जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जनरल बिपिन रावत शुरू से ही नंबर वन थे। उनके साथ गोरखा रेजीमेंट में लंबे समय तक रहे कर्नल गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी बेहद करीबी मित्रों में से हैं। हमेशा जनरल बिपिन रावत उनके संपर्क में रहे। बुधवार की शाम अपने करीबी मित्र के निधन की खबर ने उनको भीतर तक हिला दिया। आंखें भर आईं। पत्नी के साथ कर्नल गोपाल चतुर्वेदी अब मित्र जनरल बिपिन रावत की अंत्येष्टि में जाने की तैयारी कर रहे थे।

गोमतीनगर में रहने वाले कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि फौजी होते हुए भी जनरल रावत शांत स्वभाव के थे। सेना में एक संत जैसा अफसर, जिसे बाकी दुनिया से मानो कोई मतलब नहीं था। 1978 में कमीशन हुए तो दोनों एक ही कॉलेज 5/11 डोगरा पल्टन में साथ थे। साथ ही कई ऑपरेशन में शामिल हुए। सहज इतने कि बड़े अफसर बनने के बावजूद भी कभी लावलश्कर और सैन्य सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे।

एक दिन उन्होंने देखा कि बाहर से आने के बाद स्टेशन से रिक्शा लेकर रेसकोर्स के बगल में स्थित 11 गोरखा रेजिमेंट चले आए, जबकि वह पूर्व सूचना दे देते तो उनको लेने सेना की गाड़ी और पेट्रोलिंग काफिला जाता। सेना में जब से आए शीर्ष पर रहे। लखनऊ में 11 गोरखा रायफल में दोनों साथ थे। कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि एक बार एक पुस्तक पर जनरल बिपिन रावत काम कर रहे थे। ऐसे में बिना गाड़ी लिए पत्नी की मोपेड लेकर प्रिंटिंग प्रेस चले जाते थे। पास आउट परेड में ही नंबर वन कैडेट थे। कोविड आया तो अपनी सैलरी से लगातार दान देते रहे। 

लखनऊ से रहा उनका जुड़ाव

गोरखा बटालियन के जवानों से मिलने जनरल बिपिन रावत अक्सर लखनऊ आते रहे। जनरल रावत ने ही मध्य कमान मुख्यालय को मजबूती देने के लिए सेंट्रल थिएटर कमांड बनाने का खाका तैयार किया। उन्होंने एशिया की सबसे बड़ी मेडिकल एक्सरसाइज मार्च 2019 में लखनऊ में करायी। खुद इसका नेतृत्व किया। 

भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बनने के बाद जनरल बिपिन रावत लखनऊ स्थित 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट बन गए थे। यहां रेजीमेंटल सेंटर की स्थापना की हीरक जयंती समारोह और पुनर्मिलन समारोह में जनरल बिपिन रावत शामिल हुए। देश के पहले सीडीएस बनने के बाद उन्होंने 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट का पद छोड़ दिया। 

जनरल बिपिन रावत सेनाध्यक्ष बनने के बाद नौ अप्रैल 2018 को लखनऊ आए। यहां चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए मध्य कमान मुख्यालय में ही वार गेम कांफ्रेंस में हिस्सा लिया था। इस कांफ्रेंस में पूर्वोत्तर राज्यों में चीन और कश्मीर की सुरक्षा का एक मास्टर प्लान बनाया गया। इसकी समीक्षा करने सेनाध्यक्ष जनरल रावत एक बार फिर से 25 व 26 मई 2018 को लखनऊ आए।


Makar Sankranti 2022: बाजारों में पंजाबी चिक्की, रामदाना समेत इन चीजों की बढ़ी डिमांड

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मकर संक्रांति पर्व को लेकर थोक और फुटकर बाजारों में ग्राहकों की रौनक रही। गजक, तिल के लड्डू, पंजाबी चिक्की, रामदाना समेत गुड़ और शक्कर के बने उत्पादों की अच्छी बिक्री हुई।

नया चावल और उड़द-मूंग की दाल भी खूब बिकी। हालांकि, बाजार में महंगाई की मार भी दिखी। सोशल डिस्टेंसिंग धड़ाम रही, तमाम ग्राहक मास्क तक नहीं लगाए थे। 

कानपुर नमकीन, बेकरी, गजक, पेठा एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्मल त्रिपाठी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में गुड़ और शक्कर के दाम बढ़े हैं। पिछले साल की तुलना में करीब 10-15 फीसदी दाम तेज हैं। गुड़ की गजक 240 रुपये किलो बिकी। गुड़ रोल और पंजाबी चिक्की का भाव 260 रुपये किलो रहा।

काले तिल का लड्डू 280 और सफेद तिल का लड्डू 260 रुपये किलो में बिका। बाजार में ग्राहकों की पसंद को देखते हुए चॉकलेट, खोवा, मेवा गजक भी हैं। इसके दाम अलग-अलग क्वालिटी के अनुसार 400 से 600 रुपये किलो तक है। महामंत्री शंकर लाल मतानी ने बताया कि बाजार में अच्छी संख्या में ग्राहक थे।

दोनों प्रकार के तिल के लड्डू, रामदाना, लइया की भी अच्छी डिमांड देखने को मिली। चावल और दाल कारोबारी सचिन त्रिवेदी ने बताया कि खिचड़ी में नया चावल ही इस्तेमाल में आता है। इसके चलते चावल और दालों की अच्छी बिक्री हुई।