गोरखपुर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष के खिलाफ तहरीर, जानें- क्‍या है मामला

गोरखपुर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष के खिलाफ तहरीर, जानें- क्‍या है मामला

गोरखपुर जिला कांग्रेस कमेटी के ट्रांसपोर्टनगर स्थित कार्यालय का किराया विवाद अब थाने पर पहुंच गया है। मकान मालिक राजमन राय ने राजघाट थाने में तहरीर देकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू और जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।

यह है मामला

राजमन राय ने बताया कि 25 अक्टूबर 2019 को जिला कांग्रेस कमेटी की जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान अपने साथ तीन-चार लोगों के साथ ट्रांसपोर्ट नगर स्थित उनके दुकान पर आयी थीं। उन्होंने लोकसभा चुनाव तक के लिए कार्यालय खोलने को दिए गए कमरे को दोबारा किराये पर देने का अनुरोध किया। सचिन जायसवाल और अरुण शुक्ल के सामने 15 हजार रुपये प्रति माह किराया देने पर बात बनी। राजमन राय ने बताया कि किराया के लिए गारंटी देने के सवाल पर निर्मला पासवान ने प्रदेश अध्यक्ष अजय लल्लू की फोन से बात कराई।

3.90 लाख रुपये हो गया है क‍िराया

अजय लल्लू ने कहा कि किराया कांग्रेस पार्टी देगी। इसके बाद कांग्रेस के कार्यालय के लिए उन्होंने कमरा खोल दिया। राजमन का आरोप है कि वह लगातार किराया मांगते रहे लेकिन निर्मला पासवान सिर्फ आश्वासन देती रहीं। अब किराया 3.90 लाख रुपये हो गया है। अजय लल्लू भी किराया देने के नाम पर सिर्फ आश्वासन देते हैं।

एक नवंबर को लगाया था ताला

कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने तारामंडल क्षेत्र के चंपा देवी पार्क में 31 अक्टूबर को जनसभा को संबोधित किया था। उनके जाने के अगले दिन यानी एक नवंबर को मकान मालिक ने ट्रांसपोर्टनगर स्थित जिला कार्यालय पर ताला लगा दिया। तबसे कांग्रेसियों की बैठक इधर-उधर ही हो रही है।

तहरीर दिये जाने की कोई जानकारी नहीं है। पुलिस कोई जानकारी मांगेगी तो दी जाएगी। तहरीर देने वाले से हमने कोई एग्रीमेंट नहीं किया था। वह किस आधार पर आरोप लगा रहे हैं, यह समझ से परे है। 


जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जनरल बिपिन रावत शुरू से ही नंबर वन थे। उनके साथ गोरखा रेजीमेंट में लंबे समय तक रहे कर्नल गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी बेहद करीबी मित्रों में से हैं। हमेशा जनरल बिपिन रावत उनके संपर्क में रहे। बुधवार की शाम अपने करीबी मित्र के निधन की खबर ने उनको भीतर तक हिला दिया। आंखें भर आईं। पत्नी के साथ कर्नल गोपाल चतुर्वेदी अब मित्र जनरल बिपिन रावत की अंत्येष्टि में जाने की तैयारी कर रहे थे।

गोमतीनगर में रहने वाले कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि फौजी होते हुए भी जनरल रावत शांत स्वभाव के थे। सेना में एक संत जैसा अफसर, जिसे बाकी दुनिया से मानो कोई मतलब नहीं था। 1978 में कमीशन हुए तो दोनों एक ही कॉलेज 5/11 डोगरा पल्टन में साथ थे। साथ ही कई ऑपरेशन में शामिल हुए। सहज इतने कि बड़े अफसर बनने के बावजूद भी कभी लावलश्कर और सैन्य सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे।

एक दिन उन्होंने देखा कि बाहर से आने के बाद स्टेशन से रिक्शा लेकर रेसकोर्स के बगल में स्थित 11 गोरखा रेजिमेंट चले आए, जबकि वह पूर्व सूचना दे देते तो उनको लेने सेना की गाड़ी और पेट्रोलिंग काफिला जाता। सेना में जब से आए शीर्ष पर रहे। लखनऊ में 11 गोरखा रायफल में दोनों साथ थे। कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि एक बार एक पुस्तक पर जनरल बिपिन रावत काम कर रहे थे। ऐसे में बिना गाड़ी लिए पत्नी की मोपेड लेकर प्रिंटिंग प्रेस चले जाते थे। पास आउट परेड में ही नंबर वन कैडेट थे। कोविड आया तो अपनी सैलरी से लगातार दान देते रहे। 

लखनऊ से रहा उनका जुड़ाव

गोरखा बटालियन के जवानों से मिलने जनरल बिपिन रावत अक्सर लखनऊ आते रहे। जनरल रावत ने ही मध्य कमान मुख्यालय को मजबूती देने के लिए सेंट्रल थिएटर कमांड बनाने का खाका तैयार किया। उन्होंने एशिया की सबसे बड़ी मेडिकल एक्सरसाइज मार्च 2019 में लखनऊ में करायी। खुद इसका नेतृत्व किया। 

भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बनने के बाद जनरल बिपिन रावत लखनऊ स्थित 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट बन गए थे। यहां रेजीमेंटल सेंटर की स्थापना की हीरक जयंती समारोह और पुनर्मिलन समारोह में जनरल बिपिन रावत शामिल हुए। देश के पहले सीडीएस बनने के बाद उन्होंने 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट का पद छोड़ दिया। 

जनरल बिपिन रावत सेनाध्यक्ष बनने के बाद नौ अप्रैल 2018 को लखनऊ आए। यहां चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए मध्य कमान मुख्यालय में ही वार गेम कांफ्रेंस में हिस्सा लिया था। इस कांफ्रेंस में पूर्वोत्तर राज्यों में चीन और कश्मीर की सुरक्षा का एक मास्टर प्लान बनाया गया। इसकी समीक्षा करने सेनाध्यक्ष जनरल रावत एक बार फिर से 25 व 26 मई 2018 को लखनऊ आए।