

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एंटीलिया मामले में गिरफ्तार क्रिकेट बुकी नरेश गौर की जमानत पर रोक का विशेष अदालत का आदेश खारिज कर दिया। 

हाईकोर्ट की जस्टिस एसके शिंदे की एकल पीठ ने बुधवार को गौर द्वारा दायर अर्जी की सुनवाई की। इसमें गौर ने उसे मिली 25 दिन की जमानत पर विशेष एनआईए कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को चुनौती दी थी। एनआईए ने आरोपी गौर को इस साल मार्च में गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि वह एंटीलिया बम दहशत केस में और कारोबारी मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में शामिल है।

20 नवंबर को विशेष एनआईए कोर्ट ने उसे इस आधार पर जमानत दे दी थी कि प्रथम दृट्या यह पाया गया है कि उसे साजिश की जानकारी नहीं थी। गौर केस का पहला आरोपी है, जिसे जमानत मिली है। हालांकि इसके बाद विशेष कोर्ट ने 25 दिन की जमानत देने के अपने ही आदेश पर अभियोजन पक्ष के आग्रह पर रोक लगा दी थी। 

इसके बाद गौर ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। गौर ने अपने वकील अनिकेत निकम के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील दायर कर विशेष कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। यह मामला मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के निवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से लदी एसयूवी खड़ी करने से जुड़ा है। 

गौर ने अपनी अपील में कहा कि विशेष कोर्ट ने उसे इस आधार पर जमानत दी थी कि उसकी एंटीलिया साजिश और मनसुख हिरेन हत्याकांड में कोई भूमिका नहीं है। इसके बाद एनआईए कोर्ट को अपने ही आदेश पर रोक नहीं लगाना थी। इसके बाद जस्टिस शिंदे ने इन दलीलों को स्वीकार किया और जमानत पर रोक का एनआईए कोर्ट का आदेश खारिज कर दिया।