आगरा में बच्चों को वैक्सीन कब लगेगी, इंतजार कर रहे अभिभावक

आगरा में बच्चों को वैक्सीन कब लगेगी, इंतजार कर रहे अभिभावक

स्कूल जा रहे बच्चों के अभिभावक चिंतित हैं, बच्चों को सर्दी जुकाम और बुखार की समस्या हो रही है। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण का खतरा भी नहीं टला है। ऐसे में अभिभावक जल्द से जल्द बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगवाना चाहते हैं।

दो से 18 की उम्र के बच्चों के लिए कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति मिल गई है। मगर, अभी बच्चों को वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेज रहे अभिभावक जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाना चाहते हैं। जिससे उनके बच्चों को सुरक्षा कवच मिल जाए। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. एसके वर्मन ने बताया कि बच्चों को वैक्सीन लगने में अभी समय लग सकता है। अभी कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं।


वैक्सीन की 34.16 लाख डोज लगाई गईं

16 जनवरी से 18 से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। पहले स्वास्थ्य कर्मियों, इसके बाद फ्रंटलाइन वर्कर और 60 से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन लगाई गई। अब 18 से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. एसके वर्मन ने बताया कि वैक्सीन की 34.16 लाख डोज लगाई जा चुकी हैं। इसमें से 11 लाख लोगों का टीकाकरण पूरा हो चुका है। जिले में 18 से अधिक उम्र के 32.84 लोग हैं, इन सभी को वैक्सीन की दोनों डोज लगाई जानी है।


84 दिन बाद लग रही कोविशील्ड की दूसरी डोज

कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने वालों की संख्या कम है। इसके पीछे कोविशील्ड की दूसरी डोज पहली डोज लगने के 84 दिन बाद लगना बड़ा कारण है। ऐसे में पहली डोज लगवा चुके लोग दूसरी डोज कब लगनी है इसे लेकर भ्रमित हैं। केंद्र पर 84 दिन से पहले वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने पहुंच रहे हैं उन्हें लौटाया जा रहा है। जबकि कोवैक्सीन की दूसरी डोज पहली डोज लगने के 28 दिन बाद लगाई जा रही है। कोवैक्सीन की दोनों डोज लगवाने वालों की संख्या अधिक है। 


जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जब रिक्शे पर बैठकर स्टेशन से आ गए थे जनरल बिपिन रावत... गोरखा रेजीमेंट के पुराने दोस्त ने सुनाया किस्सा

जनरल बिपिन रावत शुरू से ही नंबर वन थे। उनके साथ गोरखा रेजीमेंट में लंबे समय तक रहे कर्नल गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी बेहद करीबी मित्रों में से हैं। हमेशा जनरल बिपिन रावत उनके संपर्क में रहे। बुधवार की शाम अपने करीबी मित्र के निधन की खबर ने उनको भीतर तक हिला दिया। आंखें भर आईं। पत्नी के साथ कर्नल गोपाल चतुर्वेदी अब मित्र जनरल बिपिन रावत की अंत्येष्टि में जाने की तैयारी कर रहे थे।

गोमतीनगर में रहने वाले कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि फौजी होते हुए भी जनरल रावत शांत स्वभाव के थे। सेना में एक संत जैसा अफसर, जिसे बाकी दुनिया से मानो कोई मतलब नहीं था। 1978 में कमीशन हुए तो दोनों एक ही कॉलेज 5/11 डोगरा पल्टन में साथ थे। साथ ही कई ऑपरेशन में शामिल हुए। सहज इतने कि बड़े अफसर बनने के बावजूद भी कभी लावलश्कर और सैन्य सुविधाओं की परवाह नहीं करते थे।

एक दिन उन्होंने देखा कि बाहर से आने के बाद स्टेशन से रिक्शा लेकर रेसकोर्स के बगल में स्थित 11 गोरखा रेजिमेंट चले आए, जबकि वह पूर्व सूचना दे देते तो उनको लेने सेना की गाड़ी और पेट्रोलिंग काफिला जाता। सेना में जब से आए शीर्ष पर रहे। लखनऊ में 11 गोरखा रायफल में दोनों साथ थे। कर्नल चतुर्वेदी ने बताया कि एक बार एक पुस्तक पर जनरल बिपिन रावत काम कर रहे थे। ऐसे में बिना गाड़ी लिए पत्नी की मोपेड लेकर प्रिंटिंग प्रेस चले जाते थे। पास आउट परेड में ही नंबर वन कैडेट थे। कोविड आया तो अपनी सैलरी से लगातार दान देते रहे। 

लखनऊ से रहा उनका जुड़ाव

गोरखा बटालियन के जवानों से मिलने जनरल बिपिन रावत अक्सर लखनऊ आते रहे। जनरल रावत ने ही मध्य कमान मुख्यालय को मजबूती देने के लिए सेंट्रल थिएटर कमांड बनाने का खाका तैयार किया। उन्होंने एशिया की सबसे बड़ी मेडिकल एक्सरसाइज मार्च 2019 में लखनऊ में करायी। खुद इसका नेतृत्व किया। 

भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बनने के बाद जनरल बिपिन रावत लखनऊ स्थित 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट बन गए थे। यहां रेजीमेंटल सेंटर की स्थापना की हीरक जयंती समारोह और पुनर्मिलन समारोह में जनरल बिपिन रावत शामिल हुए। देश के पहले सीडीएस बनने के बाद उन्होंने 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंटल सेंटर के कर्नल कमांडेंट का पद छोड़ दिया। 

जनरल बिपिन रावत सेनाध्यक्ष बनने के बाद नौ अप्रैल 2018 को लखनऊ आए। यहां चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए मध्य कमान मुख्यालय में ही वार गेम कांफ्रेंस में हिस्सा लिया था। इस कांफ्रेंस में पूर्वोत्तर राज्यों में चीन और कश्मीर की सुरक्षा का एक मास्टर प्लान बनाया गया। इसकी समीक्षा करने सेनाध्यक्ष जनरल रावत एक बार फिर से 25 व 26 मई 2018 को लखनऊ आए।