रुद्रप्रयाग में भूकंप के झटके महसूस, पवालीकांठा बुग्याल के पास रहा केंद्र

रुद्रप्रयाग में भूकंप के झटके महसूस, पवालीकांठा बुग्याल के पास रहा केंद्र

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मामूली रूप से भूकंप के झटके महसूस हुए हैं, जिसकी रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 3.3 मापी गई है। भूकंप से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं है। टिहरी और रुद्रप्रयाग जिले से सटे पवालीकांठा बुग्याल के पास भूकंप का केंद्र बताया जा रहा है।

उत्तराखंड राज्य भूकंप के लिहाज से बहुत ही संवेदनशील राज्य है। यहां बीते कुछ महीनों में कई बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रविवार दोपहर में भी रुद्रप्रयाग जिले में भूकंप के झटके महसूस हुए हैं। अगर इसी माह की बात करें तो 11 सितंबर को चमोली जिले में भी भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.7 मापी गई और इसका केंद्र चमोली जिले में जोशीमठ के पास पांच किलोमीटर की गहराई में था। इससे किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ। आपको बता दें कि इस साल जनवरी से अब तक उत्तराखंड में नौ बार धरती डोल चुकी है।


उत्तराखंड में जनवरी से अब तक सबसे ज्यादा छह बार भकूंप का केंद्र गढ़वाल मंडल में रहा है। वहीं, बात कुमाऊं गढ़वाल की करें तो यह आंकड़ा करीब दो बार ही रहा। इसके अलावा एक बार भूकंप का केंद्र नेपाल और एक बार तजाकस्तान में दर्ज किया गया था।

आखिर क्या है बार-बार भूकंप आने की वजह, आप भी जानिए 

आपको बताते हैं कि आखिर बार-बार भूकंप आने की क्या वजह है। दरअसल, पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स होती हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। इस दौरान जब बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं और नीचे की ऊर्जा बाहर आने का रास्ता खोजती हैं। इससे डिस्टर्बेंस होना शुरू होता है।


शहीद अजय रौतेला को सैन्य सम्मान के साथ नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

शहीद अजय रौतेला को सैन्य सम्मान के साथ नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

जम्मू के पुंछ में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए गढ़वाल राइफल्स और वर्तमान में 48 राष्ट्रीय राइफल के सूबेदार अजय सिंह रौतेला को सैन्य सम्मान के साथ सैकड़ों नम आंखों ने अंतिम विदाई दी ऋषिकेश के चंद्रेश्वर मोक्ष धाम घाट पर वीर सपूत पंचतत्व में विलीन हुआ। उनके बड़े पुत्र अरुण रौतेला ने उन्हें मुखाग्नि दी।


14 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के पुंछ में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में टिहरी जिले के दो सैनिक शहीद हुए थे। जिसमे खाड़ी टिहरी गढ़वाल निवासी सूबेदार अजय सिंह रौतेला (46 वर्ष) ने भी मातृभूमि के लिए महान शहादत दी।

रविवार को शहीद अजय सिंह रौतेला का पार्थिव शरीर जौलीग्रांट पहुंच गया था। जहां से सोमवार की सुबह शहीद अजय सिंह रौतेला के पार्थिव शरीर को उनके मूलगांव ले जाया गया। अंतिम दर्शन के पश्चात शहीद की अंतिम यात्रा दोपहर 12 बजे ऋषिकेश के चंद्रेश्वर मुक्तिधाम पहुंची।


मुक्तिधाम में सेना की 306 आर्टलरी फील्ड रेजीमेंट की टुकड़ी ने शहीद अजय सिंह रौतेला को शास्त्र सलामी दी। भारतीय सेना की ओर से आर्टिलरी फील्ड रेजीमेंट के कर्नल अजय कौशिक व राष्ट्रीय रायफल के सूबेदार योगेंद्र नेगी ने उन्हें पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कर्नल अजय कौशिक ने शहीद के पुत्र अरुण रौतेला को राष्ट्रीय ध्वज भेंट किया।

वहीं, प्रदेश सरकार की ओर से विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने अमर शहीद को पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी टिहरी ईवा श्रीवास्तव, एडिशनल एसपी राजन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक नरेंद्र नगर आरके चमोली पुलिस उपाधीक्षक ऋषिकेश डीसी धौंडियाल, नरेंद्र नगर के पूर्व विधायक ओमगोपाल रावत, सूबेदार प्रेमाराम, ऋषिकेश नगर निगम महापौर अनीता ममगांई, अजय के चाचा जबर सिंह रौतेला, उप जिलाधिकारी देवेंद्र सिंह नेगी, ऋषिकेश की उप जिला अधिकारी अपूर्वा, तहसीलदार अमृता शर्मा आदि ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

बारिश के कारण बदलना पड़ा स्थान

शहीद अजय सिंह रौतेला के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम मुनिकिरेती के होना तय किया गया था। यहां पर सेना की ओर से तैयारियों की की गई थी। मगर, सुबह से लगातार बारिश के कारण अंत में अंतिम संस्कार के लिए ऋषिकेश मुक्तिधाम को चुना गया।

शहीद की शान में गगनभेदी नारों से गूंजा आकाश

शहीद अजय सिंह रौतेला का पार्थिव शरीर जब मुक्तिधाम पहुंचा तो यहां पहले से ही उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में नागरिक व जनप्रतिनिधि पहुंचे थे। नागरिकों ने शहीद के सम्मान में जब तक सूरज चांद रहेगा अजय रौतेला नाम रहेगा..., अजय रौतेला तुम्हारा बलिदान नहीं भूलेगा हिंदुस्तान..., अजय रौतेला जिंदाबाद..., भारत माता की जय... और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। गगनभेदी नारों से पूरा माहौल गूंज उठा।