कर्नाटक की राजनीति में 9 दिसंबर का दिन बीजेपी के लिए काफी अहम

कर्नाटक की राजनीति में 9 दिसंबर का दिन बीजेपी के लिए काफी अहम

कर्नाटक के मतदाताओं ने 165 उम्मीदवारों में से 15 विधानसभा सीटों के लिए अपने विधायक चुन लिए हैं. लेकिन देश को इन 15 विधायकों के नाम 9 दिसंबर को वोटों की गिनती के बाद ही पता चल पाएंगे.

कर्नाटक की राजनीति में 9 दिसंबर का दिन बीजेपी के लिए काफी अहम है. क्योंकि अगर बीजेपी ने 15 में कम से कम 7 सीटों पर जीत हासिल नहीं की, तो कर्नाटक की सत्ता हाथ से चली जाएगी. हालांकि, एग्जिट पोल में बीजेपी 10 से 12 सीटें जीतती दिख रही है.

यहां सवाल ये है कि आखिर ऐसी कौन-कौन राजनीतिक स्थितियां हैं, जो कर्नाटक उपचुनाव के नतीजों के बाद बन सकती हैं. यहां हम आपको ऐसी ही तीन संभावित स्थितियों के बारे में बता रहे हैं.

स्थिति 1: अगर बीजेपी जीती तो

अगर एग्जिट पोल की भविष्यवाणियां सच होती हैं और बीजेपी कम से कम सात सीटों पर जीत हासिल कर लेती है, तो ये भगवा पार्टी के लिए एक बड़ी राहत होगी. कर्नाटक में बीजेपी की सत्ता बरकरार रहेगी. लेकिन ये बीजेपी के लिए समस्याओं का अंत नहीं होगा.

दरअसल, बीजेपी ने कांग्रेस-जेडीएस के सभी अयोग्य विधायकों को राज्य की कैबिनेट में जगह देने का वादा किया था.

अब, कर्नाटक में सिर्फ 34 मंत्रिमंडल पद हैं. बीजेपी के एक आंतरिक सर्वे के मुताबिक, ऐसे 56 नेता हैं जिन्होंने तीन से ज्यादा चुनाव जीते हैं या मंत्री बनने के लायक हैं. अगर बीजेपी के 10 से ज्यादा अयोग्य विधायक जीतते हैं, तो बीजेपी के कई वफादार मंत्री बनने का मौका खो देंगे. वहीं कर्नाटक बीजेपी में पहले से ही कुछ असंतुष्ट विधायक हैं जो मंत्री पद नहीं मिलने से नाखुश हैं.

स्थिति 2: अगर बीजेपी हारी तो

अगर एग्जिट पोल की भविष्यवाणी गलत साबित हुई और बीजेपी पर्याप्त सीटें हासिल नहीं कर पाई, तो क्या होगा? ऐसे में फिर तीन संभावनाएं हैं.

पहला, अगर बीजेपी के पास एक सीट की कमी होती है, तो फिर पार्टी निर्दलीय विधायक का साथ लेने की कोशिश करेगी. एग्जिट पोल के मुताबिक, निर्दलीय उम्मीदवार शरत बचे गौड़ा को होसकोटे निर्वाचन क्षेत्र से जीत मिल रही है. भले ही गौड़ा को पार्टी ने बीजेपी से निष्कासित कर दिया गया था, लेकिन अगर पार्टी को सिर्फ एक सीट की आवश्यकता होती है, तो पार्टी उन्हें वापस ला सकती है.

बीजेपी के पास दूसरा ऑप्शन जनता दल (सेक्युलर) से संपर्क करना है, जो पहले ही बीजेपी के साथ आने की दिलचस्पी दिखा चुकी है. लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि जेडी(एस) कितनी सीटें जीतती है. एक्जिट पोल की मानें, तो जेडी(एस) को 0-2 सीटें मिल सकती हैं.

स्थिति 3: कांग्रेस-जेडी(एस) फिर से साथ आ जाएं

कर्नाटक में उपचुनाव नतीजों के बाद एक स्थिति ये भी बन सकती है कि कांग्रेस और जेडी(एस) का एक बार फिर गठबंधन हो जाए. उपचुनाव से कुछ दिन पहले, कांग्रेस के सीनियर नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो कांग्रेस जेडी(एस) के साथ गठबंधन के लिए तैयार है.

लेकिन ये गठबंधन इस बात पर निर्भर करता है कि कांग्रेस-जेडी(एस) कितनी सीटें जीतते हैं. वर्तमान में जेडी(एस) और कांग्रेस के पास विधानसभा में 101 सीटें हैं. 112 की जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए, उन्हें कम से कम 11 सीटें जीतनी होंगी.

फिलहाल, हमें सोमवार तक का इंतजार करना होगा. सोमवार को वोटों की गिनती के बाद उपचुनाव के नतीजों का ऐलान हो जाएगा. इसके साथ ही ये भी साफ हो जाएगा की कर्नाटक की अगली सियासी तस्वीर कैसी होगी?