गाजीपुर बॉर्डर पर लोग पहुंच रहे लगातार, पुलिस की मुस्तैदी से भीड़ कम

गाजीपुर बॉर्डर पर लोग पहुंच रहे लगातार, पुलिस की मुस्तैदी से भीड़ कम

कोरोना से बचने के लिए किए गए लॉकडाउन को दो माह हो चुके हैं. कमाई न होने से रोजी-रोटी के लिए लोग इतने परेशान हो चुके हैं कि अब वे किसी भी हाल में सीधे अपने घर ही जाना चाहते हैं.

 पैदल, रिक्शा, ऑटो व बस जो भी साधन उन्हें मिल रहा है वे परिवार के साथ दिल्ली से उत्तर प्रदेश गेट की ओर दौड़े चले आ रहे हैं. पुलिस भी लगातार इन लोगों को रोक कर शेल्टर होम भेज रही है. पांच दिन से यह चल रहा है. बृहस्पतिवार को भी गाजीपुर बॉर्डर पर लगातार लोग पहुंच रहे थे. बस इस बार पुलिस की मुस्तैदी से भीड़ कम रही.

गुरुग्राम के मोहम्मदपुर गांव में पत्नी शाहना व छोटे-छोटे तीन बच्चों के साथ रहकर आरिफ मजदूरी का कार्य करते थे. पत्नी सात माह की गर्भवती है. वे उप्र के बरेली जिले के रहने वाले हैं. फैक्ट्री बंद होने के बाद उसने खर्चा चलाने के लिए खांडसा सब्जी मंडी से फल लाकर गांव में बेचना प्रारम्भ किया, लेकिन गांव वालों ने उसे फेरी लगाकर फल बेचने से रोक दिया. लोगों का बोलना था कि फल व सब्जी वालों के गांव में घूमने से कोरोना फैलेगा. इसके बाद किसी तरह अब तक समय काटा. फिर मकान मालिक ने भी यह कहकर किराया मांगना प्रारम्भ कर दिया कि हम कब तक बिना किराया लिए रखें. अब जब कमाई का कोई साधन नहीं दिखा तो तीनों बच्चों व गर्भवती पत्नी को लेकर गांव की ओर निकल पड़े.

गाजीपुर डेयरी फार्म के पास आनंद विहार गोल चक्कर के नीचे पुलिस ने उन्हें रोक दिया. आरिफ का बोलना था कि वे किसी भी तरह घर पहुंचना चाहते हैं. उधर, यूपी के सीतापुर के रहने वाले सुरेंद्र दिल्ली में टिकरी बॉर्डर के पास परिवार के साथ रहकर बेलदारी का कार्य करते थे.

पत्नी सरोजिनी भी पीपीसी बाजार में कबाड़े का कार्य करती थी. दोनों लोग कमाकर चार बच्चों के साथ रहने और खाने का खर्च चला लेते थे. आकस्मित लॉकडाउन होने से पति-पत्नी दोनों का कार्य बंद हो गया. साथ ही ठेकेदारों ने एक-एक महीने की मजदूरी भी रोक ली. उनका बोलना है कि जब कार्य प्रारम्भ होगा तभी मजदूरी दे पाएंगे. जब तक पैसे थे परिवार का खर्च चलता रहा. अब मकान मालिक ने भी किराया मांगना प्रारम्भ कर दिया.

इधर, बिना कमाए चार बच्चों का खर्च चलाना कठिन हो गया. बहुत ज्यादा दिन से घर जाने के लिए बस-ट्रेन चलने का इंतजार कर रहे थे. किसी ने बताया कि उत्तर प्रदेश बॉर्डर से बसें चल रही हैं तो विवश होकर बीवी-बच्चों के साथ गांव जाने के लिए पैदल ही उत्तर प्रदेश बॉर्डर की ओर निकल पड़े. यहां पहुंचने पर पुलिस ने रोक लिया. शाम को बस में बैठाकर शेल्टर होम भेज दिया.