अखिलेश पर संजय निषाद का तंज, जो अपना परिवार नहीं संभाल पाया, वह प्रदेश क्या संभालेगा

अखिलेश पर संजय निषाद का तंज, जो अपना परिवार नहीं संभाल पाया, वह प्रदेश क्या संभालेगा

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सियासी हलचल बढ़ने लगी है। सत्तारूढ़ भाजपा हो या फिर मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी, सभी अपने गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश में जुट गए हैं। दोनों ओर से छोटे-छोटे दलों को अपने गठबंधन में शामिल करने की कवायद लगातार जारी है। इन सबके बीच राष्ट्रीय निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉक्टर संजय निषाद ने अखिलेश यादव पर जबरदस्त तंज कसा है। अखिलेश पर तंज कसते हुए निषाद ने कहा कि सत्ता में रहते हुए जो अपने परिवार को नहीं संभाल पाया, वह प्रदेश क्या संभालेगा। आपको बता दें कि संजय निषाद भाजपा के साथ गठबंधन में हैं। वह लगातार विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं।

इन सबके बीच संजय निषाद देवरिया के रुद्रपुर पहुंचे उन्होंने निषादों की सभा को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि रुद्रपुर में निषाद समाज के लोग ज्यादा हैं। ऐसे में उनकी पार्टी रुद्रपुर से चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमने भाजपा से 70 सीटों की मांग की है। फिलहाल रुद्रपुर से भाजपा के जय प्रकाश निषाद विधायक हैं और योगी सरकार में पशुधन और मत्स्य राज्य मंत्री हैं। गौरतलब है कि भाजपा संजय निषाद के बीच अब तक सीट को लेकर कोई बात नहीं बन पाई है। हाल में ही पार्टी अध्यक्ष गोरखपुर दौरे पर गए थे जहां संजय निषाद से उनकी मुलाकात हुई थी। इस दौरान योगी आदित्यनाथ और प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल भी मौजूद रहे। 

विवादित बयान

इससे पहले निषाद उस समय विवादों में आ गए थे जब उन्होंने दावा किया था कि भगवान राम राजा दशरथ के नहीं बल्कि श्रृंगी ऋषि निषाद के पुत्र थे। इसके बाद विपक्ष ने इस बयान पर भाजपा से रुख स्पष्ट करने की मांग की थी। निषाद ने कहा था, ‘‘ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम का जन्म उनकी मां को खीर खिलाने के बाद हुआ। वास्तव में ऐसा नहीं होता। इसलिये कहा जाता है कि राम दशरथ के तथाकथित पुत्र हैं और असल में वह श्रृंगी ऋषि निषाद के पुत्र थे।’’ 


जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जनरल बिपिन रावत शुरू से ही नंबर वन थे। उनके साथ गोरखा रेजीमेंट में लंबे समय तक रहे कर्नल गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी बेहद करीबी मित्रों में से हैं। हमेशा जनरल बिपिन रावत उनके संपर्क में रहे। बुधवार की शाम अपने करीबी मित्र के निधन की खबर ने उनको भीतर तक हिला दिया। आंखें भर आईं। पत्नी के साथ कर्नल गोपाल चतुर्वेदी अब मित्र जनरल बिपिन रावत की अंत्येष्टि में जाने की तैयारी कर रहे थे।

गोमतीनगर में रहने वाले कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि फौजी होते हुए भी जनरल रावत शांत स्वभाव के थे। सेना में एक संत जैसा अफसर, जिसे बाकी दुनिया से मानो कोई मतलब नहीं था। 1978 में कमीशन हुए तो दोनों एक ही कॉलेज 5/11 डोगरा पल्टन में साथ थे। साथ ही कई ऑपरेशन में शामिल हुए। सहज इतने कि बड़े अफसर बनने के बावजूद भी कभी लावलश्कर और सैन्य सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे।

एक दिन उन्होंने देखा कि बाहर से आने के बाद स्टेशन से रिक्शा लेकर रेसकोर्स के बगल में स्थित 11 गोरखा रेजिमेंट चले आए, जबकि वह पूर्व सूचना दे देते तो उनको लेने सेना की गाड़ी और पेट्रोलिंग काफिला जाता। सेना में जब से आए शीर्ष पर रहे। लखनऊ में 11 गोरखा रायफल में दोनों साथ थे। कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि एक बार एक पुस्तक पर जनरल बिपिन रावत काम कर रहे थे। ऐसे में बिना गाड़ी लिए पत्नी की मोपेड लेकर प्रिंटिंग प्रेस चले जाते थे। पास आउट परेड में ही नंबर वन कैडेट थे। कोविड आया तो अपनी सैलरी से लगातार दान देते रहे। 

लखनऊ से रहा उनका जुड़ाव

गोरखा बटालियन के जवानों से मिलने जनरल बिपिन रावत अक्सर लखनऊ आते रहे। जनरल रावत ने ही मध्य कमान मुख्यालय को मजबूती देने के लिए सेंट्रल थिएटर कमांड बनाने का खाका तैयार किया। उन्होंने एशिया की सबसे बड़ी मेडिकल एक्सरसाइज मार्च 2019 में लखनऊ में करायी। खुद इसका नेतृत्व किया। 

भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बनने के बाद जनरल बिपिन रावत लखनऊ स्थित 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट बन गए थे। यहां रेजीमेंटल सेंटर की स्थापना की हीरक जयंती समारोह और पुनर्मिलन समारोह में जनरल बिपिन रावत शामिल हुए। देश के पहले सीडीएस बनने के बाद उन्होंने 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट का पद छोड़ दिया। 

जनरल बिपिन रावत सेनाध्यक्ष बनने के बाद नौ अप्रैल 2018 को लखनऊ आए। यहां चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए मध्य कमान मुख्यालय में ही वार गेम कांफ्रेंस में हिस्सा लिया था। इस कांफ्रेंस में पूर्वोत्तर राज्यों में चीन और कश्मीर की सुरक्षा का एक मास्टर प्लान बनाया गया। इसकी समीक्षा करने सेनाध्यक्ष जनरल रावत एक बार फिर से 25 व 26 मई 2018 को लखनऊ आए।