तंग गलियों में बने घर, घर के अंदर तंग सीढ़ियां बनीं खतरा

तंग गलियों में बने घर, घर के अंदर तंग सीढ़ियां बनीं खतरा

भीड़भाड़ वाली दिल्ली की अनाज मंडी में एक कारखाने में आग लगने से रविवार को 43 लोग मारे गए और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए. आग में मारे गए सभी लोग मजदूर थे और जब सुबह 4.30 और 5 बजे के बीच आग लगी तब वे सो रहे थे. आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है. आग लगने के बाद चारों तरफ मची अफरा-तफरी में सभी फंसे लोग चार मंजिला इमारत की उन सीढ़ियों की तरफ भागे जहां आने और जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था. रास्ते पर भीड़ बढ़ती गई और लोग वहीं फंस कर रह गए. देखते देखते जहरीले धुएं ने लोगों का दम घोंट दिया और जो बच गए वे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं.


अब तक की तफ्तीश में पता चला है कि फैक्ट्री की खिड़कियों पर प्लास्टिक का सामान रखा हुआ था. तंग इमारत होने की वजह से वेंटिलेशन के पर्याप्त और पुख्ता इंतजाम नहीं थे. हालत यह हुई कि आग में फंसे लोगों को बचाने दमकलकर्मी पहुंचे तो जरूर लेकिन उन्हें रास्ता नहीं मिल पाया. नतीजा यह हुआ कि काफी मशक्कत से वहां तक पहुंचे दमकलकर्मियों को ग्रिल काटकर अंदर घुसना पड़ा. बाहर गेट पर ताला जड़ा था, लिहाजा दमकल के कर्मचारियों ने पहले ताला तोड़ा फिर इमारत में दाखिल हुए. तब तक काफी देर हो चुकी थी और कई मजदूर अपनी जान गंवा चुके थे.

पुरानी दिल्ली के इस इलाके की सबसे बड़ी खामी यहां के खंभों पर लटकते हुए तार हैं. लगातार खतरनाक बने इन तारों से आने वाले वक्त में भी शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग सकती है लेकिन अब तक इस पर कोई मुकम्मल कार्रवाई नहीं हो सकी है.

उत्तर दिल्ली एमसीडी के स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन जयप्रकाश ने बताया कि सभी एजेंसियों को ठीक करना चाहिए लेकिन इस वक्त हमारा फोकस सिर्फ घायलों को राहत और अस्पताल पहुंचाना है. दूसरी ओर दिल्ली फायर सर्विस के चीफ अतुल गर्ग ने बताया कि बिल्डिंग में आग से निपटने के सुरक्षा इंतजाम नहीं थे और न ही आग बुझाने के उपकरण लगाए गए थे. गर्ग के मुताबिक, फैक्ट्री ने 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' भी नहीं लिया था यानी बगैर एनओसी इतनी बड़ी फैक्ट्री चलाई जा रही थी.