गन्ना या जिन्ना: जेवर से सीएम योगी ने फिर अखिलेश यादव पर कस दिया तंज

गन्ना या जिन्ना: जेवर से सीएम योगी ने फिर अखिलेश यादव पर कस दिया तंज

उत्तर प्रदेश के  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उन्हें ' जिन्ना का अनुयायी' बताते हुए कहा, जिन्ना के अनुयाइयों को प्रदेश की जनता सबक सिखाने को तैयार है।

योगी ने गुरुवार को जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रखी गई आधारशिला के कार्यक्रम में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, यहां के किसानों ने कभी गन्ने की मिठास बढ़ाने का काम किया था, लेकिन कुछ लोगों ने गन्ने की मिठास को कड़वाहट में बदल दिया था। ये वही लोग थे जो आज जिन्ना के अनुयायी बने हुए हैं, जिन्हें यहां की जनता सबक सिखाने को तैयार है।

बता दें कि हाल ही में अखिलेश ने भारत विभाजन के  जिम्मेदार और पाकस्तिान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तुलना महात्मा गांधी, सरदार पटेल और पं नेहरू से करते हुए कहा था कि आजादी की लड़ाई में जिन्ना की भी प्रमुख भूमिका थी।  भाजपा एवं कांग्रेस ने उनके इस बयान की आलोचना करते हुए इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा बताया है। योगी ने प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा तेज किए गए विकास कार्यों को ऐतिहासिक बताते हुए  कहा कि भारत के नागरिकों ने एक बदलते हुए भारत को देखा है। 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' को बनते देखा है। उन्होंने इसे विकास का यज्ञ बताते हुए कहा कि नोएडा एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा, मैं उन 700 किसानों का भी धन्यवाद दूंगा, जिन्होंने बिना किसी दबाव के खुद ही लखनऊ आकर एयरपोर्ट के लिए अपनी जमीन दी थी। ये  बदले हुए प्रदेश की तस्वीर है। 

इस अवसर पर केन्द्रीय नागरिक उड्ययन मंत्री ज्योतिरादत्यि सिंधिया, उप्र के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केन्द्रीय मंत्री जनरल वी के सिंह सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। 


जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जनरल बिपिन रावत शुरू से ही नंबर वन थे। उनके साथ गोरखा रेजीमेंट में लंबे समय तक रहे कर्नल गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी बेहद करीबी मित्रों में से हैं। हमेशा जनरल बिपिन रावत उनके संपर्क में रहे। बुधवार की शाम अपने करीबी मित्र के निधन की खबर ने उनको भीतर तक हिला दिया। आंखें भर आईं। पत्नी के साथ कर्नल गोपाल चतुर्वेदी अब मित्र जनरल बिपिन रावत की अंत्येष्टि में जाने की तैयारी कर रहे थे।

गोमतीनगर में रहने वाले कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि फौजी होते हुए भी जनरल रावत शांत स्वभाव के थे। सेना में एक संत जैसा अफसर, जिसे बाकी दुनिया से मानो कोई मतलब नहीं था। 1978 में कमीशन हुए तो दोनों एक ही कॉलेज 5/11 डोगरा पल्टन में साथ थे। साथ ही कई ऑपरेशन में शामिल हुए। सहज इतने कि बड़े अफसर बनने के बावजूद भी कभी लावलश्कर और सैन्य सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे।

एक दिन उन्होंने देखा कि बाहर से आने के बाद स्टेशन से रिक्शा लेकर रेसकोर्स के बगल में स्थित 11 गोरखा रेजिमेंट चले आए, जबकि वह पूर्व सूचना दे देते तो उनको लेने सेना की गाड़ी और पेट्रोलिंग काफिला जाता। सेना में जब से आए शीर्ष पर रहे। लखनऊ में 11 गोरखा रायफल में दोनों साथ थे। कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि एक बार एक पुस्तक पर जनरल बिपिन रावत काम कर रहे थे। ऐसे में बिना गाड़ी लिए पत्नी की मोपेड लेकर प्रिंटिंग प्रेस चले जाते थे। पास आउट परेड में ही नंबर वन कैडेट थे। कोविड आया तो अपनी सैलरी से लगातार दान देते रहे। 

लखनऊ से रहा उनका जुड़ाव

गोरखा बटालियन के जवानों से मिलने जनरल बिपिन रावत अक्सर लखनऊ आते रहे। जनरल रावत ने ही मध्य कमान मुख्यालय को मजबूती देने के लिए सेंट्रल थिएटर कमांड बनाने का खाका तैयार किया। उन्होंने एशिया की सबसे बड़ी मेडिकल एक्सरसाइज मार्च 2019 में लखनऊ में करायी। खुद इसका नेतृत्व किया। 

भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बनने के बाद जनरल बिपिन रावत लखनऊ स्थित 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट बन गए थे। यहां रेजीमेंटल सेंटर की स्थापना की हीरक जयंती समारोह और पुनर्मिलन समारोह में जनरल बिपिन रावत शामिल हुए। देश के पहले सीडीएस बनने के बाद उन्होंने 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट का पद छोड़ दिया। 

जनरल बिपिन रावत सेनाध्यक्ष बनने के बाद नौ अप्रैल 2018 को लखनऊ आए। यहां चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए मध्य कमान मुख्यालय में ही वार गेम कांफ्रेंस में हिस्सा लिया था। इस कांफ्रेंस में पूर्वोत्तर राज्यों में चीन और कश्मीर की सुरक्षा का एक मास्टर प्लान बनाया गया। इसकी समीक्षा करने सेनाध्यक्ष जनरल रावत एक बार फिर से 25 व 26 मई 2018 को लखनऊ आए।