आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता पंजाब के बाद हरियाणा में मिली जीत से काफी उत्साहित

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता पंजाब के बाद हरियाणा में मिली जीत से काफी उत्साहित
 पार्टी आनें वाले नगर निगम चुनावों को देखते हुए संगठन के पंचायत, यूथ और विद्यार्थी विंग प्रदेश स्तरीय बैठक कर बूथ स्तर तक संगठन निर्माण करेगी"  आम आदमी पार्टी, संजय सिंह, अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी संगठन के विस्तार की तेजी से तैयारी में जुट गई है पार्टी आनें वाले नगर निगम चुनावों को देखते हुए संगठन के पंचायत, यूथ और विद्यार्थी विंग प्रदेश स्तरीय बैठक कर बूथ स्तर तक संगठन निर्माण करेगी

आम आदमी पार्टी संगठन के विस्तार की तेजी से तैयारी में जुट गई है पार्टी आनें वाले नगर निगम चुनावों को देखते हुए संगठन के पंचायत, यूथ और विद्यार्थी विंग प्रदेश स्तरीय बैठक कर बूथ स्तर तक संगठन निर्माण करेगी इसी क्रम में लखनऊ के गोमतीनगर स्थित प्रदेश कार्यालय में 24, 25 और 26 जून को लगातार तीन दिन बैठकें होंगी इनमें भाग लेने वाले पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को नयी जिम्मेदारी भी सौंपी जाएंगी यह जानकारी निवर्तमान प्रदेश प्रवक्ता महेन्द्र प्राताप सिंह ने गुरुवार को दी उन्होने बताया कि आम आदमी पार्टी अब आनें वाले जो भी चुनाव होंगे उन्हे जोर-शोर से लड़ेगी साथ ही संगठन को भी मजबूत करेगी

24 जून को पंचायत प्रकोष्ठ की प्रदेश स्तरीय बैठक होगी जिसमें सभी जिलों के पूर्व पदाधिकारी भाग लेंगे. इस बैठक का नेतृत्व पंचायत प्रकोष्ठ के अध्यक्ष विनय पटेल करेंगे जबकि 25 जून को युथ विंग की बैठक प्रदेश अध्यक्ष पंकज आवाना के नेतृत्व में होगी. 26 जून को विद्यार्थी विंग (सीवाईएसएस) की बैठक का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष वंशराज दुबे करेंगे हरियाणा के नगर निगम में मिली कामयाबी को देखते हुए संगठन उत्तर प्रदेश के नगर निगम चुनावों में पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है इसके लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ता का निर्माण और पूर्व पदाधिकारियों को नयी जिम्म्मेदारी जिलों में संगठन के विस्तार के लिए दी जाएगी

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता पंजाब के बाद हरियाणा में मिली जीत से काफी उत्साहित हैं उत्तर प्रदेश में भी जीत का परचम फहराने के लिए संगठन के विस्तार में तेजी से जुटे हैं उन्होने बताया कि पूरे प्रदेश के हर जिले में संगठन को विस्तार दिया जाएगा साथ ही संगठन की मजबूती के लिए कार्यक्रम किये जाएंगे





राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए

राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए

उत्तर प्रदेश की आजमगढ़ और रामपुर लोक सभा सीटों के उपचुनाव में सपा की हार के बाद पार्टी के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाए हैं. 2012 में अखिलेश यादव किस तरह से सीएम बने थे, इस बारे में भी विस्तार से बताया. राजभर ने बुधवार को जिले के रसड़ा में पार्टी के प्रधान कार्यालय पर संवाददाताओं से वार्ता में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए बोला कि वह अपने दम पर नहीं बल्कि अपने पिता मुलायम सिंह यादव की कृपा से सीएम बने थे. साल 2012 का विधानसभा चुनाव मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में हुआ था मगर ताज अखिलेश के सिर सजा.

उन्होंने अखिलेश की नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न खड़े करते हुए कहा, अखिलेश यादव के नेतृत्व में साल 2014, 2017, 2019 और 2022 में लोकसभा और विधानसभा के जो भी चुनाव हुए, सभी में समाजवादी पार्टी पराजित हुई. उपचुनाव और विधान परिषद के चुनाव में भी समाजवादी पार्टी हारी है. अखिलेश यादव स्वयं साफ करें कि अभी तक एक भी चुनाव में उन्हें जीत क्यों नहीं हासिल हुई. राजभर ने अखिलेश यादव को वातानुकूलित कमरों से निकलकर क्षेत्र में काम करने की राय देते हुए पूछा, अखिलेश यादव बताएं कि उन्होंने अभी तक धरातल पर क्या कार्य किया है. उन्होंने अभी तक कितने गांवों में बैठक की है. हाल के लोकसभा उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने स्वयं अपने पैर में कुल्हाड़ी मार ली. जिस पार्टी का मुखिया चुनाव प्रचार में नहीं जायेगा, वह पार्टी क्या चुनाव लड़ेगी? 

वर्ष 2024 में बीजेपी द्वारा यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटें जीतने की आसार संबंधी सीएम योगी आदित्यनाथ के दावे के बारे में पूछे जाने पर राजभर ने बोला कि विपक्षी दलों के नेताओं के रवैये में परिवर्तन नहीं आया तो बीजेपी यूपी में सभी 80 सीट जीत सकती है. उन्होंने इसके साथ ही बोला कि यूपी में संविधान और आरक्षण की रक्षा तथा पिछड़े वर्ग और दलितों के भलाई में बसपा, समाजवादी पार्टी तथा अन्य सभी विपक्षी दलों को एकजुट होकर चुनाव लड़ना चाहिए. राजभर ने एक प्रश्न पर राय देते हुए बोला कि अखिलेश यादव को यूपी में 2024 में होने वाले लोकसभा के आम चुनाव में 80 सीट में से 60 सीट पर स्वयं और 20 सीट पर सहयोगी दलों को चुनाव लड़ाना चाहिए.