उत्तराखंड में ‘ग्रीन इकोनॉमी’ का मुद्दा उभरकर आया सामने

उत्तराखंड में ‘ग्रीन इकोनॉमी’ का मुद्दा उभरकर आया सामने

उत्तराखंड में लंबे समय की चुप्पी के बाद अब ‘ग्रीन इकोनॉमी’ या सकल पर्यावरणीय उत्पाद (ग्रॉस एन्वायरमेंट प्रोडेक्ट) को लागू करने का मुद्दा उभरकर सामने आया है. हैस्को के निर्माणकर्ता निदेशक व पद्मभूषण अनिल जोशी की इस मुहिम में प्रदेश सरकार भी योगदान को तैयार है. 

पांच मार्च को इसी सिलसिले में भारतीय वन्य जीव संस्थान में केंद्र, प्रदेश व हैस्को की संयुक्त मीटिंग होगी. प्रदेश में जीईपी को लागू करने के लिए हैस्को लंबे समय से कार्य कर रहा है. डा। अनिल जोशी के मुताबिक जीईपी का खाका तैयार करने के लिए कई संस्थाओं का योगदान लिया जा रहा है. प्रमुख सचिव वन आनंद बर्द्धन ने हैस्को का दौरा किया.

इस दौरान डा। अनिल जोशी व प्रमुख सचिव वन के बीच जीईपी को लेकर भी वार्ता हुई. प्रमुख सचिव के मुताबिक हैस्को की इस मुहिम का प्रदेश सरकार पूरा योगदान कर रही है. डा। अनिल जोशी ने बताया कि जीईपी का खाका तैयार करने के लिए पांच मार्च को दून में केंद्र, प्रदेश व हैस्को की संयुक्त मीटिंग होगी. इस मीटिंग में पीएम के सलाहकार विजय राघवन सहित देश भर के विशेषज्ञ शामिल होंगे. 

हैस्को को पर्यावरण प्रशिक्षण संस्थान के रूप में देखा जाए: आनंद वर्द्धन

हैस्को की ओर से प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन से संबंधित तकनीक का निरीक्षण करने के बाद प्रमुख सचिव वन ने बोला कि हैस्को को पर्यावरण के रूप में कार्य करने वाले प्रशिक्षण संस्थान के रूप में देखा जा सकता है. हैस्को ने संस्थान के बगल में सूख रही नदी में पानी की वापसी कराई.
 
डा। अनिल जोशी ने बताया कि हैस्को की ओर से चिता के अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर पौधा लगाने की स्मृति वन की परिकल्पना को भी प्रमुख सचिव ने पसंद किया. प्रमुख सचिव को फल प्रसंस्करण, ऊर्जा, घराट से बिजली, पानी को साफ करने, स्टीम कुकर व स्टोव, किसान बैंक आदि की जानकारी भी दी गई. 

पानी, मिट्टी, हवा आदि में सुधार का आकलन है जीईपी
डा। अनिल जोशी के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद की तर्ज पर ही जीईपी तैयार की जा सकती है. जीईपी से मोटे तौर पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि पर्यावरण की किस मूल्य पर अर्थव्यवस्था का विकास हो रहा है. यह देखा जाए कि पानी, मिट्टी, हवा, जंगल, जैव विविधता, लोगों के रहन सहन में कितना सुधार हो रहा है. इस सुधार के आकलन को ही जीईपी बोला जा सकता है. 

2013 में भी हुई थी कोशिश
केदारनाथ आपदा के बाद तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा की सरकार ने भी प्रदेश में जीईपी लागू करने का इरादा जताया था. इसके लिए नोबेल पुरस्कार विजेता सुरेश पचौरी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी किया था. इसके बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया. 

सार
हैस्को की जीईपी की मुहिम को प्रमुख सचिव (वन) ने सराहा
प्रदेश सरकार की ओर से हर योगदान का इरादा जताया
पांच मार्च को दून में होगी केंद्र, प्रदेश व हैस्को की संयुक्त बैठक